
वार्षिक निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण का नए श्रम संहिताओं में समावेश भारत में श्रम कानूनों के इतिहास में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताओं ने 29 पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत ढांचे में समाहित कर दिया है। इन संहिताओं में सबसे महत्वपूर्ण सुधार कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े प्रावधान हैं। अब 40 वर्ष से अधिक आयु वाले प्रत्येक कर्मचारी को वार्षिक निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण प्राप्त करना कानूनी अधिकार बन गया है। यह प्रावधान ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता (ओएसएच कोड)’ के अंतर्गत लागू किया गया है। आज जब भारत गैर-संचारी रोगों (जैसे मधुमेह,

वार्षिक निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण का नए श्रम संहिताओं में समावेश भारत में श्रम कानूनों के इतिहास में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताओं ने 29 पुराने श्रम कानूनों को एकीकृत ढांचे में समाहित कर दिया है। इन संहिताओं में सबसे महत्वपूर्ण सुधार कर्मचारियों के स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े प्रावधान हैं। अब 40 वर्ष से अधिक आयु वाले प्रत्येक कर्मचारी को वार्षिक निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण प्राप्त करना कानूनी अधिकार बन गया है। यह प्रावधान ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियाँ संहिता (ओएसएच कोड)’ के अंतर्गत लागू किया गया है। आज जब भारत गैर-संचारी रोगों (जैसे मधुमेह,

भारत की नई श्रम संहिताएँ: राष्ट्रव्यापी श्रम सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम श्रम कानूनों के सम्मिलन की आवश्यकता भारत में कार्यस्थल से जुड़े कानून दशकों से विभिन्न अधिनियमों में बिखरे हुए थे। इससे न केवल व्यवसायिक प्रक्रियाएँ जटिल होती थीं, बल्कि श्रमिकों को भी अपने अधिकारों तक पहुँचने में कठिनाई होती थी। केंद्र सरकार ने इस समस्या को दूर करने हेतु 29 पुराने श्रम कानूनों को समेकित कर चार नई संहिताएँ लागू की हैं: वेतन संहिता (2019) औद्योगिक संबंध संहिता (2020) सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ संहिता (2020) इन चारों संहिताओं का उद्देश्य स्पष्ट

भारत की नई श्रम संहिताएँ: राष्ट्रव्यापी श्रम सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम श्रम कानूनों के सम्मिलन की आवश्यकता भारत में कार्यस्थल से जुड़े कानून दशकों से विभिन्न अधिनियमों में बिखरे हुए थे। इससे न केवल व्यवसायिक प्रक्रियाएँ जटिल होती थीं, बल्कि श्रमिकों को भी अपने अधिकारों तक पहुँचने में कठिनाई होती थी। केंद्र सरकार ने इस समस्या को दूर करने हेतु 29 पुराने श्रम कानूनों को समेकित कर चार नई संहिताएँ लागू की हैं: वेतन संहिता (2019) औद्योगिक संबंध संहिता (2020) सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ संहिता (2020) इन चारों संहिताओं का उद्देश्य स्पष्ट