मथुरा के खप्परपुर में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत, आत्महत्या की आशंका

Mathura farmer family suicide: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में पांच लोगों की संदिग्ध सामूहिक आत्महत्या
Mathura farmer family suicide: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में पांच लोगों की संदिग्ध सामूहिक आत्महत्या (File Photo)

Mathura farmer family suicide: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के खप्परपुर गांव में एक किसान मनीष कुमार, उनकी पत्नी और तीन नाबालिग बच्चों की मौत मिली। पुलिस को सुसाइड नोट और वीडियो मिला है। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और जांच जारी है।

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मथुरा में परिवार की मौत का मामला

Mathura farmer family suicide: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के खप्परपुर गांव में मंगलवार को एक परिवार के पांच सदस्यों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना में तीन मासूम बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस को शक है कि यह सामूहिक आत्महत्या का मामला हो सकता है। मृतकों में एक किसान मनीष कुमार, उनकी पत्नी और तीन नाबालिग बच्चे शामिल हैं। पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट, दीवार पर लिखा संदेश और परिवार के मुखिया द्वारा बनाया गया एक वीडियो मिला है। यह घटना पूरे इलाके में सदमे की लहर लेकर आई है।

घटना की पूरी जानकारी

मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने बताया कि मृतकों में 35 वर्षीय किसान मनीष कुमार, उनकी करीब 32 साल की पत्नी और उनके तीन नाबालिग बच्चे शामिल हैं। इनमें दो बेटियां और एक बेटा था। पुलिस अधिकारी ने कहा कि परिवार के सभी सदस्य घर के एक कमरे के अंदर मृत पाए गए। घर के बाहर से दरवाजा बंद था और किसी तरह की हलचल नहीं थी।

मंगलवार की सुबह जब बच्चे खेलने के लिए बाहर नहीं आए तो मनीष के भाई को शक हुआ। उन्होंने दीवार फांदकर घर के अंदर जाने की कोशिश की। जब किसी ने दरवाजा नहीं खोला तो उन्होंने गांव के अन्य लोगों को बुलाया। ग्रामीणों की मदद से दरवाजा तोड़कर खोला गया तो अंदर सभी परिवार के सदस्य मृत अवस्था में मिले।

पुलिस जांच में मिले सबूत

पुलिस ने घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद किया है। इसके अलावा कमरे की दीवार पर भी कुछ लिखा हुआ मिला है। सबसे महत्वपूर्ण सबूत परिवार के मुखिया मनीष कुमार द्वारा बनाया गया एक वीडियो है। हालांकि पुलिस ने अभी तक सुसाइड नोट, दीवार पर लिखे संदेश या वीडियो की सामग्री के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। जांच अधिकारी इन सभी सबूतों का गहराई से अध्ययन कर रहे हैं ताकि घटना के सही कारण का पता लगाया जा सके।

पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के सही कारण और समय का पता चल सकेगा। फिलहाल पुलिस परिवार के रिश्तेदारों और गांव वालों से पूछताछ कर रही है। जांचकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि परिवार में कोई आर्थिक परेशानी थी या फिर कोई अन्य समस्या जिसकी वजह से यह कदम उठाया गया।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

खप्परपुर गांव के लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। मनीष कुमार एक किसान था और गांव में सामान्य जीवन जीता था। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार में कभी कोई बड़ा झगड़ा या समस्या दिखाई नहीं दी। कुछ पड़ोसियों ने बताया कि मनीष पिछले कुछ दिनों से थोड़ा परेशान दिख रहा था लेकिन किसी ने भी ऐसी भयानक घटना की कल्पना नहीं की थी।

गांव के बुजुर्गों ने कहा कि तीन मासूम बच्चों की मौत बहुत दुखद है। बच्चे स्थानीय स्कूल में पढ़ते थे और बहुत खुशमिजाज थे। पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है और लोग परिवार के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। कई ग्रामीणों ने कहा कि अगर मनीष कुमार को कोई परेशानी थी तो उसे गांव के बड़े लोगों से बात करनी चाहिए थी।

