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Toggleउत्तर प्रदेश सरकार का सबसे बड़ा बजट पेश
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को एक बड़ी घटना हुई। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में योगी सरकार का दसवां बजट पेश किया। यह प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट है। इस बजट का आकार 9.12 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। यह योगी आदित्यनाथ की सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूरा बजट माना जा रहा है क्योंकि 2027 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कई शायरियां भी सुनाईं और मुख्यमंत्री की तारीफ की।
वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय अब एक लाख बीस हजार रुपये हो गई है। योगी सरकार के कार्यकाल में छह करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया गया है। बजट में शहरी विकास, ऊर्जा क्षेत्र, किसानों और मेधावी छात्राओं के लिए कई योजनाओं की घोषणा की गई है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है।
अखिलेश यादव ने कसा तंज
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सरकार का विदाई बजट है। उन्होंने कहा कि 2027 में सरकार का जाना पूरी तरह तय है। अखिलेश यादव ने कहा कि हर साल बजट का आकार पिछले बजट से बड़ा होता है लेकिन सरकार अपने बजट का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाती है। उन्होंने इसे सरकार की नाकामी बताया।
समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के लिए बजट में कोई रोडमैप नहीं है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की कोई ठोस योजना नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ हुई व्यापार डील से किसानों पर बड़ी मुसीबत आने वाली है। ग्रामीण विकास को लेकर भी बजट में कोई खास बात नहीं है।
तीन ट्रिलियन की इकॉनमी पर सवाल
अखिलेश यादव ने सरकार के तीन ट्रिलियन इकॉनमी के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार का दावा है कि 2025-26 में प्रदेश की जीएसडीपी 30.25 लाख करोड़ है और बजट में 36 प्रतिशत का अनुमान है। लेकिन तीन ट्रिलियन इकॉनमी के लिए 90 लाख करोड़ की जीएसडीपी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के आंकड़े और दावे मेल नहीं खाते। यह सिर्फ कागजों पर दिखावा है, जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिखता।
समाजवादी पार्टी के नेता ने एक पहेली भी सुनाई। उन्होंने कहा कि जब मुंह खोला तो बुरा बोला। इसका मतलब यह है कि सरकार जब भी कुछ बोलती है तो उसमें कोई सच्चाई नहीं होती। लोगों को झूठे वादे किए जाते हैं और धरातल पर कुछ नहीं होता।
मेधावी छात्राओं के लिए स्कूटी योजना
बजट में मेधावी छात्राओं के लिए एक खास योजना की घोषणा की गई है। सरकार ने 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है जिससे मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। इस योजना से लड़कियों को पढ़ाई में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। स्कूटी मिलने से उन्हें स्कूल और कॉलेज जाने में आसानी होगी। छात्राएं इस योजना से बेहद खुश हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद किया है।
सरकार ने टेक युवा समर्थ युवा का नारा भी बुलंद किया है। इसका मतलब है कि युवाओं को तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि अखिलेश यादव का कहना है कि सिर्फ नारे लगाने से कुछ नहीं होगा। युवाओं को असली में रोजगार चाहिए, नौकरियां चाहिए।
पूर्वांचल और बुंदेलखंड का विकास
बजट में पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाकों के विकास के लिए खास प्रावधान किए गए हैं। इन क्षेत्रों में लंबे समय से विकास की कमी रही है। सरकार का कहना है कि अब इन इलाकों में भी तेजी से विकास होगा। क्षेत्रीय असमानता को कम करने के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं।
काशी-विंध्य क्षेत्र क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण का गठन किया गया है। इसमें जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही और सोनभद्र जिले शामिल हैं। इन सभी जिलों का मिलकर नियोजित विकास किया जाएगा। इसी तरह प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्र क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण का गठन भी प्रक्रिया में है। इससे इन इलाकों का संतुलित विकास संभव हो सकेगा।
शहरी विकास पर जोर
बजट में शहरी विकास को लेकर बड़े प्रावधान किए गए हैं। आवास एवं शहरी नियोजन के लिए 7,705 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण और नए शहर प्रोत्साहन योजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इस योजना के तहत मेरठ में 35 साल, आगरा में 33 साल और लखनऊ में 22 साल बाद नई आवासीय योजनाएं शुरू की गई हैं। बुलंदशहर में पहली बार औद्योगिक योजना लांच की गई है।
