
नई दिल्ली। देशभर में दीपों का त्योहार दीवाली 2025 धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस वर्ष यह पर्व कार्तिक अमावस्या तिथि पर पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीवाली की रात या संध्या काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से साधक के सुख, सौभाग्य और समृद्धि में वृद्धि होती है। विशेष रूप से पूजा के समय प्रदोष और निशिता काल को अत्यंत शुभ माना गया है। इस अवसर पर अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जप करने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और साधक को सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।

नई दिल्ली। देशभर में दीपों का त्योहार दीवाली 2025 धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस वर्ष यह पर्व कार्तिक अमावस्या तिथि पर पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीवाली की रात या संध्या काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने से साधक के सुख, सौभाग्य और समृद्धि में वृद्धि होती है। विशेष रूप से पूजा के समय प्रदोष और निशिता काल को अत्यंत शुभ माना गया है। इस अवसर पर अपनी राशि के अनुसार मंत्रों का जप करने से देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और साधक को सभी सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है।

दिवाली 2025: लक्ष्मी-गणेश पूजन का महत्व दिवाली हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय और असत्य पर सत्य के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इस कारण आज भी कार्तिक अमावस्या की रात को ही लक्ष्मी पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लक्ष्मी-गणेश पूजन के शुभ मुहूर्त इस वर्ष 20 अक्तूबर 2025 को कार्तिक अमावस्या तिथि शाम 3:44 बजे से शुरू होकर 21 अक्तूबर को शाम 5:54 बजे समाप्त होगी। इसलिए मुख्य दीपावली इस बार 20 अक्तूबर, सोमवार को ही

दिवाली 2025: लक्ष्मी-गणेश पूजन का महत्व दिवाली हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय और असत्य पर सत्य के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इस कारण आज भी कार्तिक अमावस्या की रात को ही लक्ष्मी पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लक्ष्मी-गणेश पूजन के शुभ मुहूर्त इस वर्ष 20 अक्तूबर 2025 को कार्तिक अमावस्या तिथि शाम 3:44 बजे से शुरू होकर 21 अक्तूबर को शाम 5:54 बजे समाप्त होगी। इसलिए मुख्य दीपावली इस बार 20 अक्तूबर, सोमवार को ही