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केंद्रीय श्रम कानून के खिलाफ सीटू की हड़ताल में आसनसोल में पुलिस और कार्यकर्ताओं में झड़प

CITU Protest Asansol: केंद्रीय श्रम कानून के खिलाफ हड़ताल में पुलिस से झड़प
CITU Protest Asansol: केंद्रीय श्रम कानून के खिलाफ हड़ताल में पुलिस से झड़प (FB Photo)

CITU Protest Asansol: पश्चिम बंगाल के आसनसोल में केंद्रीय श्रम कानून को वापस लेने की मांग पर सीटू की हड़ताल के दौरान बीएनआर मोड़ स्थित एसबीआई बैंक के सामने पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। बैंक खुलने के समय नारेबाजी से तनाव बढ़ा। पुलिस ने गेट खोला लेकिन प्रदर्शन जारी रहा। सीटू ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

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आसनसोल के बीएनआर मोड़ इलाके में स्थित एसबीआई बैंक के सामने बुधवार को असामान्य दृश्य देखने को मिले। केंद्रीय श्रम कानून को वापस लेने की मांग को लेकर सीटू द्वारा बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। बैंक खुलने के समय जब कर्मचारी और ग्राहक बैंक में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, तभी सीटू कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इस घटना को लेकर पुलिस और सीटू समर्थकों के बीच बहस हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालांकि पुलिस ने बैंक का मुख्य गेट खोल दिया, लेकिन सीटू कार्यकर्ता गेट के सामने खड़े होकर लगातार नारे लगाते रहे।

केंद्रीय श्रम कानून और विवाद

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम कानून को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। मजदूर संगठनों का कहना है कि यह कानून श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करता है और उन्हें असुरक्षित बनाता है। सीटू समेत कई ट्रेड यूनियनें इस कानून का विरोध कर रही हैं और इसे वापस लेने की मांग कर रही हैं। इसी मांग को लेकर बुधवार को पूरे देश में हड़ताल का आह्वान किया गया था। पश्चिम बंगाल में भी इस हड़ताल का व्यापक असर देखा गया, खासकर औद्योगिक शहरों में।

आसनसोल में हड़ताल का असर

आसनसोल पश्चिम बंगाल का एक प्रमुख औद्योगिक शहर है जहां बड़ी संख्या में मजदूर और कामगार रहते हैं। बुधवार को हड़ताल के दौरान शहर के कई इलाकों में सीटू कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। बीएनआर मोड़ क्षेत्र में स्थित एसबीआई बैंक के सामने सुबह से ही कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी। जैसे ही बैंक खुलने का समय हुआ, कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी तेज कर दी। उनका कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं और केंद्र सरकार को मजदूरों की आवाज सुननी चाहिए।

पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तनाव

बैंक के सामने नारेबाजी को लेकर मौके पर तैनात पुलिस और सीटू कार्यकर्ताओं के बीच बहस शुरू हो गई। पुलिस का कहना था कि बैंक के गेट को रोकना कानून का उल्लंघन है और इससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। वहीं कार्यकर्ताओं का तर्क था कि वे किसी को जबरन रोक नहीं रहे, बल्कि केवल अपनी मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच गर्मागर्म बहस होने लगी और कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण स्थिति को नियंत्रित रखा गया।

बैंक संचालन में व्यवधान

हालांकि पुलिस ने बैंक का मुख्य गेट खोल दिया, लेकिन गेट के सामने लगातार नारेबाजी होने से बैंक का काम प्रभावित हुआ। कई ग्राहक बैंक में प्रवेश करने से हिचकिचाए, जबकि कुछ कर्मचारियों को बैंक तक पहुंचने में दिक्कत हुई। सीटू कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है, बल्कि अपनी आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय श्रम कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

सीटू की मांगें और रणनीति

सीटू ने केंद्रीय श्रम कानून को मजदूर विरोधी बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि नए कानून में काम के घंटे बढ़ाने, ठेका प्रथा को बढ़ावा देने और श्रमिकों की सुरक्षा को कमजोर करने के प्रावधान हैं। सीटू नेताओं ने कहा कि वे संसदीय और गैर-संसदीय दोनों तरीकों से इस कानून का विरोध करेंगे। आसनसोल में हुए प्रदर्शन को इसी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। संगठन ने आने वाले दिनों में और भी बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

घटना को लेकर स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया रही। कुछ लोगों ने कहा कि मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का पूरा हक है, लेकिन इसके लिए आम लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने सीटू के आंदोलन को सही ठहराया और कहा कि केंद्र सरकार को मजदूरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। बैंक में आए कुछ ग्राहकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें अपने जरूरी काम के लिए परेशानी हुई।

पुलिस प्रशासन की तैयारी

हड़ताल की पूर्व सूचना को देखते हुए आसनसोल पुलिस ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। शहर के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बीएनआर मोड़ क्षेत्र में भी पर्याप्त पुलिस बल मौजूद था, जिसके कारण स्थिति को नियंत्रित रखा जा सका। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस घटना पर राजनीतिक दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। स्थानीय वामपंथी नेताओं ने सीटू के आंदोलन को जायज बताया और केंद्र सरकार से श्रम कानून वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह कानून मजदूरों के हितों के खिलाफ है और इसे लागू नहीं होने देंगे। वहीं सत्ताधारी दल के नेताओं ने कहा कि प्रदर्शन करना सबका अधिकार है, लेकिन इसके लिए आम जनता को परेशान करना उचित नहीं है।

आगे की संभावनाएं

सीटू ने साफ कर दिया है कि केंद्रीय श्रम कानून के खिलाफ उनका आंदोलन लंबा चलने वाला है। संगठन के नेताओं ने कहा कि वे देशभर में मजदूरों को संगठित करेंगे और सरकार पर दबाव बनाएंगे। आसनसोल जैसे औद्योगिक शहरों में आने वाले दिनों में और भी विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। पुलिस प्रशासन भी इसे देखते हुए सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि विवाद जल्द सुलझ जाए और सामान्य जीवन पटरी पर आ जाए।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।