लखनऊ, मेरठ, मथुरा-वृंदावन और कानपुर विकास प्राधिकरण के तहत अवसंरचना सुविधाओं के विकास के लिए अलग-अलग राशि का प्रावधान किया गया है। अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए 100 करोड़ रुपये रखे गए हैं। लखनऊ में बना राष्ट्र प्रेरणा स्थल का प्रबंधन, संचालन और सुरक्षा के लिए 50 करोड़ रुपये का कोष बनाया गया है।
बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार
बजट में ऊर्जा क्षेत्र के लिए 65,926 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह पिछले साल से 8 प्रतिशत ज्यादा है। सरकार का दावा है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में 19 घंटे, तहसील मुख्यालय में 21 घंटे 49 मिनट और जिला मुख्यालय में 24 घंटे बिजली मिलती है। किसानों के लिए नए नलकूप कनेक्शन दिए गए हैं। अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 तक कुल 2,41,088 निजी नलकूप कनेक्शन दिए गए हैं।
किसानों के लिए कृषि फीडर्स की योजना चलाई जा रही है। 4,680 फीडर्स के लक्ष्य में से 4,048 कृषि फीडर्स का निर्माण हो चुका है। इन फीडर्स पर 10 घंटे बिजली दी जा रही है जो देश में सबसे ज्यादा है। प्रदेश में 2,410 नए 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्रों का निर्माण किया गया है। 20,924 नए वितरण ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं और 85,684 ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है।
पारेषण तंत्र की क्षमता बढ़ी
उत्तर प्रदेश में बिजली के पारेषण तंत्र की क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है। साल 2016-17 में यह क्षमता 17,890 मेगावॉट थी जिसे 82 प्रतिशत बढ़ाकर अब 32,500 मेगावॉट कर दिया गया है। यह सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताई जा रही है। इससे प्रदेश में बिजली की आपूर्ति बेहतर हुई है और कटौती कम हुई है।
रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के तहत दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत ट्रेन का संचालन शुरू हो चुका है। यह ट्रेन लोगों को तेज और आरामदायक यात्रा की सुविधा देती है। लखनऊ मेट्रो के विस्तार की योजनाएं भी बनाई जा रही हैं। इससे शहरों में आवागमन आसान होगा और प्रदूषण भी कम होगा।
सामाजिक कल्याण योजनाएं
बजट में सामाजिक कल्याण योजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई है। वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए धनराशि बढ़ाई जा सकती है। शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में भी वृद्धि की संभावना है। इससे लाखों शिक्षकों को फायदा होगा। सरकार का कहना है कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों का कल्याण उसकी पहली प्राथमिकता है।
चित्रकूट लिंक परियोजना और बलरामपुर चीनी मिल्स द्वारा लखीमपुर में नई औद्योगिक इकाई स्थापित करने की योजना भी बजट में शामिल है। इन परियोजनाओं से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
वन ट्रिलियन डॉलर का सपना
योगी सरकार का सपना है कि उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाए। यह बजट उसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। सरकार का फोकस विकास, सुशासन और जनकल्याण पर है। किसानों, युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि यह सब सिर्फ कागजों पर है। जमीनी हकीकत कुछ और है। बेरोजगारी बढ़ रही है, किसान परेशान हैं और युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही। अखिलेश यादव ने कहा कि 2027 में जनता इस सरकार को विदा कर देगी। लोग असली विकास चाहते हैं, कागजी दावे नहीं।
विधानसभा में होगी विस्तृत चर्चा
बजट पेश होने के बाद विधानसभा में इस पर विस्तृत चर्चा होगी। विपक्षी दल अपने सवाल उठाएंगे और सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे। सत्तापक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाएगा और बजट को ऐतिहासिक बताएगा। यह बहस प्रदेश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण में शायरी के जरिए मुख्यमंत्री की तारीफ की। उन्होंने कहा कि योगी जी के नाम का गीत पूरा उत्तर प्रदेश गा रहा है। उनके जुनून और मेहनत से प्रदेश में अंधेरा खत्म हो रहा है और रोशनी फैल रही है। यह बजट उसी दिशा में एक और प्रयास है।
समय बताएगा कि यह बजट प्रदेश के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है। क्या यह सचमुच विकास की नई इबारत लिखेगा या सिर्फ एक विदाई बजट बनकर रह जाएगा। 2027 के चुनाव में जनता अपना फैसला सुनाएगी और तब असली तस्वीर सामने आएगी।