पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग में जो घटना सामने आई है, वह न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि यह हमारे समाज में शिक्षकों के प्रति विश्वास की उस पवित्रता को भी कलंकित करती है जो सदियों से चली आ रही है। एक ट्यूशन टीचर, जिस पर माता-पिता अपनी बेटी की शिक्षा की जिम्मेदारी सौंपते हैं, वही जब दरिंदगी पर उतर आए, तो यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरी सामाजिक व्यवस्था पर सवाल है। आठवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा के साथ पांच महीने में कई बार बलात्कार करने का आरोप लगा है पड़ोसी ट्यूशन टीचर तरुण मंडल पर। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी किसी की नजर बचाकर फरार हो गया।
विश्वास का घिनौना दुरुपयोग
कैनिंग के एक हाई स्कूल में पढ़ने वाली यह नाबालिग छात्रा अपने घर के पास ही तरुण मंडल के यहां ट्यूशन पढ़ने जाती थी। माता-पिता ने पड़ोसी होने और शिक्षक होने के नाते उस पर भरोसा किया था। लेकिन इस विश्वास का तरुण मंडल ने क्या भयानक दुरुपयोग किया, यह सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
आरोप है कि करीब पांच महीने पहले जब नाबालिग शाम को ट्यूशन पढ़ने गई थी, तब तरुण मंडल ने उसे बहला-फुसलाकर पास के एक मैदान में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद एक बार फिर रात के अंधेरे में उसे मैदान में ले जाकर बलात्कार किया।
डर और धमकी का साया
सबसे दुखद बात यह है कि इस घिनौने कृत्य के बारे में किसी को पता न चले, इसके लिए तरुण मंडल ने नाबालिग को धमकी भी दी। एक मासूम बच्ची, जो पढ़ने के लिए शिक्षक के पास जाती थी, वही शिक्षक उसका शोषण करे और फिर चुप रहने के लिए धमकी दे – यह कितना भयावह है।
इस डर और धमकी के कारण नाबालिग ने ट्यूशन जाना लगभग बंद कर दिया था। लेकिन शनिवार शाम जब वह फिर पढ़ने गई, तो उस दरिंदे ने एक बार फिर रात के अंधेरे में उसे सुनसान मैदान में ले जाकर बलात्कार किया।
इलाके के लोगों ने पकड़ा, लेकिन फरार कैसे हुआ?
घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इलाके के लोगों ने नाबालिग और तरुण मंडल को असंगत स्थिति में पकड़ लिया था। उन्होंने परिवार के सदस्यों को खबर की। परिवार वालों ने नाबालिग को बचाया और शनिवार रात ही कैनिंग थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने नाबालिग को शारीरिक जांच के लिए कैनिंग उपमंडल अस्पताल भेजा और जांच शुरू की। लेकिन सवाल यह है कि जब इलाके के लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया था, तो वह सबकी नजर बचाकर फरार कैसे हो गया?
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल
क्या स्थानीय लोगों ने पुलिस को तुरंत सूचित नहीं किया? अगर किया, तो पुलिस ने आरोपी को तुरंत गिरफ्तार क्यों नहीं किया? और अगर नहीं किया, तो इस तरह के गंभीर मामले में देरी क्यों?
ये सवाल बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि बलात्कार जैसे संगीन अपराध में आरोपी का फरार हो जाना न केवल न्याय प्रक्रिया को कमजोर करता है, बल्कि पीड़िता और उसके परिवार के लिए अतिरिक्त मानसिक पीड़ा भी बनता है।
परिवार की मांग: फांसी की सजा
पीड़ित नाबालिग और उसके चाचा ने मांग की है कि एक ट्यूशन टीचर होकर जिस तरह से तरुण मंडल ने अमानवीय अत्याचार किया है, उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए। यह मांग परिवार की पीड़ा और आक्रोश को दर्शाती है।
एक परिवार जो अपनी बेटी की बेहतर शिक्षा के लिए उसे ट्यूशन भेजता था, आज उसी निर्णय के कारण इतनी बड़ी त्रासदी झेल रहा है। विश्वास टूटा है, बेटी का बचपन छीन लिया गया है, और मानसिक आघात जिंदगी भर के लिए है।
कानूनी प्रावधान
भारतीय दंड संहिता और POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम के तहत नाबालिग से बलात्कार के मामले में कड़ी सजा का प्रावधान है। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो तरुण मंडल को आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है।
लेकिन न्याय तभी मिल सकता है जब आरोपी को पकड़ा जाए, मुकदमा चले, और अदालत निर्णय दे। फिलहाल आरोपी फरार है, जो न्याय प्रक्रिया में बाधा है।
ट्यूशन टीचरों की जांच-पड़ताल की जरूरत
यह घटना एक बड़े सवाल की ओर इशारा करती है – ट्यूशन टीचरों की पृष्ठभूमि की जांच-पड़ताल कितनी जरूरी है। आजकल लगभग हर घर में बच्चे ट्यूशन पढ़ने जाते हैं। माता-पिता अक्सर पड़ोसी या जान-पहचान के आधार पर ट्यूशन टीचर चुनते हैं, लेकिन क्या यह पर्याप्त है?
