उत्तर प्रदेश में अब स्लीपर और ठेका बसों में सफर करना पहले से ज्यादा सुरक्षित होगा। प्रदेश सरकार ने यात्री सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए कई नए नियम लागू किए हैं। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने सभी परिवहन अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जो बसें सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगी, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
लखनऊ स्थित परिवहन आयुक्त कार्यालय से जारी इन निर्देशों के बाद अब पूरे प्रदेश में चलने वाली सभी स्लीपर बसों को तय सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य हो गया है। यह कदम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज एक मामले के बाद उठाया गया है।
नए सुरक्षा नियमों की जरूरत क्यों पड़ी
पिछले कुछ समय में देश भर में स्लीपर बसों से जुड़ी दुर्घटनाओं में कई मासूम जानें गई हैं। इन हादसों में यात्रियों को बचाने में काफी मुश्किलें आईं क्योंकि बसों में सुरक्षा व्यवस्था ठीक नहीं थी। कई बसों में आपातकालीन निकास नहीं था या फिर वे बंद थे। अग्निशमन यंत्र या तो थे ही नहीं या फिर काम के लायक नहीं थे।
इन सभी खामियों को दूर करने के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान ने कुछ जरूरी सुरक्षा उपाय बताए हैं। अब इन सभी उपायों को प्रदेश में सख्ती से लागू किया जाएगा। परिवहन विभाग का मानना है कि इन नियमों से यात्रियों की जान बचाई जा सकेगी।
चालक केबिन का विभाजन द्वार हटाना होगा
सबसे पहला और जरूरी नियम यह है कि सभी स्लीपर बसों में लगा चालक केबिन का विभाजन द्वार हटाना होगा। यह द्वार हादसे के समय यात्रियों के लिए बाहर निकलने में रुकावट बन जाता है। इसलिए बस संचालकों को तुरंत यह द्वार हटाने के आदेश दिए गए हैं।
साथ ही बसों की सभी बर्थ में लगे स्लाइडर भी हटाने होंगे। ये स्लाइडर देखने में तो सुविधा लगते हैं लेकिन खतरे की स्थिति में यात्री इनमें फंस सकते हैं। इससे लोगों को तुरंत बाहर निकलने में दिक्कत होती है।
हर बस में अग्निशमन यंत्र जरूरी
अब हर स्लीपर बस में अग्निशमन यंत्र लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। बस संचालकों को इसके लिए एक महीने का समय दिया गया है। हर बस में कम से कम दस किलोग्राम क्षमता का अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।
केवल यंत्र लगा देना ही काफी नहीं होगा। बस मालिकों को इसकी नियमित जांच भी करानी होगी। यह सुनिश्चित करना होगा कि जरूरत पड़ने पर यह यंत्र काम करे। परिवहन विभाग के अधिकारी इसकी जांच करेंगे और जिन बसों में यह व्यवस्था नहीं मिली, उन पर सख्त कार्रवाई होगी।
बस की बॉडी बढ़ाने पर रोक
कई बस मालिक अधिक सवारी बैठाने के लालच में बस की बॉडी को चेसिस से ज्यादा बढ़ा देते हैं। यह बेहद खतरनाक है क्योंकि इससे बस का संतुलन बिगड़ जाता है और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
अब जिन बसों की बॉडी तय सीमा से अधिक बढ़ाई गई है, उन्हें तुरंत सड़क से हटा दिया जाएगा। परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसी बसों की पहचान करें और उनके खिलाफ कार्रवाई करें।
पंजीकरण के नियम हुए सख्त
नई बसों के पंजीकरण के लिए भी नियम सख्त कर दिए गए हैं। अब सभी प्रकार की बसों का पंजीकरण केवल निर्धारित प्रपत्र 22 और 22ए पर ही होगा। पंजीकरण से पहले मान्यता प्राप्त परीक्षण एजेंसी की स्वीकृति लेना जरूरी होगा।
बस मालिकों को पंजीकरण के समय बस का पूरा लेआउट ड्राइंग देना होगा। इस ड्राइंग में बस की सभी माप, दरवाजों की सही स्थिति, आपातकालीन निकास और छत पर बने हैच का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए। इसके अलावा बस बॉडी बनाने वाली कंपनी की मान्यता की वैधता की भी जांच की जाएगी।
अधिकारियों को रिपोर्ट देनी होगी
परिवहन विभाग ने अपने सभी संभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन सभी नियमों की पालना की जांच करें। संभागीय परिवहन अधिकारियों को हर हाल में शुक्रवार तक अपनी रिपोर्ट परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेजनी होगी।
इस रिपोर्ट में बताना होगा कि कितनी बसों की जांच की गई, कितनी बसों में कमियां मिलीं और क्या कार्रवाई की गई। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी बस मालिक नियमों का पालन कर रहे हैं।
यात्रियों को भी रहना होगा सतर्क
सरकार ने जितने भी नियम बनाए हैं, वे सब यात्रियों की सुरक्षा के लिए हैं। लेकिन यात्रियों को भी सतर्क रहना होगा। बस में चढ़ने से पहले यह जरूर देखें कि उसमें सुरक्षा के सभी इंतजाम हैं या नहीं।
अगर किसी बस में अग्निशमन यंत्र नहीं है या आपातकालीन निकास बंद है तो इसकी शिकायत परिवहन विभाग से करें। हर यात्री को यह अधिकार है कि वह सुरक्षित सफर करे। इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज न करें।
नियम न मानने पर होगी सख्त कार्रवाई
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि जो बस मालिक इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। पहले तो चेतावनी दी जाएगी लेकिन फिर भी सुधार नहीं हुआ तो बस को जब्त कर लिया जाएगा।
यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि कोई भी बस मालिक यात्रियों की जान से खिलवाड़ न कर सके। सरकार का मानना है कि सख्ती से ही इन नियमों को लागू किया जा सकता है और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।