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रायगंज में STF और कोलकाता पुलिस की बड़ी कार्रवाई, टिफिन बॉक्स में छुपाई 700 ग्राम हेरोइन के साथ 18 साल का युवक गिरफ्तार

Raiganj Heroin Bust: रायगंज में STF और कोलकाता पुलिस ने पकड़ी 3.5 करोड़ की हेरोइन, टिफिन बॉक्स में छुपाया था नशा
Raiganj Heroin Bust: रायगंज में STF और कोलकाता पुलिस ने पकड़ी 3.5 करोड़ की हेरोइन, टिफिन बॉक्स में छुपाया था नशा

Raiganj Heroin Bust: 11 फरवरी 2026 को STF, कोलकाता पुलिस और SOG की संयुक्त टीम ने रायगंज के सिलीगुड़ी मोड़ से मालदा के 18 वर्षीय मो. सब्बीर शेख को गिरफ्तार किया। उसके पास से एक प्लास्टिक टिफिन बॉक्स में छुपाई गई 700 ग्राम हेरोइन मिली जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 3.5 करोड़ रुपये है। NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।

Updated:

रायगंज में STF और कोलकाता पुलिस का बड़ा ऑपरेशन

11 फरवरी 2026 की सुबह पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज में पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की। STF यानी स्पेशल टास्क फोर्स, कोलकाता पुलिस और SOG की मिलकर बनाई गई एक संयुक्त टीम ने रायगंज थाना क्षेत्र के सिलीगुड़ी मोड़ से 18 साल के एक युवक को गिरफ्तार किया। इस युवक के पास से एक प्लास्टिक के टिफिन बॉक्स में छुपाई गई 7 पुड़ियों में करीब 700 ग्राम हेरोइन मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस हेरोइन की कीमत लगभग 3.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह गिरफ्तारी खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी।

पकड़ा गया युवक मो. सब्बीर शेख है जो केवल 18 साल का है। वह मालदा जिले के खासचंदपुर गांव का रहने वाला है और कालियाचक थाना क्षेत्र से आता है। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी मात्रा में नशे की तस्करी में पकड़ा जाना पुलिस और समाज दोनों के लिए एक चिंता की बात है।

टिफिन बॉक्स में छुपाई थी हेरोइन

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन की शुरुआत STF और कोलकाता पुलिस की खुफिया शाखा द्वारा तैयार की गई एक सटीक जानकारी से हुई। जब टीम को पता चला कि एक युवक नशे का सामान लेकर रायगंज के सिलीगुड़ी मोड़ की तरफ बढ़ रहा है, तो तुरंत कार्रवाई की गई। पुलिस ने उस युवक को रोका और तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसके पास से एक साधारण दिखने वाला प्लास्टिक का टिफिन बॉक्स मिला। जब उस बॉक्स को खोला गया तो उसमें 7 पैकेट निकले जिनमें हेरोइन भरी हुई थी। पूरी हेरोइन की मात्रा करीब 700 ग्राम है।

यह तरीका नशा तस्करों के बीच काफी सामान्य होता जा रहा है। वे रोजमर्रा की चीजों जैसे कि टिफिन, साबुन के डिब्बे, बिस्किट के पैकेट और यहां तक कि कपड़ों में भी नशे की सामग्री छुपाते हैं ताकि पुलिस को संदेह न हो। इस बार भी यही तरीका अपनाया गया था लेकिन खुफिया तंत्र की सतर्कता ने तस्कर का भंडाफोड़ कर दिया।

मालदा से रायगंज तक का नशे का जाल

पकड़ा गया युवक मो. सब्बीर शेख मालदा के कालियाचक थाना क्षेत्र का रहने वाला है। यह इलाका पहले भी नशे की तस्करी के मामलों में चर्चा में रहा है। मालदा जिला बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ है और यही कारण है कि यह नशे के तस्करों के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता बन गया है। माना जा रहा है कि हेरोइन बांग्लादेश या म्यांमार की तरफ से आती है और मालदा जैसे सीमावर्ती इलाकों से होते हुए पश्चिम बंगाल के अंदरूनी हिस्सों में पहुंचती है।

