
Nautapa 2026: मई की तपती दोपहर, गर्म हवा और सिर पर आग उगलता सूरज, अब लोगों को ऐसी ही गर्मी के लिए तैयार रहना होगा। दरअसल कुछ ही दिनों में नौतपा शुरू होने जा रहा है, जिसे हर साल गर्मी का सबसे कठिन और सबसे तपता दौर माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र से लेकर मौसम विज्ञान तक, दोनों ही इस समय को बेहद खास मानते हैं। 25 मई से शुरू हो रहा नौतपा साल 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। मान्यता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तभी नौतपा की

Nautapa 2026: मई की तपती दोपहर, गर्म हवा और सिर पर आग उगलता सूरज, अब लोगों को ऐसी ही गर्मी के लिए तैयार रहना होगा। दरअसल कुछ ही दिनों में नौतपा शुरू होने जा रहा है, जिसे हर साल गर्मी का सबसे कठिन और सबसे तपता दौर माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र से लेकर मौसम विज्ञान तक, दोनों ही इस समय को बेहद खास मानते हैं। 25 मई से शुरू हो रहा नौतपा साल 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। मान्यता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तभी नौतपा की

शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव और 2026 की ज्योतिषीय स्थिति शनि का 2026 में राशि परिवर्तन न होना वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह लगभग ढाई वर्ष के अंतराल पर राशि परिवर्तन करते हैं। वर्तमान ग्रहस्थिति के आधार पर वर्ष 2026 में शनि कोई राशि परिवर्तन नहीं करेंगे। उनका अगला गोचर 2027 में निर्धारित है। इसी कारण 2026 के पूरे वर्ष तीन राशियों—मेष, कुंभ और मीन—पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव यथावत बना रहेगा। यह स्थिति उन जातकों के लिए विशेष महत्व रखती है जिनकी जन्मकुंडली में शनि से संबंधित दोष, दशा या अंतरदशा सक्रिय है। किन राशियों पर

शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव और 2026 की ज्योतिषीय स्थिति शनि का 2026 में राशि परिवर्तन न होना वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह लगभग ढाई वर्ष के अंतराल पर राशि परिवर्तन करते हैं। वर्तमान ग्रहस्थिति के आधार पर वर्ष 2026 में शनि कोई राशि परिवर्तन नहीं करेंगे। उनका अगला गोचर 2027 में निर्धारित है। इसी कारण 2026 के पूरे वर्ष तीन राशियों—मेष, कुंभ और मीन—पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव यथावत बना रहेगा। यह स्थिति उन जातकों के लिए विशेष महत्व रखती है जिनकी जन्मकुंडली में शनि से संबंधित दोष, दशा या अंतरदशा सक्रिय है। किन राशियों पर

Maa Durga Chalisa Lyrics in Hindi: नवरात्रि में 9 दिनों तक मां दुर्गा पूरे भक्ति भावना से पूजा-अर्चना की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सप्तमी तिथि को कालरात्रि, अष्टमी को महागौरी, नवमी तिथि को सिद्धिदातृ रूप की पूजा होती है। Maa Durga Chalisa प्रतिदिन अवश्य पढ़ें नवरात्रि की पूजा में रोजाना दुर्गा चालीसा (Sri Durga Chalisa) का पाठ करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान अगर सभी 9 दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करें, तो

Maa Durga Chalisa Lyrics in Hindi: नवरात्रि में 9 दिनों तक मां दुर्गा पूरे भक्ति भावना से पूजा-अर्चना की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सप्तमी तिथि को कालरात्रि, अष्टमी को महागौरी, नवमी तिथि को सिद्धिदातृ रूप की पूजा होती है। Maa Durga Chalisa प्रतिदिन अवश्य पढ़ें नवरात्रि की पूजा में रोजाना दुर्गा चालीसा (Sri Durga Chalisa) का पाठ करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान अगर सभी 9 दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करें, तो

Durga Kavach sanskrit Hindi: दुर्गा कवच का पाठ करने वाले को आरोग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। उसकी सारी सिद्धियां पूरी होती हैं। देवी कवच (Durga Kavach) हिंदू धर्म का शक्तिशाली सुरक्षात्मक मंत्र है। इसमें जगत की सृष्टि करने वाले भगवान ब्रह्मा ने ऋषि मार्कंडेय को महाशक्ति (देवी दुर्गा) के 9 रूपों की स्तुति और उसका महत्व बताया है। इसका पाठ (Durga Kavach in Hindi) करने वाले को देवी मां नकारात्मक शक्तियों से बचाती हैं। उसे आरोग्य, ऐश्वर्य और सिद्धि प्रदान करती हैं। यह कवच (Durga Kavach) पाठ करने वाले श्रद्धालु के शरीर के चारों ओर एक सुरक्षात्मक आवरण

Durga Kavach sanskrit Hindi: दुर्गा कवच का पाठ करने वाले को आरोग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। उसकी सारी सिद्धियां पूरी होती हैं। देवी कवच (Durga Kavach) हिंदू धर्म का शक्तिशाली सुरक्षात्मक मंत्र है। इसमें जगत की सृष्टि करने वाले भगवान ब्रह्मा ने ऋषि मार्कंडेय को महाशक्ति (देवी दुर्गा) के 9 रूपों की स्तुति और उसका महत्व बताया है। इसका पाठ (Durga Kavach in Hindi) करने वाले को देवी मां नकारात्मक शक्तियों से बचाती हैं। उसे आरोग्य, ऐश्वर्य और सिद्धि प्रदान करती हैं। यह कवच (Durga Kavach) पाठ करने वाले श्रद्धालु के शरीर के चारों ओर एक सुरक्षात्मक आवरण