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कोलकाता में I-PAC कार्यालय पर ED की छापेमारी, बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

कोलकाता में I-PAC कार्यालय पर ED की छापेमारी
कोलकाता में I-PAC कार्यालय पर ED की छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता में आइ-पेक कार्यालय और उसके प्रमुख के आवास पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई कोयला तस्करी से जुड़े पुराने मामले में की गई। इस कदम से पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चाओं और अटकलों का दौर तेज हो गया है।
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ED Raid I-PAC Office: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई के कारण चर्चा के केंद्र में आ गई है। गुरुवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित सेक्टर-5 में मौजूद राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के कार्यालय पर छापेमारी की। इसके साथ ही एजेंसी की टीम ने आइ-पेक के प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई दिल्ली में दर्ज एक पुराने कोयला तस्करी मामले से जुड़ी बताई जा रही है.

यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म हो रहा है और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस तथा विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। I-PAC जैसे संगठन पर कार्रवाई स्वाभाविक रूप से केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि सत्ता और रणनीति के समीकरणों को भी प्रभावित करती है।

ईडी की कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी दिल्ली में दर्ज कोयला तस्करी से जुड़े एक पुराने मामले की जांच के सिलसिले में की गई है। इसी मामले में वित्तीय लेन-देन और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। बताया गया है कि इस कार्रवाई के लिए दिल्ली से विशेष टीम को कोलकाता भेजा गया था, जो पूरे अभियान की निगरानी कर रही है।

हालांकि अभी तक ईडी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जांच एजेंसी की सक्रियता ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

आइ-पेक और बंगाल की राजनीति में उसकी भूमिका

आइ-पेक केवल एक कंसल्टेंसी फर्म नहीं मानी जाती, बल्कि बंगाल की राजनीति में इसे एक प्रभावशाली रणनीतिक इकाई के रूप में देखा जाता है। विधानसभा चुनावों के दौरान उम्मीदवारों के चयन, जमीनी फीडबैक और संगठनात्मक रणनीति में इसकी भूमिका को लेकर राजनीतिक हलकों में लंबे समय से चर्चा रही है।

आइ-पेक प्रमुख प्रतीक जैन को सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क में रहने वाला माना जाता है। नबन्ना में उनकी मौजूदगी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकातों की खबरें भी पहले सामने आती रही हैं।

टीएमसी की चुप्पी और सीपीएम की सक्रियता

इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, वाम दलों ने इसे गंभीर राजनीतिक घटनाक्रम बताते हुए तुरंत प्रतिक्रिया दी है। सीपीएम के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने गुरुवार दोपहर एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने की घोषणा की, जिसमें इस छापेमारी को लेकर सवाल उठाए जाने की संभावना है।

अभिषेक बनर्जी और चुनावी समय का संयोग

इस छापेमारी को लेकर एक और पहलू पर नजर रखी जा रही है—तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की गतिविधियां। बताया जा रहा है कि जिस रात वह सामान्य तौर पर कोलकाता लौटते हैं, उस रात वे मालदा में ही रुके थे और अगले दिन सुबह ईडी की कार्रवाई शुरू हुई।

हालांकि इसे संयोग माना जा सकता है, लेकिन बंगाल की राजनीति में संयोग भी अक्सर बहस का विषय बन जाते हैं।

भाजपा को मिला राजनीतिक मौका

इस घटनाक्रम से मुख्य विपक्षी दल भाजपा को भी चुनाव से पहले एक नया मुद्दा मिल गया है। भाजपा के एक वर्ग का कहना रहा है कि केंद्र सरकार को भ्रष्टाचार के मामलों में और सख्ती दिखानी चाहिए। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कोलकाता यात्रा के दौरान भी यह सवाल उठा था कि कई बार तलब किए जाने के बावजूद कुछ नेताओं पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

अब आइ-पेक पर छापेमारी के बाद भाजपा इसे राजनीतिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार के मुद्दे से जोड़कर आगे बढ़ा सकती है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।