Yuvraj Mehta: नोएडा की एक सामान्य-सी सुबह अचानक एक परिवार के लिए हमेशा के लिए अंधेरी हो गई। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने सिर्फ एक घर नहीं उजाड़ा, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जिम्मेदारी और सिस्टम की संवेदनशीलता पर भी कई सवाल खड़े कर दिए। शुरुआत में यह मामला एक हादसे की तरह सामने आया, लेकिन जैसे-जैसे परतें खुलीं, लापरवाही और जवाबदेही की तस्वीर और गहरी होती चली गई।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे भारी आवाज उस पिता की है, जिसने अपना बेटा खोया है, लेकिन फिर भी न्याय की उम्मीद छोड़ी नहीं है। युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता ने योगी सरकार द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई पर संतोष जताया है। उनका कहना है कि सरकार के कदमों से उन्हें यह भरोसा मिला है कि उनके बेटे की मौत यूं ही फाइलों में दबी नहीं रहेगी।
SIT के गठन से जगी न्याय की उम्मीद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए बिना समय गंवाए जांच के आदेश दिए। उनके निर्देश पर ADG जोन मेरठ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया गया। यह टीम पूरे मामले की तह तक जाकर जांच करेगी और पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
राजकुमार मेहता का कहना है कि SIT का गठन उनके लिए सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि न्याय की पहली सीढ़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।
पिता की मुख्यमंत्री से मिलने की इच्छा
अपने बेटे को खोने के बाद राजकुमार मेहता का दर्द शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक बार मुलाकात कर पाने से उन्हें मानसिक शांति मिलेगी। उनका मानना है कि जब सरकार खुद पीड़ित परिवार की बात सुनती है, तो न्याय का भरोसा और मजबूत होता है।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन की ओर से उन्हें सहयोग का आश्वासन दिया गया है और घटनास्थल पर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए जरूरी सुरक्षा उपाय भी किए जा रहे हैं।
बिल्डर की गिरफ्तारी से बदला माहौल
मंगलवार को इस मामले में एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली, जब पुलिस ने नामजद आरोपी बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। अभय कुमार रियल एस्टेट कंपनी एमजेड विजटाउन प्लानर्स लिमिटेड के सीईओ हैं। उनकी गिरफ्तारी लापरवाही, गैर इरादतन हत्या और जान जोखिम में डालने जैसी गंभीर धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है।
इस गिरफ्तारी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। यह साफ संकेत है कि जांच सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर भी कड़ा संदेश
योगी सरकार ने इस मामले में सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पद से हटा दिया गया। इसके साथ ही ट्रैफिक सेल के अवर अभियंता नवीन कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया।
युवराज मेहता की मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर किया है कि विकास और निर्माण की रफ्तार के बीच सुरक्षा मानकों को कितना गंभीरता से लिया जा रहा है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की मौत का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है, जहां छोटी सी चूक भी किसी की जिंदगी छीन सकती है।
राजकुमार मेहता का कहना है कि वह किसी से बदला नहीं चाहते, बस यह चाहते हैं कि भविष्य में कोई और पिता इस दर्द से न गुजरे। अब सबकी निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि इस मामले में आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाएगी।