
महाराष्ट्र के नांदेड शहर में इन दिनों एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जो हर किसी का दिल छू रहा है। श्री गुरु तेग बहादुर साहिबजी की 350वीं शहीदी के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिंद-दी-चादर’ कार्यक्रम में लंगर सेवा के माध्यम से मानवता, समानता और भाईचारे का जीवंत संदेश पूरे देश को मिल रहा है। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उस महान परंपरा की झलक है जो हमें सिखाती है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। लंगर सेवा – महज भोजन नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन जब आप नांदेड के इस विशाल कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते हैं,

महाराष्ट्र के नांदेड शहर में इन दिनों एक ऐसा दृश्य देखने को मिल रहा है, जो हर किसी का दिल छू रहा है। श्री गुरु तेग बहादुर साहिबजी की 350वीं शहीदी के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिंद-दी-चादर’ कार्यक्रम में लंगर सेवा के माध्यम से मानवता, समानता और भाईचारे का जीवंत संदेश पूरे देश को मिल रहा है। यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उस महान परंपरा की झलक है जो हमें सिखाती है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। लंगर सेवा – महज भोजन नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन जब आप नांदेड के इस विशाल कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते हैं,

जब नागपुर ने देखा इतिहास और आस्था का संगम नागपुर की धरती पर कुछ ऐसा हुआ जो इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक एकता का अनूठा उदाहरण बन गया। महाराष्ट्र सरकार द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में गुरु तेग बहादुर साहिब के बलिदान और उनके जीवन दर्शन को याद किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत लाखों लोगों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। यह केवल एक धार्मिक समारोह नहीं था, बल्कि उस गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प था जो भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान की कहानी कहता है। मुख्यमंत्री

जब नागपुर ने देखा इतिहास और आस्था का संगम नागपुर की धरती पर कुछ ऐसा हुआ जो इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक एकता का अनूठा उदाहरण बन गया। महाराष्ट्र सरकार द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में गुरु तेग बहादुर साहिब के बलिदान और उनके जीवन दर्शन को याद किया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत लाखों लोगों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया। यह केवल एक धार्मिक समारोह नहीं था, बल्कि उस गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प था जो भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान की कहानी कहता है। मुख्यमंत्री

श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की 350वीं जयंती का महत्त्व 7 दिसंबर, 2025 को नागपुर में श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 350वें शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक भव्य विदर्भस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक अवसर केवल धार्मिक या सांस्कृतिक महत्व का नहीं है, अपितु समाज में उनके जीवन मूल्यों और शिक्षाओं को स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम भी है। गुरु तेग बहादुर जी ने अपने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया, वह आज भी सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आयोजन का उद्देश्य और

श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की 350वीं जयंती का महत्त्व 7 दिसंबर, 2025 को नागपुर में श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 350वें शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक भव्य विदर्भस्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक अवसर केवल धार्मिक या सांस्कृतिक महत्व का नहीं है, अपितु समाज में उनके जीवन मूल्यों और शिक्षाओं को स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम भी है। गुरु तेग बहादुर जी ने अपने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया, वह आज भी सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आयोजन का उद्देश्य और