
26 जनवरी 2026 को देश के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में दिया गया। शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। वे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय शुभांशु शुक्ला ने पिछले साल जून महीने में इतिहास रच दिया जब

26 जनवरी 2026 को देश के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में दिया गया। शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। वे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय शुभांशु शुक्ला ने पिछले साल जून महीने में इतिहास रच दिया जब

देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस बड़े ही धूमधाम से मना रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के कर्तव्य पथ से देश को इस खास मौके पर नेतृत्व प्रदान किया। यह दिन हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक है, जब हमारा संविधान लागू हुआ था और भारत एक गणतंत्र राष्ट्र बना था। समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की यात्रा से हुई। प्रधानमंत्री ने वहां देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पुष्पांजलि देकर उनके बलिदान को याद किया। यह परंपरा हर साल निभाई जाती है ताकि हम उन

देश आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस बड़े ही धूमधाम से मना रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के कर्तव्य पथ से देश को इस खास मौके पर नेतृत्व प्रदान किया। यह दिन हर भारतीय के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक है, जब हमारा संविधान लागू हुआ था और भारत एक गणतंत्र राष्ट्र बना था। समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की यात्रा से हुई। प्रधानमंत्री ने वहां देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पुष्पांजलि देकर उनके बलिदान को याद किया। यह परंपरा हर साल निभाई जाती है ताकि हम उन

नई दिल्ली: देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दिन देश को एक जीवंत गणराज्य के रूप में मनाने का अवसर है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के शाश्वत आदर्शों पर स्थापित है। उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि 26 जनवरी केवल संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता और सोच को श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को याद करने का भी दिन है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमें लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए

नई दिल्ली: देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दिन देश को एक जीवंत गणराज्य के रूप में मनाने का अवसर है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के शाश्वत आदर्शों पर स्थापित है। उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि 26 जनवरी केवल संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता और सोच को श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को याद करने का भी दिन है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमें लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए

Republic Day 2026: हर साल जब देश 15 अगस्त और 26 जनवरी मनाता है, तो हर भारतीय के मन में गर्व, भावुकता और राष्ट्रप्रेम की लहर दौड़ जाती है। तिरंगा लहराता है, देशभक्ति के गीत गूंजते हैं और पूरा देश एक साथ खड़ा नजर आता है। लेकिन इन दोनों राष्ट्रीय पर्वों में एक ऐसा अंतर है, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले से तिरंगा फहराते हैं, जबकि 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं। यह अंतर सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि भारत के संविधान, सत्ता व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों

Republic Day 2026: हर साल जब देश 15 अगस्त और 26 जनवरी मनाता है, तो हर भारतीय के मन में गर्व, भावुकता और राष्ट्रप्रेम की लहर दौड़ जाती है। तिरंगा लहराता है, देशभक्ति के गीत गूंजते हैं और पूरा देश एक साथ खड़ा नजर आता है। लेकिन इन दोनों राष्ट्रीय पर्वों में एक ऐसा अंतर है, जिस पर अक्सर ध्यान नहीं जाता। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले से तिरंगा फहराते हैं, जबकि 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं। यह अंतर सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि भारत के संविधान, सत्ता व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों

Republic Day 2026: राजधानी दिल्ली में 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। हर साल की तरह इस बार भी कर्तव्य पथ पर देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और विकास की झलक देखने को मिलेगी। गणतंत्र दिवस सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक आत्मा और संविधान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। ऐसे में जो लोग 26 जनवरी को परेड देखने का मन बना रहे हैं, उनके लिए कुछ जरूरी नियम और दिशा-निर्देश जानना बेहद जरूरी है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण प्रशासन ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है, ताकि

Republic Day 2026: राजधानी दिल्ली में 77वें गणतंत्र दिवस की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। हर साल की तरह इस बार भी कर्तव्य पथ पर देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और विकास की झलक देखने को मिलेगी। गणतंत्र दिवस सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक आत्मा और संविधान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। ऐसे में जो लोग 26 जनवरी को परेड देखने का मन बना रहे हैं, उनके लिए कुछ जरूरी नियम और दिशा-निर्देश जानना बेहद जरूरी है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के कारण प्रशासन ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है, ताकि

भारत हर साल 26 जनवरी को अपना गणतंत्र दिवस बड़े गर्व और उत्साह के साथ मनाता है। यह दिन हमारे संविधान के लागू होने का प्रतीक है और लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है। इस साल देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड इस समारोह का मुख्य आकर्षण होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मुख्य परेड से पहले एक फुल ड्रेस रिहर्सल होती है और आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं, वो भी बिल्कुल मुफ्त में। जी हां, सरकार ने आम जनता के लिए

भारत हर साल 26 जनवरी को अपना गणतंत्र दिवस बड़े गर्व और उत्साह के साथ मनाता है। यह दिन हमारे संविधान के लागू होने का प्रतीक है और लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है। इस साल देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड इस समारोह का मुख्य आकर्षण होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मुख्य परेड से पहले एक फुल ड्रेस रिहर्सल होती है और आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं, वो भी बिल्कुल मुफ्त में। जी हां, सरकार ने आम जनता के लिए