क्या ट्यूशन टीचरों के लिए कोई पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए? क्या उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच होनी चाहिए? खासकर जब वे छोटी उम्र के बच्चों, विशेष रूप से लड़कियों को पढ़ाते हैं।
माता-पिता की सतर्कता
माता-पिता को भी अत्यंत सतर्क रहना चाहिए। बच्चों को ट्यूशन भेजते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- ट्यूशन टीचर की पृष्ठभूमि की जानकारी लें
- अगर संभव हो तो समूह में ट्यूशन भेजें, न कि अकेले
- बच्चों के साथ खुला संवाद रखें ताकि वे किसी भी अजीब व्यवहार के बारे में बता सकें
- समय-समय पर ट्यूशन की जगह पर जाएं
- बच्चों को अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श के बारे में शिक्षित करें
बच्चों को आवाज उठाने का साहस देना
इस मामले में नाबालिग ने शुरुआत में घटना के बारे में किसी को नहीं बताया। डर और धमकी के कारण वह चुप रही। यह एक बड़ी समस्या है। बच्चे अक्सर ऐसे मामलों में चुप रह जाते हैं क्योंकि उन्हें डर लगता है, शर्म आती है, या उन्हें लगता है कि कोई विश्वास नहीं करेगा।
माता-पिता और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को यह विश्वास दिलाएं कि वे किसी भी अनुचित व्यवहार के बारे में बिना किसी डर के बता सकते हैं। बच्चों को यह सिखाना चाहिए कि कोई भी उनके साथ गलत व्यवहार नहीं कर सकता, चाहे वह कितना भी करीबी या विश्वसनीय क्यों न हो।
स्कूलों में यौन शिक्षा
स्कूलों में उम्र के अनुसार यौन शिक्षा देना भी जरूरी है। बच्चों को अपने शरीर के बारे में, सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बारे में, और अगर कोई गलत व्यवहार करे तो क्या करना चाहिए – इन सब के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए।
लेकिन दुर्भाग्य से भारत में अभी भी यौन शिक्षा को लेकर संकोच है। इसे वर्जित विषय माना जाता है, जबकि यह बच्चों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
समाज की भूमिका
इस मामले में इलाके के लोगों ने आरोपी को पकड़ा, यह सराहनीय है। समाज की यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसे अपराधों के खिलाफ आवाज उठाए और पीड़ित का साथ दे।
लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भीड़ न्याय (Mob Justice) से बचा जाए। आरोपी को पकड़ने के बाद तुरंत पुलिस को सौंप देना चाहिए, न कि उसके साथ मारपीट करना चाहिए। कानून को अपना काम करने देना चाहिए।
पीड़ित के प्रति संवेदनशीलता
समाज को पीड़ित के प्रति भी संवेदनशील रहना चाहिए। अक्सर बलात्कार की पीड़िताओं को समाज में कलंक का सामना करना पड़ता है। लोग उन्हें अलग नजर से देखते हैं, फुसफुसाते हैं।
यह बेहद गलत है। पीड़ित के साथ कोई अपराध नहीं हुआ है, अपराध तो अपराधी ने किया है। समाज को पीड़ित का साथ देना चाहिए, न कि उसे और आहत करना चाहिए।
पुलिस जांच और न्याय की उम्मीद
पुलिस ने मामला दर्ज किया है और जांच शुरू की है। नाबालिग की चिकित्सकीय जांच भी की गई है। अब जरूरत है कि जल्द से जल्द आरोपी तरुण मंडल को गिरफ्तार किया जाए।
फरार अपराधी को पकड़ना पुलिस की प्राथमिकता होनी चाहिए। उसे पकड़ने के लिए सभी संभव प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही मुकदमे को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाना चाहिए ताकि जल्द न्याय मिल सके।
POCSO अदालतों की भूमिका
POCSO अधिनियम के तहत विशेष अदालतें बनाई गई हैं जो बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों की सुनवाई करती हैं। इन अदालतों में बच्चों के अनुकूल प्रक्रिया अपनाई जाती है ताकि पीड़ित बच्चे को अतिरिक्त मानसिक आघात न पहुंचे।
इस मामले को भी POCSO अदालत में जल्द सुनवाई के लिए भेजा जाना चाहिए और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कैनिंग में हुई यह घटना केवल एक अलग-थलग घटना नहीं है। यह उस व्यापक समस्या की ओर इशारा करती है जहां विश्वास के पदों पर बैठे लोग उस विश्वास का दुरुपयोग करते हैं। शिक्षक, जिसे समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, जब वही दरिंदगी पर उतर आए, तो यह पूरी सामाजिक व्यवस्था पर सवाल है।
माता-पिता को अत्यधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों को खुला वातावरण देना जरूरी है ताकि वे किसी भी गलत बात के बारे में निसंकोच बता सकें। स्कूलों में यौन शिक्षा को शामिल किया जाना चाहिए।
पुलिस और न्याय व्यवस्था को ऐसे मामलों में त्वरित और संवेदनशील होना चाहिए। आरोपी को जल्द पकड़ा जाना चाहिए और कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए ताकि दूसरों के लिए यह सबक बने।
पीड़ित नाबालिग और उसके परिवार के साथ हमारी सहानुभूति है। उम्मीद करते हैं कि उन्हें जल्द न्याय मिलेगा और वे इस त्रासदी से उबर पाएंगे। साथ ही यह भी उम्मीद है कि समाज ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएगा और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।