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कोलकाता के रीजेंट एस्टेट पोस्ट मास्टर गिरफ्तार, 8.51 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा

Post Office Fraud Case: कोलकाता में पोस्ट मास्टर गिरफ्तार, 8.51 करोड़ की धोखाधड़ी
Post Office Fraud Case: कोलकाता में पोस्ट मास्टर गिरफ्तार, 8.51 करोड़ की धोखाधड़ी

Post Office Fraud Case: कोलकाता के रीजेंट एस्टेट पोस्ट ऑफिस में बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। पोस्ट मास्टर दिलीप कुमार जाना ने नकली एजेंट के साथ मिलकर 25 निवेशकों से 8.51 करोड़ रुपये की ठगी की। जाडवपुर पुलिस ने पोस्ट मास्टर को गोपाल नगर, अलीपुर से गिरफ्तार किया।

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Post Office Fraud Case: कोलकाता के रीजेंट एस्टेट पोस्ट ऑफिस में हुई बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हो गया है। इस मामले में पोस्ट मास्टर दिलीप कुमार जाना को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी एक बड़े घोटाले का हिस्सा है जिसमें तकरीबन 8.51 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। जाडवपुर पुलिस स्टेशन ने इस मामले की जांच करते हुए कई अहम खुलासे किए हैं।

जाडवपुर पुलिस ने 25 अक्टूबर 2025 को यह मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता अविजित मजूमदार ने अपनी शिकायत में बताया कि रीजेंट एस्टेट पोस्ट ऑफिस के पोस्ट मास्टर और एक नकली एजेंट ने मिलकर उनके साथ धोखाधड़ी की। पुलिस की जांच में यह साफ हुआ कि यह एक बड़ी साजिश थी जिसमें कई लोग शामिल थे।

पुलिस की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में दो मुख्य आरोपी हैं – सिद्धार्थ करनजई और पोस्ट मास्टर दिलीप कुमार जाना। इन दोनों ने मिलकर निवेशकों को फंसाने की योजना बनाई थी। यह मामला सिर्फ एक पीड़ित का नहीं है, बल्कि रीजेंट पार्क और नेताजी नगर इलाके के 25 लोग इस धोखाधड़ी के शिकार बने हैं।

धोखाधड़ी का तरीका और साजिश

आरोपी सिद्धार्थ करनजई ने खुद को भारतीय डाक विभाग का अधिकृत एजेंट बताया। उसने निवेशकों से संपर्क करके उन्हें यकीन दिलाया कि वह पोस्ट ऑफिस की तरफ से काम कर रहा है। पोस्ट मास्टर दिलीप कुमार जाना ने इस नकली एजेंट को पूरा सहयोग दिया। दोनों ने मिलकर लोगों को बेवकूफ बनाने की योजना तैयार की।

शिकायतकर्ता अविजित मजूमदार के मामले में, आरोपियों ने उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट की परिपक्व राशि निकलवा ली। उन्होंने अविजित को बताया कि यह रकम दोबारा निवेश के लिए दूसरे खाते में जमा की जा रही है। लेकिन असलियत में यह पैसा आरोपियों के खाते में चला गया। इस तरह तकरीबन 3.50 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी अकेले अविजित के साथ हुई।

आरोपियों ने अपनी चाल को और पुख्ता बनाने के लिए नकली पोस्ट ऑफिस पासबुक और सर्टिफिकेट भी तैयार किए। ये दस्तावेज इतने असली लगते थे कि निवेशकों को शक तक नहीं हुआ। वे सोचते रहे कि उनका पैसा सुरक्षित पोस्ट ऑफिस में जमा है।

पुलिस जांच में हुए बड़े खुलासे

जाडवपुर पुलिस ने इस मामले की गहन जांच शुरू की। जांच अधिकारी ने मौखिक और लिखित दोनों तरह के सबूत इकट्ठा किए। पुलिस ने पोस्ट ऑफिस के रिकॉर्ड की जांच की और पाया कि पोस्ट मास्टर ने अपनी जिम्मेदारी का गलत इस्तेमाल किया है।

जांच में यह साफ हो गया कि नकली एजेंट सिद्धार्थ करनजई अकेले यह धोखाधड़ी नहीं कर सकता था। उसे पोस्ट मास्टर की सीधी मदद मिल रही थी। दिलीप कुमार जाना ने भारतीय डाक विभाग के नियमों की अनदेखी करते हुए सिद्धार्थ को अपराध करने में मदद की।

पुलिस ने वरिष्ठ डाक अधीक्षक कार्यालय, दक्षिण डिवीजन, कोलकाता से भी जानकारी हासिल की। वहां से मिले दस्तावेजों ने पोस्ट मास्टर की भूमिका को साफ कर दिया। यह साबित हो गया कि पोस्ट मास्टर की मदद के बिना यह अपराध नामुमकिन था।

