West Bengal Employees Protest: पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों का एक बड़ा प्रतिनिधि दल नबन्ना पहुंचा, लेकिन उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। संग्रामी संयुक्त मंच के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले की कॉपी मुख्यमंत्री को सौंपने की कोशिش की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। यह घटना एक बार फिर से राज्य में कर्मचारियों के अधिकारों और सरकार की नीतियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है।
कर्मचारियों का नबन्ना की ओर कूच
संग्रामी संयुक्त मंच की ओर से संयोजक भास्कर घोष के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधि दल नबन्ना पहुंचा। इस दल का मुख्य उद्देश्य महंगाई भत्ते (DA) से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति सीधे मुख्यमंत्री को सौंपना था। कर्मचारियों की मांग है कि इस फैसले को जल्द से जल्द लागू किया जाए और उनके बकाया का भुगतान किया जाए।
भास्कर घोष ने कहा कि यह केवल एक प्रतिनिधि दल नहीं है, बल्कि हजारों कर्मचारियों की आवाज है जो अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया है और अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इसे तुरंत लागू करे।
नबन्ना में प्रवेश से रोका गया
जब प्रतिनिधि दल नबन्ना पहुंचा तो उन्हें अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। पुलिस ने उन्हें नबन्ना के पास ही रोक दिया और हावड़ा सिटी पुलिस के ट्रैफिक असिस्टेंट कमिश्नर के दफ्तर में बैठाया गया। यह कार्यालय नबन्ना से कुछ ही दूरी पर स्थित है।
पुलिस के इस कदम से कर्मचारी नाराज हैं। उनका कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने का मौका ही नहीं दिया। यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
पुलिस ने लिया डेपुटेशन की कॉपी
हावड़ा पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में बैठे प्रतिनिधि दल से पुलिस ने डेपुटेशन की कॉपी ली और उसे नबन्ना में जमा कराने का आश्वासन दिया। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि वे खुद मुख्यमंत्री से मिलना चाहते हैं और सीधे उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में बताना चाहते हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि सरकार इस मुद्दे पर सीधी बातचीत से बच रही है। कर्मचारियों को लगता है कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और उनके साथ गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
DA मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला
यह पूरा मामला महंगाई भत्ते से जुड़ा है। कई वर्षों से पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारी अपने DA में संशोधन और बकाया राशि की मांग कर रहे हैं। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो कर्मचारियों के पक्ष में माना जा रहा है। कर्मचारियों की मांग है कि इस फैसले को तत्काल लागू किया जाए और उनके अधिकारों का सम्मान किया जाए।
कर्मचारियों की मांगें
संग्रामी संयुक्त मंच ने स्पष्ट किया है कि उनकी मुख्य मांग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करना है। इसके अलावा वे चाहते हैं कि:
- बकाया DA का तुरंत भुगतान किया जाए
- भविष्य में समय पर DA में संशोधन हो
- कर्मचारियों के अन्य लंबित मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाए
- सरकार कर्मचारियों के साथ सीधी बातचीत करे
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वे बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
बड़े आंदोलन की तैयारी
नबन्ना में प्रवेश से रोके जाने के बाद संग्रामी संयुक्त मंच ने एक बड़े आंदोलन की घोषणा की है। भास्कर घोष ने कहा कि यदि सरकार जल्द ही सकारात्मक कदम नहीं उठाती तो वे पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
कर्मचारी संगठनों ने अन्य यूनियनों और मंचों से भी अपील की है कि वे इस आंदोलन में शामिल हों। उनका मानना है कि यह केवल DA का मुद्दा नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों का सवाल है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों ने सरकार पर कर्मचारियों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी सरकार मौन क्यों है।
दूसरी ओर, सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि सरकार कर्मचारियों के हित में काम कर रही है और जल्द ही इस मामले पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, कर्मचारियों को यह आश्वासन काफी नहीं लगता।
कर्मचारियों का संघर्ष जारी
पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों का यह संघर्ष कोई नया नहीं है। कई वर्षों से वे अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। DA का मामला तो लंबे समय से लटका हुआ है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार को समझना होगा कि कर्मचारी राज्य की रीढ़ हैं। उनकी मांगें जायज हैं और उन्हें पूरा किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब कोई बहाना नहीं चलेगा।
आगे की रणनीति
West Bengal Employees Protest: संग्रामी संयुक्त मंच ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। अगले कुछ दिनों में वे राज्यभर में बैठकें करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। यदि सरकार ने सकारात्मक पहल नहीं की तो धरना, प्रदर्शन और यहां तक कि हड़ताल का भी ऐलान किया जा सकता है।
कर्मचारियों का मानना है कि उनका संघर्ष न्यायसंगत है और उन्हें जनता का समर्थन मिलेगा। वे सरकार से अपील करते हैं कि वह लोकतांत्रिक तरीके से उनकी बात सुने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सम्मान दे।
पश्चिम बंगाल में कर्मचारियों का यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत ही इस गतिरोध का एकमात्र समाधान है। देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।