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पश्चिम बंगाल में दिव्यांग भत्ता बढ़ाने की मांग को लेकर कोलकाता में विरोध प्रदर्शन

West Bengal Disability Pension Hike Demand: कोलकाता में दिव्यांग संगठन का विरोध प्रदर्शन, राज्य सरकार से मांग
West Bengal Disability Pension Hike Demand: कोलकाता में दिव्यांग संगठन का विरोध प्रदर्शन, राज्य सरकार से मांग (FB Photo)

West Bengal Disability Pension Hike Demand: पश्चिम बंगाल में दिव्यांग भत्ता 8 साल से 1000 रुपए पर अटका है। 17 फरवरी को कोलकाता के रवीन्द्र सदन में पश्चिम बंगाल राज्य दिव्यांग संगठन ने विरोध प्रदर्शन किया। महासचिव कांति गांगुली सहित नेताओं ने भत्ता बढ़ाने की मांग की।

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West Bengal Disability Pension Hike Demand: पश्चिम बंगाल में दिव्यांग लोगों को मिलने वाले मानवीय भत्ते में बढ़ोतरी की मांग को लेकर सोमवार को कोलकाता के रवीन्द्र सदन स्थित रानुछाया मंच पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। पश्चिम बंगाल राज्य दिव्यांग संगठन के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य भर से दिव्यांग लोग जुटे और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।

17 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे शुरू हुए इस विरोध सभा में संगठन के महासचिव कांति गांगुली, अध्यक्ष अनिर्बाण मुखर्जी और संयुक्त सचिव साम्य गांगुली सहित कई नेता मौजूद रहे।

8 साल से नहीं बढ़ा भत्ता

5 फरवरी 2026 को राज्य विधानसभा में 2026-27 के लिए अगले चार महीने का अंतरिम बजट पेश किया गया था। इस बजट से राज्य के दिव्यांग लोगों को बड़ी उम्मीदें थीं। उन्हें आशा थी कि 8 साल बाद उनके मानवीय भत्ते में बढ़ोतरी होगी। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी बजट ने उन्हें निराश किया।

2018 से यह भत्ता महज एक हजार रुपए ही बना हुआ है। इस बीच राज्य सरकार ने समाज के अन्य वर्गों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में कई बार राशि बढ़ाई है। पूजा समितियों को मिलने वाली राशि पिछले 8 साल में दस हजार से बढ़ाकर एक लाख दस हजार यानी दस गुना कर दी गई है। इस साल के अंतरिम बजट में लक्ष्मी भंडार की राशि 500 रुपए बढ़ाई गई। 21 से 41 साल के बेरोजगार युवाओं का भत्ता डेढ़ हजार रुपए कर दिया गया।

केवल दिव्यांग ही रह गए पीछे

लेकिन इन सब योजनाओं के बीच केवल दिव्यांग लोग ही उपेक्षित रह गए। दिव्यांग भत्ता देने के मामले में पश्चिम बंगाल का स्थान काफी पीछे है। तेलंगाना, केरल, हरियाणा, गोवा, मणिपुर, पुडुचेरी, दिल्ली, सिक्किम और अंडमान-निकोबार जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने दिव्यांग नागरिकों को कहीं ज्यादा भत्ता देते हैं।

इस मामले में आंध्र प्रदेश सबसे आगे है, जहां दिव्यांगों को हर महीने 6000 रुपए भत्ता दिया जाता है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में भी कमी

केवल मानवीय भत्ता ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाधा मुक्त वातावरण, रोजगार जैसे क्षेत्रों में भी दिव्यांग अधिकार कानून में बताए गए सुविधाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं दिया गया है। वित्त राज्य मंत्री के अंतरिम बजट भाषण में इसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के थोड़े बढ़े बजट में दिव्यांगों के हिस्से की राशि कितनी है, इसकी कोई साफ घोषणा नहीं है। हाल ही में पेश हुए केंद्रीय बजट में भी दिव्यांगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में कितना खर्च किया जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है।

केंद्रीय बजट में भी दिव्यांगों की पेंशन 2011 से ही अपरिवर्तित है। इंदिरा गांधी पेंशन योजना में केवल साढ़े तीन सौ रुपए दिए जाते हैं, वह भी केवल गंभीर दिव्यांगता वाले लोगों को।

महंगाई में एक हजार से कैसे चले घर

इस तरह राज्य और केंद्र दोनों सरकारें मिलकर राज्य के 70 लाख दिव्यांग लोगों और उनके परिवारों की उपेक्षा कर रही हैं। जब हर चीज की कीमत आसमान छू रही है, तब केवल एक हजार रुपए में एक दिव्यांग व्यक्ति कैसे अपना घर चला सकता है? यह सवाल संगठन ने समाज, राज्य और मुख्यधारा के लोगों के सामने रखा है।

रवीन्द्र सदन में हुआ विरोध प्रदर्शन

इसी मुद्दे को लेकर 17 फरवरी 2026 मंगलवार को रवीन्द्र सदन कोलकाता के रानुछाया मंच पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस सभा में संगठन के महासचिव कांति गांगुली, अध्यक्ष अनिर्बाण मुखर्जी और संयुक्त सचिव साम्य गांगुली के अलावा अन्य नेता भी मौजूद रहे।

West Bengal Disability Pension Hike Demand: इस विरोध प्रदर्शन में दिव्यांग समुदाय ने मांग की कि राज्य सरकार तुरंत मानवीय भत्ते में बढ़ोतरी करे। उन्होंने कहा कि अन्य योजनाओं में जिस तरह राशि बढ़ाई गई है, उसी तरह दिव्यांग भत्ते में भी वृद्धि होनी चाहिए।

संगठन ने यह भी मांग की कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार हो। उन्होंने कहा कि दिव्यांग अधिकार कानून में जो प्रावधान हैं, उन्हें ठीक से लागू किया जाए।

विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि सरकार को दिव्यांगों को भिखारी की नजर से नहीं देखना चाहिए। उन्हें भी सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। महंगाई के दौर में एक हजार रुपए से कोई अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर सकता।

संगठन ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह जल्द से जल्द इस मुद्दे पर ध्यान दे और दिव्यांग समुदाय की मांगों को पूरा करे। उन्होंने कहा कि अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।