Two suspected Nipah cases detected in Bengal’s Kalyani: कल्याणी में मिले निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले
पश्चिम बंगाल के कल्याणी में स्थित एम्स में रविवार को निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामले सामने आए हैं। कोलकाता से करीब 50 किलोमीटर उत्तर में स्थित इस शहर में यह खबर चिंता का विषय बन गई है। एम्स कल्याणी के वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी में इन मामलों की पुष्टि हुई है। यह लैब आईसीएमआर के अंतर्गत काम करती है और खतरनाक वायरस की पहचान में विशेष भूमिका निभाती है।
निपाह वायरस क्या है और क्यों है खतरनाक
निपाह एक जूनोटिक वायरस है, जिसका मतलब है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह बीमारी बेहद गंभीर होती है और इससे दिमाग में सूजन आ जाती है, जिसे एन्सेफलाइटिस कहते हैं। इस बीमारी से मृत्यु दर काफी ज्यादा होती है और यह तेजी से फैलने की क्षमता रखती है। फल खाने वाले चमगादड़ और सूअर इस वायरस को फैलाने के मुख्य कारक माने जाते हैं।
सबसे पहली बार यह वायरस 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में पहचाना गया था। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत या दिमाग से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसका कोई निश्चित इलाज अभी तक उपलब्ध नहीं है।
केंद्र सरकार की त्वरित कार्रवाई
स्थिति को देखते हुए केंद्र के स्वास्थ्य सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव स्वास्थ्य से बातचीत की है। इस बातचीत में स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तेज और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की मदद के लिए एक विशेष टीम भेजी है जो बीमारी को फैलने से रोकने और जनस्वास्थ्य प्रतिक्रिया में सहायता करेगी।
इस राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया टीम में कई संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। कोलकाता स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड पब्लिक हाइजीन, पुणे के राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान, चेन्नई के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान, एम्स कल्याणी और बंगाल के वन्यजीव विभाग के अधिकारी इस टीम का हिस्सा हैं। साथ ही केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के विशेषज्ञ भी इसमें शामिल हैं।
विशेषज्ञों की व्यापक टीम तैनात
केंद्र सरकार ने राज्य की एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम इकाई को निपाह वायरस से जुड़ी दिशानिर्देश भेजे हैं। यह दिशानिर्देश संक्रामक रोग चेतावनी के तहत जारी किए गए हैं। दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर को सक्रिय कर दिया गया है। यह केंद्र अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया का समन्वय कर रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का आश्वासन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर केंद्र की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। मंत्री ने मुख्यमंत्री से फोन पर भी बात की और स्थिति की गंभीरता पर चर्चा की। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि इस संकट से निपटने में राज्य सरकार को हर संभव मदद दी जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, लैब सहायता, निगरानी बढ़ाने, मामलों के प्रबंधन, संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण उपायों सहित सभी जरूरी संसाधन पहले से ही जुटाए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया गया है।
राज्य सरकार को दी गई सलाह
राज्य सरकार को विशेषज्ञ टीमों के साथ निकट समन्वय बनाए रखने की सलाह दी गई है। संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों की सावधानीपूर्वक पहचान और उनकी जांच करने पर जोर दिया गया है। यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि निपाह वायरस तेजी से फैल सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी गई है।
निगरानी और सावधानी बेहद जरूरी
Two suspected Nipah cases detected in Bengal’s Kalyani: ऐसे समय में जनता को घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करना और किसी भी असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना अत्यंत आवश्यक है। चमगादड़ों और अन्य जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखना, स्वच्छता का ध्यान रखना और बिना धुले फलों का सेवन न करना जैसी सावधानियां बरतनी चाहिए।
राज्य और केंद्र की सक्रियता से संभावित खतरे को कम करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों की टीम लगातार काम कर रही है ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके और प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज मिल सके।
स्थिति पर नियंत्रण के प्रयास जारी
अभी तक केवल संदिग्ध मामलों की ही पुष्टि हुई है। अंतिम परीक्षण परिणाम आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी। लेकिन सरकारी तंत्र ने बिना समय गंवाए सक्रिय कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर की गई कार्रवाई किसी भी बीमारी के प्रकोप को नियंत्रित करने में सबसे महत्वपूर्ण होती है।
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार किए जा रहे हैं और स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनता को भी जागरूक करने के लिए अभियान शुरू किए गए हैं।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि स्वास्थ्य सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है और किसी भी आपदा से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मजबूत समन्वय कितना जरूरी है।