
चंद्रपुर जिले में स्थित ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे वन्यजीवों को होने वाले खतरे को देखते हुए एक बड़े अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि इंसानों के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। वन्यजीवों पर बढ़ता खतरा ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के आसपास बसे गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये कुत्ते झुंड बनाकर जंगल में घुसते हैं और वन्यजीवों पर हमला करते हैं। पिछले कुछ समय में हिरण, खरगोश, मोर, लोमड़ी

चंद्रपुर जिले में स्थित ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे वन्यजीवों को होने वाले खतरे को देखते हुए एक बड़े अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि इंसानों के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। वन्यजीवों पर बढ़ता खतरा ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के आसपास बसे गांवों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये कुत्ते झुंड बनाकर जंगल में घुसते हैं और वन्यजीवों पर हमला करते हैं। पिछले कुछ समय में हिरण, खरगोश, मोर, लोमड़ी

चंद्रपुर जिले के नवरगांव में रहने वाली मथुरा ताई का नाम देश के कानूनी इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। 1972 में हुए अत्याचार के उस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसी मामले के कारण भारत में बलात्कार कानूनों में बड़े बदलाव हुए थे। लेकिन आज वही मथुरा ताई जिनके दर्द ने कानून को बदल दिया, खुद बेहद कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन बिता रही हैं। अर्धांगवायू यानी लकवे से पीड़ित मथुरा ताई की हालत जब विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे को पता चली तो उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए नवरगांव का

चंद्रपुर जिले के नवरगांव में रहने वाली मथुरा ताई का नाम देश के कानूनी इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। 1972 में हुए अत्याचार के उस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसी मामले के कारण भारत में बलात्कार कानूनों में बड़े बदलाव हुए थे। लेकिन आज वही मथुरा ताई जिनके दर्द ने कानून को बदल दिया, खुद बेहद कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन बिता रही हैं। अर्धांगवायू यानी लकवे से पीड़ित मथुरा ताई की हालत जब विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे को पता चली तो उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए नवरगांव का

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को खेलों के क्षेत्र में सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “Viksit Maharashtra 2047 – युवा व खेल संवाद” अभियान की शुरुआत नागपुर से की है। इस पहल का मकसद है कि आने वाले वर्षों में राज्य की Maharashtra Sports Policy 2047 को अधिक समावेशी, व्यावहारिक और खिलाड़ियों की ज़रूरतों के अनुसार तैयार किया जा सके। खिलाड़ियों की प्रमुख मांगें और Sports Policy 2047 से जोड़ाव नागपुर में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में गडचिरोली, चंद्रपुर, भंडारा, गोंदिया, वर्धा और नागपुर जिलों के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, संघटकों, पंचों, दिव्यांग खिलाड़ियों और विभिन्न खेल संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को खेलों के क्षेत्र में सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “Viksit Maharashtra 2047 – युवा व खेल संवाद” अभियान की शुरुआत नागपुर से की है। इस पहल का मकसद है कि आने वाले वर्षों में राज्य की Maharashtra Sports Policy 2047 को अधिक समावेशी, व्यावहारिक और खिलाड़ियों की ज़रूरतों के अनुसार तैयार किया जा सके। खिलाड़ियों की प्रमुख मांगें और Sports Policy 2047 से जोड़ाव नागपुर में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में गडचिरोली, चंद्रपुर, भंडारा, गोंदिया, वर्धा और नागपुर जिलों के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, संघटकों, पंचों, दिव्यांग खिलाड़ियों और विभिन्न खेल संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल