पश्चिम बंगाल के आसनसोल जिले के जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार की शाम एक बार फिर दर्दनाक हादसा हुआ। एक कारखाने के डम्पर ने मोटरबाइक सवार मजदूर को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। गुस्साए ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने कारखाने में घुसकर बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की।
यह घटना शुक्रवार शाम को आसनसोल के जामुड़िया इलाके के राजाराम डांगा मोड़ पर हुई। मृतक की पहचान 47 वर्षीय पार्थसारथी चटर्जी के रूप में हुई है। पार्थसारथी सार्थकपुर गांव के रहने वाले थे और जामुड़िया के सुपर स्मेल्टर नाम के एक कारखाने में काम करते थे।
हादसा कैसे हुआ
घटना के चश्मदीदों का कहना है कि शुक्रवार शाम को पार्थसारथी अपने काम से छुट्टी लेकर मोटरबाइक पर घर की तरफ जा रहे थे। तभी अचानक एक डम्पर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पार्थसारथी बाइक से गिर गए और डम्पर का पहिया सीधे उनके सिर के ऊपर से निकल गया। इस भीषण हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डम्पर की रफ्तार काफी तेज थी और ड्राइवर ने लापरवाही से गाड़ी चलाई। हादसे के बाद डम्पर चालक भागने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया।
इलाके में फैला तनाव
जैसे ही इस दुखद घटना की खबर आसपास के गांवों में फैली, सैकड़ों लोग घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों का आरोप था कि कारखाने का डम्पर ही इस हादसे के लिए जिम्मेदार है। लोगों का कहना था कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कारखाने के वाहनों की वजह से कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन कारखाना प्रबंधन कोई सुधार नहीं करता।
ग्रामीणों का गुस्सा
इस आरोप को लेकर उत्तेजित भीड़ ने कारखाने के अंदर घुसकर बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ शुरू कर दी। कारखाने की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। लोगों ने कारखाने के गेट, दफ्तर और अन्य सामान को तोड़ दिया। स्थानीय लोगों ने कहा कि जब तक कारखाना प्रबंधन सही मुआवजा नहीं देता और सुरक्षा के पक्के इंतजाम नहीं करता, तब तक वे शांत नहीं होंगे।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही जामुड़िया थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को काबू में करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ काफी उग्र थी। पुलिस ने मृतक के शव को अपने कब्जे में ले लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हालांकि, इलाके में अब भी तनाव का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय निवासियों ने मृतक के शव को घटनास्थल पर रखकर विरोध प्रदर्शन जारी रखा। उनकी मांग है कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और कारखाने के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा का सवाल
यह घटना एक बार फिर जामुड़िया औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। इस इलाके में कई कारखाने हैं और भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। लेकिन सड़कों की हालत खस्ता है और यातायात नियंत्रण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कारखानों के भारी वाहनों ने कई बार हादसे किए हैं। लेकिन प्रशासन और कारखाना मालिकों की ओर से कोई गंभीर कदम नहीं उठाए गए। न तो सड़कों की मरम्मत की गई और न ही वाहनों की गति पर नियंत्रण लगाया गया।
मजदूरों की असुरक्षा
इस घटना ने यह भी साबित किया कि औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा भी खतरे में है। वे न केवल कारखाने के अंदर बल्कि बाहर भी असुरक्षित हैं। जब वे अपने घर जा रहे होते हैं या काम पर आ रहे होते हैं, तब भी उन्हें खतरा बना रहता है।
मृतक के परिवार की स्थिति
पार्थसारथी चटर्जी अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी और पार्थसारथी की कमाई पर ही पूरे परिवार का गुजारा चलता था। अब परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
परिवार के सदस्यों ने सरकार और कारखाना प्रबंधन से मदद की गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि मृतक के परिवार को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए और परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दी जाए।
आगे की राह
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि औद्योगिक क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए। सड़कों की मरम्मत की जाए और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।
साथ ही, कारखाना मालिकों को भी जिम्मेदार बनाने की जरूरत है। उन्हें अपने वाहनों की देखरेख और चालकों की ट्रेनिंग पर ध्यान देना चाहिए। तभी इस तरह के हादसों को रोका जा सकता है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी भी जरूरी है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसी दुखद घटनाएं होती रहेंगी।