
चिरकालीन परंपरा का पालन करते हुए बेलूड़ मठ में दोल उत्सव के एक दिन पहले शाम को होलिकादहन का आयोजन किया गया। ठाकुर श्री रामकृष्ण देव के मंदिर में संध्या आरती के बाद गंगा के तट पर देवी होलिका के पुतले की पूजा के पश्चात खोल, करताल, हारमोनियम के साथ भक्ति गीतों के माध्यम से घंटा और कांसे की ध्वनि में देवी होलिका का दहन किया गया। जिसे देखने के लिए बेलूड़ मठ में आए दर्शनार्थियों ने गंगा के तटवर्ती मैदान में भारी भीड़ लगाई। रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

चिरकालीन परंपरा का पालन करते हुए बेलूड़ मठ में दोल उत्सव के एक दिन पहले शाम को होलिकादहन का आयोजन किया गया। ठाकुर श्री रामकृष्ण देव के मंदिर में संध्या आरती के बाद गंगा के तट पर देवी होलिका के पुतले की पूजा के पश्चात खोल, करताल, हारमोनियम के साथ भक्ति गीतों के माध्यम से घंटा और कांसे की ध्वनि में देवी होलिका का दहन किया गया। जिसे देखने के लिए बेलूड़ मठ में आए दर्शनार्थियों ने गंगा के तटवर्ती मैदान में भारी भीड़ लगाई। रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल के बेलूर मठ में आज सुबह से ही भक्तों का तांता लग गया। ठाकुर श्री रामकृष्ण देव की 191वीं जयंती के अवसर पर पूरे मठ परिसर में भक्ति और आस्था का माहौल है। सुबह साढ़े चार बजे से ही मंगल आरती के साथ विशेष पूजा की शुरुआत हुई और पूरे दिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। बेलूर मठ में सुबह से शुरू हुआ उत्सव ठाकुर श्री रामकृष्ण देव के जन्मदिन को मनाने के लिए देश-विदेश से भक्त बेलूर मठ पहुंचे हैं। सुबह की मंगल आरती के साथ ही विशेष पूजा अर्चना का सिलसिला शुरू हो

पश्चिम बंगाल के बेलूर मठ में आज सुबह से ही भक्तों का तांता लग गया। ठाकुर श्री रामकृष्ण देव की 191वीं जयंती के अवसर पर पूरे मठ परिसर में भक्ति और आस्था का माहौल है। सुबह साढ़े चार बजे से ही मंगल आरती के साथ विशेष पूजा की शुरुआत हुई और पूरे दिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। बेलूर मठ में सुबह से शुरू हुआ उत्सव ठाकुर श्री रामकृष्ण देव के जन्मदिन को मनाने के लिए देश-विदेश से भक्त बेलूर मठ पहुंचे हैं। सुबह की मंगल आरती के साथ ही विशेष पूजा अर्चना का सिलसिला शुरू हो

नए साल के पहले दिन पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध बेलुड़ मठ में कल्पतरु दिवस मनाया गया। इस खास मौके पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और भक्त बेलुड़ मठ पहुंचे। हर साल की तरह इस बार भी यह पर्व पूरी धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। श्रीरामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के अनुयायियों के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है। कल्पतरु दिवस का महत्व कल्पतरु दिवस श्रीरामकृष्ण परमहंस से जुड़ा एक विशेष आध्यात्मिक पर्व है। इस दिन को कल्पतरु उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,

नए साल के पहले दिन पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध बेलुड़ मठ में कल्पतरु दिवस मनाया गया। इस खास मौके पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और भक्त बेलुड़ मठ पहुंचे। हर साल की तरह इस बार भी यह पर्व पूरी धार्मिक आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। श्रीरामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के अनुयायियों के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है। कल्पतरु दिवस का महत्व कल्पतरु दिवस श्रीरामकृष्ण परमहंस से जुड़ा एक विशेष आध्यात्मिक पर्व है। इस दिन को कल्पतरु उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,