परीक्षा हॉल में छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ी
Higher secondary student falls ill during exam: बांकुड़ा में उच्च माध्यमिक की परीक्षा के दौरान एक अप्रत्याशित घटना सामने आई है। आज जब पहली भाषा की परीक्षा चल रही थी, तब परीक्षा हॉल में एक छात्रा की तबीयत अचानक खराब हो गई। बांकुड़ा हिंदू हाई स्कूल की विज्ञान विभाग की छात्रा रिम्पा नंदी अपने निर्धारित परीक्षा केंद्र टाउन गर्ल्स स्कूल में परीक्षा देने पहुंची थी। परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद ही उसकी हालत बिगड़ने लगी। परीक्षा हॉल में बैठी रिम्पा को अचानक तेज कंपकंपी होने लगी। यह देखकर परीक्षा कक्ष में मौजूद निरीक्षक और शिक्षक चौकन्ने हो गए। तुरंत छात्रा को प्राथमिक उपचार दिया गया और शिक्षा विभाग को इस घटना की जानकारी दी गई।
शिक्षा विभाग ने दिखाई तत्परता
जैसे ही शिक्षा विभाग को इस घटना की जानकारी मिली, विभाग के अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। छात्रा की स्थिति को देखते हुए उसे बांकुड़ा सम्मिलनी मेडिकल कॉलेज ले जाने का निर्णय लिया गया। शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित किया कि छात्रा का इलाज भी हो और उसकी परीक्षा भी न छूटे। विभाग के अधिकारियों ने अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया और परीक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करने का निर्देश दिया। यह पूरी प्रक्रिया बेहद तेजी से पूरी की गई ताकि परीक्षार्थी को किसी तरह की परेशानी न हो।
अस्पताल में की गई विशेष व्यवस्था
बांकुड़ा सम्मिलनी मेडिकल कॉलेज में छात्रा रिम्पा नंदी के लिए विशेष व्यवस्था की गई। अस्पताल के एक अलग कमरे में परीक्षा की पूरी व्यवस्था की गई। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि परीक्षा के सभी नियमों का पालन हो। परीक्षा निरीक्षक और आवश्यक स्टाफ को अस्पताल भेजा गया। छात्रा को चिकित्सकीय देखभाल के साथ-साथ परीक्षा देने का पूरा मौका दिया गया। डॉक्टरों ने छात्रा की जांच की और उसे स्थिर करने के लिए आवश्यक दवाइयां दीं। जैसे ही उसकी स्थिति थोड़ी बेहतर हुई, उसे परीक्षा पूरी करने की अनुमति दी गई।
परीक्षा व्यवस्था में मानवीयता का उदाहरण
यह घटना शिक्षा व्यवस्था में मानवीयता और संवेदनशीलता का एक अच्छा उदाहरण है। शिक्षा विभाग ने यह साबित किया कि नियमों के साथ-साथ छात्रों की भलाई भी उतनी ही जरूरी है। परीक्षा के दौरान किसी भी छात्र के साथ ऐसी स्थिति आ सकती है। ऐसे में प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता बहुत मायने रखती है। बांकुड़ा के शिक्षा अधिकारियों ने इस मामले में जो तेजी दिखाई, वह सराहनीय है। उन्होंने न सिर्फ छात्रा के स्वास्थ्य का ध्यान रखा बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि उसकी पढ़ाई पर कोई असर न पड़े।
छात्रों के स्वास्थ्य की चिंता जरूरी
इस घटना से यह भी पता चलता है कि परीक्षा के समय छात्रों पर कितना मानसिक और शारीरिक दबाव होता है। उच्च माध्यमिक जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में छात्रों पर दबाव काफी बढ़ जाता है। कई बार यह दबाव उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। माता-पिता और शिक्षकों को चाहिए कि वे परीक्षा के समय छात्रों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। उन्हें पौष्टिक भोजन दें और पर्याप्त नींद लेने के लिए प्रोत्साहित करें। साथ ही छात्रों को भी चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें।
परीक्षा केंद्रों पर चिकित्सा सुविधा की जरूरत
इस घटना के बाद यह सवाल भी उठता है कि क्या सभी परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। बड़ी परीक्षाओं के दौरान हर केंद्र पर एक चिकित्सक और बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं होनी चाहिए। आपातकालीन स्थिति में तुरंत एंबुलेंस की व्यवस्था होनी चाहिए। परीक्षा केंद्र के स्टाफ को प्राथमिक उपचार की जानकारी होनी चाहिए। ऐसी व्यवस्थाओं से किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकती है। शिक्षा विभागों को इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए।
अन्य राज्यों के लिए मिसाल
बांकुड़ा में शिक्षा विभाग द्वारा की गई यह व्यवस्था अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल है। देश के कई हिस्सों में परीक्षा के दौरान छात्रों की समस्याओं को लेकर लापरवाही देखी जाती है। कई बार छात्रों को छोटी-छोटी बातों के लिए परेशान होना पड़ता है। ऐसे में पश्चिम बंगाल के शिक्षा विभाग ने जो संवेदनशीलता दिखाई है, वह अनुकरणीय है। अन्य राज्यों को भी इस तरह की व्यवस्थाएं बनानी चाहिए। परीक्षा में बैठे हर छात्र का अधिकार है कि उसे उचित माहौल और सुविधाएं मिलें।
माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका
Higher secondary student falls ill during exam: इस पूरे प्रकरण में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्हें चाहिए कि परीक्षा के समय छात्रों पर अनावश्यक दबाव न डालें। कई बार माता-पिता की अपेक्षाएं छात्रों पर भारी पड़ जाती हैं। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। शिक्षकों को भी छात्रों को परीक्षा के लिए सकारात्मक तरीके से तैयार करना चाहिए। उन्हें डराने की बजाय प्रोत्साहित करना चाहिए। परीक्षा सिर्फ जीवन का एक हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं, यह समझाना जरूरी है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
यह घटना शिक्षा व्यवस्था में कुछ सुधारों की जरूरत को भी रेखांकित करती है। परीक्षा प्रणाली को इतना लचीला बनाया जाना चाहिए कि आपातकालीन स्थितियों में छात्रों को राहत मिल सके। किसी भी छात्र के साथ कभी भी कोई अप्रत्याशित घटना हो सकती है। ऐसे में तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है। शिक्षा विभागों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
छात्रा की हालत अब स्थिर
घटना के बाद छात्रा रिम्पा नंदी की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल में चल रहे इलाज से उसकी सेहत में सुधार हो रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी लगातार उसकी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। छात्रा के परिवार ने शिक्षा विभाग और अस्पताल प्रशासन की तत्परता की सराहना की है। उन्होंने कहा कि सही समय पर की गई कार्रवाई से उनकी बेटी की परीक्षा बच गई। यह पूरी घटना यह दिखाती है कि संवेदनशील प्रशासन किस तरह से छात्रों के हित में काम कर सकता है।