
नागपुर जिले में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर 30 जनवरी से 13 फरवरी 2026 तक स्पर्श कुष्ठरोग जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठरोग निवारण दिवस मनाने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है। इस पखवाड़े के दौरान जिले भर में स्वास्थ्य साक्षरता से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रविण माहिरे ने इस अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में सहायक संचालक कुष्ठरोग डॉ. विजय डोइफोडे समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने

नागपुर जिले में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर 30 जनवरी से 13 फरवरी 2026 तक स्पर्श कुष्ठरोग जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठरोग निवारण दिवस मनाने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है। इस पखवाड़े के दौरान जिले भर में स्वास्थ्य साक्षरता से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रविण माहिरे ने इस अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में सहायक संचालक कुष्ठरोग डॉ. विजय डोइफोडे समेत स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने

जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने खुद को बहुत बड़ा गांधी भक्त दिखाने की कोशिश की थी। इसका कारण यह था कि महात्मा गांधी गुजराती थे और गुजरात में उनके भक्तों की संख्या नरेंद्र मोदी के भक्तों से भी ज्यादा है। हालांकि नरेंद्र मोदी की गांधी भक्ति केवल स्वच्छ भारत मिशन में महात्मा गांधी के चश्मे की तस्वीर इस्तेमाल करने तक ही सीमित रही। लेकिन आरएसएस का DNA कहां जाएगा? नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे ने 1994 में एक साक्षात्कार में आरएसएस नेतृत्व के इस लगातार प्रचार का विरोध किया था कि नाथूराम गोडसे आरएसएस से नहीं

जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने खुद को बहुत बड़ा गांधी भक्त दिखाने की कोशिश की थी। इसका कारण यह था कि महात्मा गांधी गुजराती थे और गुजरात में उनके भक्तों की संख्या नरेंद्र मोदी के भक्तों से भी ज्यादा है। हालांकि नरेंद्र मोदी की गांधी भक्ति केवल स्वच्छ भारत मिशन में महात्मा गांधी के चश्मे की तस्वीर इस्तेमाल करने तक ही सीमित रही। लेकिन आरएसएस का DNA कहां जाएगा? नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे ने 1994 में एक साक्षात्कार में आरएसएस नेतृत्व के इस लगातार प्रचार का विरोध किया था कि नाथूराम गोडसे आरएसएस से नहीं

नागपुर में गांधी प्रतिमा का दूध अभिषेक नागपुर – राष्ट्र पिता महात्मा गांधी की २ अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर नागपुर शहर कांग्रेस कमेटी अलसंख्यक विभाग ने सी.ए रोड चितारओली में गांधी जी की प्रतिमा का दूध अभिषेक किया। यह आयोजन पूर्व संध्या पर हुआ। कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष वसीम ख़ान के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिमा पर फूलों की माला चढ़ाई गई और श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस साल भी गांधी जयंती मनाई जाती है, परंतु नागपुर महानगर पालिका द्वारा सफाई अभियान के बावजूद प्रतिमा पर धूल और गंदगी

नागपुर में गांधी प्रतिमा का दूध अभिषेक नागपुर – राष्ट्र पिता महात्मा गांधी की २ अक्टूबर गांधी जयंती के अवसर पर नागपुर शहर कांग्रेस कमेटी अलसंख्यक विभाग ने सी.ए रोड चितारओली में गांधी जी की प्रतिमा का दूध अभिषेक किया। यह आयोजन पूर्व संध्या पर हुआ। कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष वसीम ख़ान के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिमा पर फूलों की माला चढ़ाई गई और श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस साल भी गांधी जयंती मनाई जाती है, परंतु नागपुर महानगर पालिका द्वारा सफाई अभियान के बावजूद प्रतिमा पर धूल और गंदगी

2 अक्टूबर को पूरी दुनिया महात्मा गांधी की जयंती के रूप में और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाती है। यह दिन केवल भारत के लिए गर्व का प्रतीक नहीं है, बल्कि गांधीजी के अहिंसा और सत्य के संदेश का वैश्विक सम्मान भी दर्शाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जून 2007 में एक प्रस्ताव अपनाया था, जिसमें अहिंसा को एक सार्वभौमिक सिद्धांत के रूप में मान्यता दी गई और वैश्विक शांति और सहिष्णुता की संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कही गई। इस दिन को दुनिया के विभिन्न देशों में श्रद्धांजलि स्वरूप मनाया जाता है,

2 अक्टूबर को पूरी दुनिया महात्मा गांधी की जयंती के रूप में और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाती है। यह दिन केवल भारत के लिए गर्व का प्रतीक नहीं है, बल्कि गांधीजी के अहिंसा और सत्य के संदेश का वैश्विक सम्मान भी दर्शाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जून 2007 में एक प्रस्ताव अपनाया था, जिसमें अहिंसा को एक सार्वभौमिक सिद्धांत के रूप में मान्यता दी गई और वैश्विक शांति और सहिष्णुता की संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कही गई। इस दिन को दुनिया के विभिन्न देशों में श्रद्धांजलि स्वरूप मनाया जाता है,