
महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले की एक साधारण छात्रा ने अपने असाधारण हौसले और मेहनत से पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है। हाल ही में संपन्न हुए एशियन पैरा गेम्स में गडचिरोली के कढोली गांव की बेटी कुमारी श्वेता भास्कर कोवे ने व्यक्तिगत प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक और टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया है। श्वेता महात्मा ज्योतिबा फुले कला महाविद्यालय, आष्टी की छात्रा हैं जो वन वैभव शिक्षण मंडल, अहेरी द्वारा संचालित है। दिव्यांगता को बनाया अपनी पहचान श्वेता की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। जिस दिव्यांगता को अक्सर लोग कमजोरी समझते

महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले की एक साधारण छात्रा ने अपने असाधारण हौसले और मेहनत से पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है। हाल ही में संपन्न हुए एशियन पैरा गेम्स में गडचिरोली के कढोली गांव की बेटी कुमारी श्वेता भास्कर कोवे ने व्यक्तिगत प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक और टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया है। श्वेता महात्मा ज्योतिबा फुले कला महाविद्यालय, आष्टी की छात्रा हैं जो वन वैभव शिक्षण मंडल, अहेरी द्वारा संचालित है। दिव्यांगता को बनाया अपनी पहचान श्वेता की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। जिस दिव्यांगता को अक्सर लोग कमजोरी समझते

माओवादी आंदोलन से शांति की दिशा में एक बड़ा कदम महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से एक ऐतिहासिक समाचार सामने आया है, जिसने माओवादी आंदोलन के परिदृश्य को झकझोर दिया है। वर्षों से जंगलों में सक्रिय माओवादी शीर्ष नेता भूपति उर्फ सोनू ने अपने 60 साथियों सहित आत्मसमर्पण कर भारतीय संविधान के प्रति आस्था प्रकट की है। यह कदम न केवल गढ़चिरौली जिले के लिए बल्कि समूचे विदर्भ क्षेत्र और देश के नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए एक नई दिशा का संकेत है। भूपति का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक बन गया है कि अब माओवादी आंदोलन के भीतर भी परिवर्तन

माओवादी आंदोलन से शांति की दिशा में एक बड़ा कदम महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से एक ऐतिहासिक समाचार सामने आया है, जिसने माओवादी आंदोलन के परिदृश्य को झकझोर दिया है। वर्षों से जंगलों में सक्रिय माओवादी शीर्ष नेता भूपति उर्फ सोनू ने अपने 60 साथियों सहित आत्मसमर्पण कर भारतीय संविधान के प्रति आस्था प्रकट की है। यह कदम न केवल गढ़चिरौली जिले के लिए बल्कि समूचे विदर्भ क्षेत्र और देश के नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए एक नई दिशा का संकेत है। भूपति का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक बन गया है कि अब माओवादी आंदोलन के भीतर भी परिवर्तन

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को खेलों के क्षेत्र में सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “Viksit Maharashtra 2047 – युवा व खेल संवाद” अभियान की शुरुआत नागपुर से की है। इस पहल का मकसद है कि आने वाले वर्षों में राज्य की Maharashtra Sports Policy 2047 को अधिक समावेशी, व्यावहारिक और खिलाड़ियों की ज़रूरतों के अनुसार तैयार किया जा सके। खिलाड़ियों की प्रमुख मांगें और Sports Policy 2047 से जोड़ाव नागपुर में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में गडचिरोली, चंद्रपुर, भंडारा, गोंदिया, वर्धा और नागपुर जिलों के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, संघटकों, पंचों, दिव्यांग खिलाड़ियों और विभिन्न खेल संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को खेलों के क्षेत्र में सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “Viksit Maharashtra 2047 – युवा व खेल संवाद” अभियान की शुरुआत नागपुर से की है। इस पहल का मकसद है कि आने वाले वर्षों में राज्य की Maharashtra Sports Policy 2047 को अधिक समावेशी, व्यावहारिक और खिलाड़ियों की ज़रूरतों के अनुसार तैयार किया जा सके। खिलाड़ियों की प्रमुख मांगें और Sports Policy 2047 से जोड़ाव नागपुर में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में गडचिरोली, चंद्रपुर, भंडारा, गोंदिया, वर्धा और नागपुर जिलों के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, संघटकों, पंचों, दिव्यांग खिलाड़ियों और विभिन्न खेल संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल