
डिजिटल भारत की असली नायकों को अब मिल गई कानूनी पहचान भारत की तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था में जो लोग सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं, उनकी बात कम ही सुनी जाती है। मतलब उन हजारों लड़कों और लड़कियों की कहानी जो ऐप खोलते हैं और दिनभर काम करते हैं – डिलीवरी से शुरु करके राइड शेयरिंग तक। पिछले कुछ सालों में ये गिग वर्कर्स भारत की डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन गए हैं। लेकिन इन्हें कानूनी सुरक्षा नहीं थी। उन्हें न तो पेंशन मिलती थी, न ही स्वास्थ्य बीमा। बीमारी हो या दुर्घटना, सब कुछ खुद संभालना पड़ता

डिजिटल भारत की असली नायकों को अब मिल गई कानूनी पहचान भारत की तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था में जो लोग सबसे ज्यादा काम कर रहे हैं, उनकी बात कम ही सुनी जाती है। मतलब उन हजारों लड़कों और लड़कियों की कहानी जो ऐप खोलते हैं और दिनभर काम करते हैं – डिलीवरी से शुरु करके राइड शेयरिंग तक। पिछले कुछ सालों में ये गिग वर्कर्स भारत की डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन गए हैं। लेकिन इन्हें कानूनी सुरक्षा नहीं थी। उन्हें न तो पेंशन मिलती थी, न ही स्वास्थ्य बीमा। बीमारी हो या दुर्घटना, सब कुछ खुद संभालना पड़ता

वार्षिक निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण का नए श्रम संहिताओं में समावेश भारत में श्रम कानूनों के इतिहास में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताओं ने 29 पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत ढांचे में समाहित कर दिया है। इन संहिताओं में सबसे महत्वपूर्ण सुधार कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े प्रावधान हैं। अब 40 वर्ष से अधिक आयु वाले प्रत्येक कर्मचारी को वार्षिक निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण प्राप्त करना कानूनी अधिकार बन गया है। यह प्रावधान ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता (ओएसएच कोड)’ के अंतर्गत लागू किया गया है। आज जब भारत गैर-संचारी रोगों (जैसे मधुमेह,

वार्षिक निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण का नए श्रम संहिताओं में समावेश भारत में श्रम कानूनों के इतिहास में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताओं ने 29 पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत ढांचे में समाहित कर दिया है। इन संहिताओं में सबसे महत्वपूर्ण सुधार कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े प्रावधान हैं। अब 40 वर्ष से अधिक आयु वाले प्रत्येक कर्मचारी को वार्षिक निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण प्राप्त करना कानूनी अधिकार बन गया है। यह प्रावधान ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता (ओएसएच कोड)’ के अंतर्गत लागू किया गया है। आज जब भारत गैर-संचारी रोगों (जैसे मधुमेह,