जरूर पढ़ें

पश्चिम बंगाल में दलित और आदिवासी समुदायों के लिए शिक्षा और रोजगार में संकट: राजेंद्रपाल गौतम ने उठाई चिंता

SC Names Removed from West Bengal Voter List Allegation: दलित आदिवासी शिक्षा और रोजगार संकट पर राजेंद्रपाल गौतम का बयान
SC Names Removed from West Bengal Voter List Allegation: दलित आदिवासी शिक्षा और रोजगार संकट पर राजेंद्रपाल गौतम का बयान (File Photo)

SC Names Removed from West Bengal Voter List Allegation: कांग्रेस नेता राजेंद्रपाल गौतम ने दलित आदिवासी समुदायों की शिक्षा और रोजगार संकट पर चिंता जताई। सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं और निजी स्कूलों की फीस 4000 रुपये महीना है जबकि SC ST परिवारों की आय 5000-10000 रुपये है। छात्रवृत्ति मिलने में देरी और आरक्षण की कमी से युवा पिछड़ रहे हैं। पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से SC नाम हटाने का आरोप।

Updated:

SC Names Removed from West Bengal Voter List Allegation: पश्चिम बंगाल में दलित और आदिवासी समुदायों की शिक्षा और रोजगार को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। कांग्रेस नेता राजेंद्रपाल गौतम ने एक रैली में इन समुदायों की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों के बंद होने और निजी स्कूलों की बढ़ती फीस से गरीब परिवारों के बच्चों का भविष्य खतरे में है। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार दलित समुदाय की आबादी 23 प्रतिशत थी और अब यह बढ़कर लगभग 28 प्रतिशत हो सकती है।

राजेंद्रपाल गौतम ने अपने भाषण की शुरुआत पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए की। इसके बाद उन्होंने दलित और आदिवासी समुदायों की समस्याओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि अगर SC और ST को मिलाकर देखा जाए तो यह आबादी देश की कुल आबादी का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा है। लेकिन इस बड़ी आबादी के लिए शिक्षा की व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है।

सरकारी स्कूलों का बंद होना बड़ा संकट

राजेंद्रपाल गौतम ने कहा कि हर दिन देश में सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं और उनकी जगह निजी स्कूल खुल रहे हैं। निजी स्कूलों में एक बच्चे की पढ़ाई का खर्च कम से कम 4000 रुपये महीना है। जबकि SC और ST परिवारों की मासिक आय केवल 5000 से 10000 रुपये के बीच होती है। ऐसे में इन परिवारों के लिए अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना लगभग असंभव हो जाता है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के दौरान एक लाख से अधिक सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल में भी हजारों सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं। यह स्थिति दलित और आदिवासी बच्चों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद कर रही है। सरकारी कॉलेजों और मेडिकल कॉलेजों में भी यही स्थिति है। इससे इन समुदायों के युवाओं के आगे बढ़ने के रास्ते बंद हो रहे हैं।

छात्रवृत्ति की समस्या

राजेंद्रपाल गौतम ने छात्रवृत्ति की समस्या पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की छात्रवृत्ति योजनाएं या तो बंद हो गई हैं या फिर उन्हें पाना बहुत मुश्किल है। जो छात्रवृत्ति मिलती भी है, उसके लिए महीनों और सालों तक इंतजार करना पड़ता है। इससे गरीब परिवारों के छात्रों को बहुत परेशानी होती है और कई बार वे पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय में छात्रवृत्ति की अच्छी व्यवस्था थी। बजट में इसके लिए पर्याप्त पैसा होता था। राजीव गांधी के समय में सरकारी नौकरियों में भी इन समुदायों को अच्छे मौके मिले थे। लेकिन अब यह सब खत्म होता जा रहा है।

कांग्रेस की भूमिका

राजेंद्रपाल गौतम ने कहा कि कांग्रेस एकमात्र ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो सबको साथ लेकर चलने में विश्वास करती है। कांग्रेस के समय में स्कॉलरशिप की व्यवस्था हुई, बजट में पैसा आया, पक्के मकान बने और सरकारी नौकरियों के मौके मिले। लेकिन अब सब कुछ छीना जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार का रवैया दलित और आदिवासियों के प्रति संवेदनशील नहीं है।

उन्होंने बंगाल के हर हिस्से में जाकर संगठन बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि दलित और आदिवासी समुदायों को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी।

बेकारी और आरक्षण का सवाल

शुभंकर सरकार ने भी रैली में कहा कि बंगाल की धरती रवींद्रनाथ टैगोर और काजी नजरूल इस्लाम की धरती है जहां भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बंगाल में 68 SC सीटें हैं और यह 38 प्रतिशत वोट का हिस्सा है। उन्होंने नई जनगणना की मांग की।

शुभंकर सरकार ने कहा कि बेकारी हर जगह है। दलित और आदिवासी युवाओं में भी बेरोजगारी बहुत है। लेकिन उनके आगे बढ़ने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। आरक्षण की व्यवस्था भी सही तरीके से लागू नहीं हो रही है।

उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार में बंगाल पिछड़ गया है। उन्होंने तृणमूल को हटाने और बीजेपी को रोकने की बात कही। उन्होंने बताया कि विशेष सर्वेक्षण में सबसे ज्यादा SC समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

चुनावी राजनीति पर सवाल

SC Names Removed from West Bengal Voter List Allegation: राजेंद्रपाल गौतम ने चुनावी राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं वैसे-वैसे राजनीतिक नाटक बढ़ते जाते हैं। उन्होंने कहा कि यहां कभी भी निष्पक्ष चुनाव नहीं होते। पहले चुनाव आयोग निष्पक्ष था लेकिन अब वह भी बीजेपी के पक्ष में काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की समस्या पर कोई बड़ी मुहिम या जुलूस नहीं निकलते। लेकिन मंदिर-मस्जिद, कुरान और गीता पाठ जैसे मुद्दों पर लगातार रैलियां और मीटिंग होती रहती हैं। यह दिखाता है कि असली मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाया जा रहा है।

दलित और आदिवासी समुदायों की स्थिति पर यह बहस बहुत जरूरी है। शिक्षा और रोजगार के बिना कोई भी समुदाय आगे नहीं बढ़ सकता। सरकार को इन समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और ठोस कदम उठाने चाहिए। सरकारी स्कूलों को बंद करने की जगह उन्हें मजबूत बनाना चाहिए। छात्रवृत्ति की व्यवस्था सुधारनी चाहिए और रोजगार के नए अवसर पैदा करने चाहिए।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।