
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी अथवा दशहरा (Dussehra 2025) का पर्व मनाया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी। इस वर्ष 2 अक्टूबर 2025 को दशहरा पर्व विशेष योगों के संयोग में मनाया जाएगा। इस वर्ष का विशेष संयोग ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार दशहरा पर रवि योग (Ravi Yog) और सुकर्मा योग (Sukarma Yog) का अद्भुत महासंयोग बन रहा है। इन योगों में पूजा और शस्त्र पूजन करने से

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी अथवा दशहरा (Dussehra 2025) का पर्व मनाया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी। इस वर्ष 2 अक्टूबर 2025 को दशहरा पर्व विशेष योगों के संयोग में मनाया जाएगा। इस वर्ष का विशेष संयोग ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार दशहरा पर रवि योग (Ravi Yog) और सुकर्मा योग (Sukarma Yog) का अद्भुत महासंयोग बन रहा है। इन योगों में पूजा और शस्त्र पूजन करने से

नवरात्र के पावन अवसर पर Siwan जिला एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है। यहाँ की एक सामाजिक संस्था से जुड़े लगभग 40 युवा प्रतिदिन रात 2 बजे से उठकर शहर के प्रमुख मंदिरों में Cleanliness Drive चला रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि भक्तों को भीड़ और चहल-पहल के बीच भी Clean & Peaceful Environment में देवी मां के दर्शन का अवसर मिले। यह सेवा पिछले पाँच वर्षों से लगातार जारी है और अब यह परंपरा का स्वरूप ले चुकी है। युवा टोली नवरात्र के पूरे दस दिनों तक Budhiya Mai Mandir, Kachahari Durga Mandir और Kali Mai Mandir

नवरात्र के पावन अवसर पर Siwan जिला एक अनोखी मिसाल पेश कर रहा है। यहाँ की एक सामाजिक संस्था से जुड़े लगभग 40 युवा प्रतिदिन रात 2 बजे से उठकर शहर के प्रमुख मंदिरों में Cleanliness Drive चला रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि भक्तों को भीड़ और चहल-पहल के बीच भी Clean & Peaceful Environment में देवी मां के दर्शन का अवसर मिले। यह सेवा पिछले पाँच वर्षों से लगातार जारी है और अब यह परंपरा का स्वरूप ले चुकी है। युवा टोली नवरात्र के पूरे दस दिनों तक Budhiya Mai Mandir, Kachahari Durga Mandir और Kali Mai Mandir

मां कूष्मांडा का महत्व (Significance of Maa Kushmanda): Shardiya Navratri 2025 के चौथे दिन (Navratri Day 4) मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि अपने अद्भुत तेज और मुस्कान से मां ने सृष्टि की रचना की थी। इसीलिए उन्हें “आदि स्वरूप” और सृष्टि की जननी माना जाता है। मां कूष्मांडा की आराधना से साधक के जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। मां कूष्मांडा सिंह पर सवार रहती हैं और उनके आठ हाथ होते हैं, जिनमें कमल, गदा, धनुष, बाण, अमृत कलश, चक्र और जपमाला जैसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते

मां कूष्मांडा का महत्व (Significance of Maa Kushmanda): Shardiya Navratri 2025 के चौथे दिन (Navratri Day 4) मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि अपने अद्भुत तेज और मुस्कान से मां ने सृष्टि की रचना की थी। इसीलिए उन्हें “आदि स्वरूप” और सृष्टि की जननी माना जाता है। मां कूष्मांडा की आराधना से साधक के जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। मां कूष्मांडा सिंह पर सवार रहती हैं और उनके आठ हाथ होते हैं, जिनमें कमल, गदा, धनुष, बाण, अमृत कलश, चक्र और जपमाला जैसे दिव्य अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते

Shardiya Navratri 2025 Day 3: के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा शांति, साहस और वीरता की देवी मानी जाती हैं। उनके माथे पर अर्धचंद्र के आकार की घंटा जैसी आकृति होती है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनकी आराधना से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में साहस तथा धैर्य की प्राप्ति होती है। मां चंद्रघंटा का महत्व (Significance of Maa Chandraghanta): Shardiya Navratri 2025 Day 3: मां चंद्रघंटा के स्वरूप में देवी सिंह पर सवार रहती हैं और उनके दस हाथों में

Shardiya Navratri 2025 Day 3: के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा शांति, साहस और वीरता की देवी मानी जाती हैं। उनके माथे पर अर्धचंद्र के आकार की घंटा जैसी आकृति होती है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनकी आराधना से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में साहस तथा धैर्य की प्राप्ति होती है। मां चंद्रघंटा का महत्व (Significance of Maa Chandraghanta): Shardiya Navratri 2025 Day 3: मां चंद्रघंटा के स्वरूप में देवी सिंह पर सवार रहती हैं और उनके दस हाथों में