उत्तर प्रदेश में बढ़ते आत्महत्या के मामले

यह घटना उत्तर प्रदेश में आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर फिर से चर्चा शुरू कर सकती है। हाल के महीनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोगों ने आर्थिक तंगी, पारिवारिक समस्याओं या अन्य कारणों से आत्महत्या की। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी भी इसका एक बड़ा कारण है।

किसानों की आर्थिक स्थिति अक्सर चिंता का विषय रहती है। फसल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कर्ज का बोझ और मौसम की अनिश्चितता से कई बार किसान परिवार गंभीर आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। हालांकि इस मामले में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि मनीष कुमार किसी आर्थिक समस्या से जूझ रहा था या नहीं।

मानसिक स्वास्थ्य की जरूरत

ऐसी घटनाएं मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और जागरूकता की जरूरत को रेखांकित करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लोग अपनी समस्याओं को साझा करने में संकोच करते हैं और किसी से मदद नहीं मांगते।

सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर ऐसे कार्यक्रम चलाने चाहिए जो लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित करें। हेल्पलाइन नंबर और परामर्श सेवाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचनी चाहिए। इससे संकट में फंसे लोग समय रहते मदद ले सकेंगे और ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकेगा।

नोएडा में भी हुई समान घटना

इस घटना से पहले नोएडा के एक हाई राइज सोसायटी में भी एक दर्दनाक घटना हुई थी जहां तीन किशोर बहनों ने नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। बुधवार की सुबह करीब 2 बजे हुई इस घटना में 11, 14 और 16 साल की तीन बहनों की मौत हो गई थी। सोसायटी के निवासियों ने बताया कि जोर की आवाज और चीखने की आवाज सुनकर लोग अपने घरों से बाहर निकले थे।

टॉवर A4 की दसवीं मंजिल पर रहने वाले अरुण कुमार ने बताया कि वह अपने बालकनी में सोशल मीडिया के लिए वीडियो बना रहे थे तभी उन्होंने सामने वाले फ्लैट में असामान्य हलचल देखी। कुछ ही पलों बाद तीनों बहनें नीचे गिर गईं। इस घटना से भी पूरे इलाके में सदमे की लहर है।

समाज की भूमिका

ऐसी घटनाओं को रोकने में समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों को एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आना चाहिए। अगर किसी परिवार में कोई परेशानी दिखाई दे तो उससे बात करनी चाहिए। कई बार लोग अपनी समस्याओं को छुपाते हैं लेकिन संवेदनशील व्यवहार से उन्हें खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

स्कूलों और कॉलेजों में भी मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। बच्चों और युवाओं को तनाव से निपटने के तरीके सिखाए जाने चाहिए। परिवारों को भी अपने बच्चों के साथ खुली बातचीत बनाए रखनी चाहिए ताकि वे अपनी समस्याएं साझा कर सकें।

सरकारी पहल की जरूरत

Mathura farmer family suicide: राज्य सरकार को ऐसी घटनाओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है। प्रत्येक जिले में हेल्पलाइन सेवाएं होनी चाहिए जहां लोग बिना किसी संकोच के अपनी समस्याओं के बारे में बात कर सकें। प्रशिक्षित परामर्शदाता गांवों में जाकर लोगों से मिलें और उन्हें मदद प्रदान करें।

किसानों के लिए विशेष योजनाएं बनाई जानी चाहिए जो उनकी आर्थिक समस्याओं को कम कर सकें। फसल बीमा, आसान कर्ज और बाजार तक आसान पहुंच से किसानों का तनाव कम हो सकता है। साथ ही सामुदायिक स्तर पर सहायता समूह बनाए जाने चाहिए जहां लोग अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और एक-दूसरे की मदद कर सकें।

मथुरा की यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सहयोग की कितनी जरूरत है। सरकार, समाज और परिवार सभी को मिलकर काम करना होगा ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके और हर व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों से लड़ने में मदद मिल सके।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।