चुनाव आयोग की सख्ती: पश्चिम बंगाल में बड़ी कार्रवाई
West Bengal Election Commission suspends 7 AEROs over SIR guideline violations: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में चुनावी प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपनाया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आज एक महत्वपूर्ण ब्रीफिंग में कई अहम जानकारियां साझा कीं। इस ब्रीफिंग में 7 AERO (सहायक निर्वाचन रिटर्निंग ऑफिसर) के निलंबन से लेकर 2 लाख से अधिक अपात्र मतदाताओं की पहचान तक कई मुद्दों पर चर्चा की गई। यह कदम पूरे देश में पहली बार उठाया गया है जहां चुनाव आयोग ने सीधे तौर पर इतनी बड़ी कार्रवाई की है।
AERO निलंबन के कारण और प्रक्रिया
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिन 7 AERO को निलंबित किया गया है, उन्होंने SIR (Summary of Revision) की गाइडलाइन का उल्लंघन किया है। यह गाइडलाइन चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बनाई गई है। इन अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का पालन करने में लापरवाही बरती है, जिसके कारण चुनाव आयोग को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
निलंबन वापस लेने की प्रक्रिया भी काफी कठोर है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि केवल राज्य सरकार ही चुनाव आयोग से परामर्श करके इन 7 AERO के निलंबन को वापस ले सकती है। इसके अलावा कोई अन्य तरीका या विकल्प नहीं है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि चुनावी मामलों में कोई भी फैसला जल्दबाजी में या दबाव में नहीं लिया जाए।
पूरे देश में पश्चिम बंगाल एकमात्र राज्य
एक चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि पूरे देश में पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां चुनाव आयोग ने सीधे तौर पर निलंबन का आदेश दिया है। यह बात राज्य में चुनावी प्रक्रिया की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। आमतौर पर ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन या राज्य सरकार ही कार्रवाई करती है, लेकिन यहां चुनाव आयोग को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा।
यह कदम यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग देश के किसी भी हिस्से में चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह राज्य के अन्य चुनावी अधिकारियों के लिए भी एक सख्त चेतावनी है कि उन्हें अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से करना होगा।
आवास योजना दस्तावेजों के मामले में सख्ती
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा आवास योजना या बांग्लार बाड़ी योजना से जुड़े दस्तावेजों का है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि जिन लोगों ने इन योजनाओं के साथ अन्य दस्तावेज भी जमा किए हैं, लेकिन ERO (निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी) ने उन्हें अपलोड नहीं किया है, तो ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यदि यह साबित हो जाता है कि किसी ERO ने जानबूझकर दस्तावेजों को अपलोड नहीं किया है, तो चुनाव आयोग उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि कोई भी अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बच न सके और सभी दस्तावेज सही तरीके से दर्ज किए जाएं।
हियरिंग में नाम हटने की स्थिति में अपील प्रक्रिया
जिन लोगों ने सही दस्तावेज जमा किए हैं लेकिन हियरिंग के बाद उनका नाम अंतिम मतदाता सूची से हट जाता है, उनके लिए भी एक स्पष्ट प्रक्रिया बताई गई है। ऐसे लोग सबसे पहले जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के पास अपील कर सकते हैं।
यदि जिला स्तर पर उनकी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो वे राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास अपील कर सकते हैं। यह दो स्तरीय अपील प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलती से न हटे और उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिले।
जांच के बाद 2 लाख से अधिक अपात्र मतदाता
West Bengal Election Commission suspends 7 AEROs over SIR guideline violations: सबसे बड़ी खबर यह है कि जांच के बाद कुल 208870 अपात्र मतदाताओं की पहचान की गई है। यह एक बहुत बड़ी संख्या है और यह दर्शाता है कि राज्य में मतदाता सूची में कितनी अनियमितताएं थीं। इन अपात्र मतदाताओं में वे लोग शामिल हो सकते हैं जो मर चुके हैं, जो दूसरी जगह चले गए हैं, या जिन्होंने फर्जी दस्तावेज जमा किए हैं।
इतनी बड़ी संख्या में अपात्र मतदाताओं की पहचान यह साबित करती है कि चुनाव आयोग की सख्ती जरूरी थी। अब यह देखना होगा कि आने वाले समय में राज्य में चुनावी प्रक्रिया कितनी साफ और पारदर्शी होती है।
आगे की राह
चुनाव आयोग के इस सख्त रुख से यह संदेश साफ है कि वह चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं करेगा। राज्य के सभी चुनावी अधिकारियों को अब और भी सतर्क रहना होगा। अंतिम मतदाता सूची जल्द ही जारी की जाएगी और उसके बाद जिन लोगों को अपनी शिकायत होगी, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपील कर सकते हैं। यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में चुनावी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।