रायगंज का सिलीगुड़ी मोड़ उत्तर बंगाल का एक व्यस्त रास्ता है। सिलीगुड़ी से लेकर मालदा और आगे कोलकाता तक का यह रास्ता तस्करों के लिए अक्सर एक महत्वपूर्ण गलियारा माना जाता है। ऐसे में यहां पर नशे की तस्करी का पकड़ा जाना इस बात की पुष्टि करता है कि पुलिस का ध्यान इन रास्तों पर बना हुआ है।

18 साल की उम्र में तस्करी, समाज के लिए सवाल

इस पूरी घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पकड़ा गया युवक केवल 18 साल का है। यानी अभी कुछ समय पहले तक वह एक बच्चे की श्रेणी में आता था। इतनी कम उम्र में करोड़ों रुपये की हेरोइन लेकर चलना यह बताता है कि नशे के तस्करी के नेटवर्क में कम उम्र के लड़कों को किस तरह से फंसाया जाता है।

आमतौर पर बड़े तस्कर खुद सामने नहीं आते। वे छोटे और गरीब परिवारों के युवाओं को थोड़े से पैसों का लालच देकर नशे का सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम कराते हैं। इन युवाओं को पूरी जानकारी भी नहीं होती कि उनके हाथ में क्या है और पकड़े जाने पर उन्हें ही सजा होती है जबकि असली मास्टरमाइंड पीछे बैठा रहता है।

STF और कोलकाता पुलिस का खुफिया तंत्र मजबूत

इस ऑपरेशन में STF, कोलकाता पुलिस की खुफिया इकाई और SOG यानी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप, रायगंज पुलिस जिले की टीम ने मिलकर काम किया। यह एक अच्छा उदाहरण है कि जब अलग-अलग पुलिस बल एक साथ आते हैं और सूचनाओं को आपस में साझा करते हैं तो कामयाबी मिलती है। इस केस में कोलकाता से मिली खुफिया जानकारी ने रायगंज पुलिस को सही समय पर सही जगह पहुंचने में मदद की।

ऐसे संयुक्त ऑपरेशन नशे की तस्करी के खिलाफ लड़ाई में बहुत जरूरी हैं। अकेले एक थाने या एक जिले की पुलिस के लिए नशे के बड़े नेटवर्क को तोड़ना मुश्किल होता है। लेकिन जब STF जैसी बड़ी टीमें स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर काम करती हैं तो नतीजे बेहतर आते हैं।

NDPS Act के तहत मामला दर्ज

गिरफ्तार युवक के खिलाफ NDPS Act यानी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह एक सख्त कानून है जिसमें बड़ी मात्रा में नशे की बरामदगी पर कड़ी सजा का प्रावधान है। 700 ग्राम हेरोइन एक बड़ी मात्रा मानी जाती है और इस पर 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

पुलिस अब इस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। मुख्य सवाल यह है कि यह हेरोइन कहां से आई, कौन इसे लाया था और रायगंज में यह किसको दी जानी थी। अगर पुलिस इन सवालों के जवाब ढूंढ लेती है तो पूरे नेटवर्क को तोड़ा जा सकता है।

नशे की लड़ाई में जनता की भूमिका भी जरूरी

पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद नशे की तस्करी पूरी तरह रुक नहीं पाती। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि समाज में जागरूकता की कमी है। लोग अपने आस-पास की संदिग्ध गतिविधियों को देखकर भी चुप रहते हैं। अगर आम लोग भी पुलिस के साथ मिलकर इस लड़ाई में हिस्सा लें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें तो नशे के तस्करों को पकड़ना और आसान हो सकता है।

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ सालों में नशे की तस्करी के मामले बढ़े हैं। खासकर उत्तर बंगाल और सीमावर्ती जिलों में यह समस्या गंभीर होती जा रही है। रायगंज जैसी इस कार्रवाई से संदेश जाता है कि पुलिस सतर्क है और तस्करों को छोड़ा नहीं जाएगा।

आज की यह गिरफ्तारी एक छोटी जीत जरूर है लेकिन नशे के खिलाफ असली लड़ाई तब होगी जब इन नेटवर्क के बड़े सरगनाओं तक पहुंचा जाएगा। पुलिस को उम्मीद है कि सब्बीर से पूछताछ में और अहम जानकारियां मिलेंगी जो इस नशे के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने में मदद करेंगी।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।