पहली गिरफ्तारी और दूसरी कार्रवाई

पुलिस ने सबसे पहले नकली एजेंट सिद्धार्थ करनजई को गिरफ्तार किया था। वह अभी न्यायिक हिरासत में है। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने मामले की और गहराई से जांच की। जांच में पोस्ट मास्टर की भूमिका सामने आई।

पर्याप्त सबूत इकट्ठा करने के बाद, पुलिस ने दिलीप कुमार जाना को गिरफ्तार करने का फैसला किया। 59 साल के दिलीप कुमार जाना सोनारपुर, कोलकाता के घासियारा पश्चिम पारा इलाके के रहने वाले हैं। पुलिस ने उन्हें गोपाल नगर, अलीपुर, कोलकाता से गिरफ्तार किया।

यह गिरफ्तारी शाम के समय हुई। पोस्ट मास्टर को अदालत में पेश किया गया है जहां पुलिस ने उनकी रिमांड की मांग की है। पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी।

कितने लोग बने शिकार और कुल नुकसान

यह मामला सिर्फ एक धोखाधड़ी का नहीं है। पुलिस के पास तीन अलग-अलग मामले दर्ज हैं जो एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रीजेंट पार्क और नेताजी नगर इलाके के आम निवेशक इस अपराध के शिकार बने हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई पोस्ट ऑफिस में सुरक्षित समझकर जमा की थी।

अब तक तकरीबन 25 पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई है। कुल धोखाधड़ी की रकम 8.51 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह बहुत बड़ी राशि है जो आम निवेशकों के लिए उनकी जीवन भर की बचत हो सकती है।

पुलिस ने बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं। हर मामले में कई पीड़ित हैं। जांच के दौरान और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं जिन्होंने अभी तक शिकायत नहीं की है।

पोस्ट मास्टर की भूमिका क्या थी

दिलीप कुमार जाना एफआईआर में नामित आरोपी हैं। वे रीजेंट एस्टेट पोस्ट ऑफिस के पोस्ट मास्टर के पद पर तैनात थे। उन्होंने अपनी इस जिम्मेदारी का गलत इस्तेमाल किया।

पोस्ट मास्टर ने भारतीय डाक विभाग के नियमों का पालन नहीं किया। उन्होंने जानबूझकर सिद्धार्थ करनजई की मदद की। उनके सहयोग से ही यह धोखाधड़ी संभव हो पाई।

पुलिस के पास ऐसे सबूत हैं जो साबित करते हैं कि पोस्ट मास्टर की मदद के बिना यह अपराध नहीं हो सकता था। उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करके निवेशकों का विश्वास तोड़ा।

कानूनी धाराएं और अगले कदम

यह मामला जाडवपुर पुलिस स्टेशन में केस नंबर 163 के तहत दर्ज है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं लगाई गई हैं। इनमें धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 341(1), 61(2), और 316(5) शामिल हैं।

ये धाराएं साजिश रचने, धोखाधड़ी करने, नकली दस्तावेज बनाने और गबन जैसे अपराधों से संबंधित हैं। इन धाराओं के तहत आरोपियों को सजा हो सकती है।

पोस्ट मास्टर को अदालत में पेश किया गया है। पुलिस ने उनकी रिमांड मांगी है ताकि और सबूत इकट्ठा किए जा सकें। जांच अभी जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि और भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी।

पोस्ट ऑफिस में निवेश की सुरक्षा पर सवाल

Post Office Fraud Case: यह मामला पोस्ट ऑफिस में निवेश की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोग अपना पैसा पोस्ट ऑफिस में इसलिए जमा करते हैं क्योंकि यह सरकारी संस्था है। लोगों को भरोसा है कि यहां उनका पैसा सुरक्षित रहेगा।

लेकिन जब पोस्ट ऑफिस का अधिकारी ही धोखाधड़ी में शामिल हो जाए, तो यह बहुत चिंता की बात है। यह मामला दिखाता है कि कुछ बेईमान अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का गलत फायदा उठा सकते हैं।

इस घटना से सभी निवेशकों को सतर्क रहने की सीख मिलती है। किसी भी एजेंट पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। सभी लेन-देन की पक्की रसीद और आधिकारिक दस्तावेज जरूर लेने चाहिए।

पीड़ितों के लिए क्या उम्मीद

पुलिस की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। दोनों मुख्य आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही पूरा सच सामने आ जाएगा।

पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धोखाधड़ी से मिला पैसा कहां गया। अगर यह पैसा मिल जाता है तो पीड़ितों को वापस मिल सकता है।

यह मामला यह भी दिखाता है कि पुलिस गंभीरता से काम कर रही है। हर छोटे-बड़े सबूत की जांच की जा रही है। पीड़ितों को उम्मीद है कि उन्हें उनका पैसा वापस मिलेगा और आरोपियों को सजा होगी।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।