Shardiya Navratri 2025 Day 2 में भक्तों का ध्यान मां दुर्गा के दूसरे रूप मां ब्रह्मचारिणी पर केंद्रित रहता है। मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान, संयम और तपस्या की देवी मानी जाती हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा करने से भक्तों को मानसिक स्थिरता, आत्म-संयम और ज्ञान की प्राप्ति होती है। मां ब्रह्मचारिणी का महत्व (Significance of Maa Brahmacharini):मां ब्रह्मचारिणी का अर्थ है “जो ब्रह्म की साधना में लीन रहती हैं।” उनके स्वरूप में उन्होंने कठोर तपस्या और योग साधना के माध्यम से जीवन में अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक शक्ति की शिक्षा दी। उनके आशीर्वाद से जीवन में धैर्य और मानसिक

Shardiya Navratri 2025 Day 2 में भक्तों का ध्यान मां दुर्गा के दूसरे रूप मां ब्रह्मचारिणी पर केंद्रित रहता है। मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान, संयम और तपस्या की देवी मानी जाती हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा करने से भक्तों को मानसिक स्थिरता, आत्म-संयम और ज्ञान की प्राप्ति होती है। मां ब्रह्मचारिणी का महत्व (Significance of Maa Brahmacharini):मां ब्रह्मचारिणी का अर्थ है “जो ब्रह्म की साधना में लीन रहती हैं।” उनके स्वरूप में उन्होंने कठोर तपस्या और योग साधना के माध्यम से जीवन में अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक शक्ति की शिक्षा दी। उनके आशीर्वाद से जीवन में धैर्य और मानसिक

आज से शुरू हो चुका है Shardiya Navratri 2025, और मां दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन भक्त माँ शैलपुत्री की आराधना कर उन्हें रोली, अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करते हैं। माँ शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। Shardiya Navratri 2025, Day1, Maa Shailputri Vidhi: मां शैलपुत्री की पूजा का प्रारंभ कलश स्थापना से किया जाता है। कलश में जल, घी, चावल और सिक्के रखकर उसकी स्थापना कर देवी की शक्ति

आज से शुरू हो चुका है Shardiya Navratri 2025, और मां दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र के पहले दिन भक्त माँ शैलपुत्री की आराधना कर उन्हें रोली, अक्षत, सिंदूर, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करते हैं। माँ शैलपुत्री को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन सफेद वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। Shardiya Navratri 2025, Day1, Maa Shailputri Vidhi: मां शैलपुत्री की पूजा का प्रारंभ कलश स्थापना से किया जाता है। कलश में जल, घी, चावल और सिक्के रखकर उसकी स्थापना कर देवी की शक्ति

Navratri 2025: Celebrating the Nine Colours of Navratri and Their Divine Symbolism भारत में त्योहारों का मौसम जैसे ही शुरू होता है, पूरे देश का माहौल बदल जाता है। रोशनी, सजावट, संगीत और उत्सव की धूम-धाम के बीच Navratri 2025 का अपना अलग ही महत्व है। नवरात्रि सिर्फ व्रत और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह देवी शक्ति की नौ रूपों की आराधना का समय है। इन नौ दिनों में हर दिन को एक विशेष रंग से जोड़ा जाता है। ये रंग सिर्फ परिधान या सजावट का हिस्सा नहीं होते, बल्कि जीवन के गहरे संदेश और आध्यात्मिक अर्थ भी

Navratri 2025: Celebrating the Nine Colours of Navratri and Their Divine Symbolism भारत में त्योहारों का मौसम जैसे ही शुरू होता है, पूरे देश का माहौल बदल जाता है। रोशनी, सजावट, संगीत और उत्सव की धूम-धाम के बीच Navratri 2025 का अपना अलग ही महत्व है। नवरात्रि सिर्फ व्रत और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह देवी शक्ति की नौ रूपों की आराधना का समय है। इन नौ दिनों में हर दिन को एक विशेष रंग से जोड़ा जाता है। ये रंग सिर्फ परिधान या सजावट का हिस्सा नहीं होते, बल्कि जीवन के गहरे संदेश और आध्यात्मिक अर्थ भी

बिहार सरकार ने इस साल होने वाले Durga Puja 2025 के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर कमर कस ली है। मुख्यमंत्री सचिवालय विभाग के अंतर्गत मुख्य सचिव Pratyaya Amrit की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य के सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों, डीआईजी, आईजी, प्रमंडलीय आयुक्तों एवं रेलवे एसपी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था – त्योहार के दौरान law and order को सख्ती से बनाए रखना, भीड़ प्रबंधन करना और किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक तनाव को रोकना। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि

बिहार सरकार ने इस साल होने वाले Durga Puja 2025 के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर कमर कस ली है। मुख्यमंत्री सचिवालय विभाग के अंतर्गत मुख्य सचिव Pratyaya Amrit की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य के सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों, डीआईजी, आईजी, प्रमंडलीय आयुक्तों एवं रेलवे एसपी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था – त्योहार के दौरान law and order को सख्ती से बनाए रखना, भीड़ प्रबंधन करना और किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक तनाव को रोकना। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि