
नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी विशेषांक का भव्य विमोचन हुआ। इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त गजानन निमदेव ने संघ के सौ वर्षों के सफर और समाज के प्रति इसके योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज के हर वर्ग तक पहुँचकर राष्ट्रभाव जागृत करने का अनुकरणीय कार्य किया है। रेशीमबाग स्थित स्मृति भवन के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित इस समारोह में विदर्भ प्रांत सहसंघचालक श्रीधर गाडगे, महानगर सहकार्यवाह दिनेश गौर और महानगर प्रचार प्रमुख ब्रजेश मानस सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। विदर्भ हुंकार पत्रिका के इस विशेषांक का नाम ‘समर्पणाचा शतकोत्सव’ रखा गया

नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी विशेषांक का भव्य विमोचन हुआ। इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त गजानन निमदेव ने संघ के सौ वर्षों के सफर और समाज के प्रति इसके योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज के हर वर्ग तक पहुँचकर राष्ट्रभाव जागृत करने का अनुकरणीय कार्य किया है। रेशीमबाग स्थित स्मृति भवन के दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार में आयोजित इस समारोह में विदर्भ प्रांत सहसंघचालक श्रीधर गाडगे, महानगर सहकार्यवाह दिनेश गौर और महानगर प्रचार प्रमुख ब्रजेश मानस सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। विदर्भ हुंकार पत्रिका के इस विशेषांक का नाम ‘समर्पणाचा शतकोत्सव’ रखा गया

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष: राष्ट्रनिर्माण की नई चेतना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस वर्ष अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण किए हैं। 2 अक्टूबर 2025, विजयादशमी के पावन अवसर पर संघ ने अपने शताब्दी वर्ष का शुभारंभ किया। यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन, नवसंकल्प और राष्ट्रनिर्माण के प्रति नवीन दृष्टिकोण का भी प्रतीक है। इस दिन से पूरे देश में विविध आयोजनों की शृंखला आरंभ हुई है, जिनका उद्देश्य समाज को एकसूत्र में पिरोकर भारत को विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने का है। समाज को जोड़ने का संकल्प – RSS 100 Years संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष: राष्ट्रनिर्माण की नई चेतना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस वर्ष अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण किए हैं। 2 अक्टूबर 2025, विजयादशमी के पावन अवसर पर संघ ने अपने शताब्दी वर्ष का शुभारंभ किया। यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन, नवसंकल्प और राष्ट्रनिर्माण के प्रति नवीन दृष्टिकोण का भी प्रतीक है। इस दिन से पूरे देश में विविध आयोजनों की शृंखला आरंभ हुई है, जिनका उद्देश्य समाज को एकसूत्र में पिरोकर भारत को विश्वगुरु के रूप में स्थापित करने का है। समाज को जोड़ने का संकल्प – RSS 100 Years संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष पर विशेष आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छिंदवाड़ा महाविद्यालय कार्य विभाग द्वारा आयोजित भव्य और साहसिक साइकिल यात्रा ने सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर उत्साह और जोश का संचार किया। यह यात्रा छिंदवाड़ा से प्रारंभ होकर नागपुर तक विस्तृत थी, जिसमें लगभग 125 किलोमीटर की दूरी तय की गई। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभावना, शारीरिक सुदृढ़ता और सामूहिक अनुशासन की भावना विकसित करना था। यात्रा की शुरुआत और मार्ग मंगलवार, 5 नवम्बर को सुबह 6:30 बजे संघ कार्यालय, छिंदवाड़ा से यह साहसिक यात्रा प्रारंभ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष पर विशेष आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छिंदवाड़ा महाविद्यालय कार्य विभाग द्वारा आयोजित भव्य और साहसिक साइकिल यात्रा ने सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर उत्साह और जोश का संचार किया। यह यात्रा छिंदवाड़ा से प्रारंभ होकर नागपुर तक विस्तृत थी, जिसमें लगभग 125 किलोमीटर की दूरी तय की गई। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभावना, शारीरिक सुदृढ़ता और सामूहिक अनुशासन की भावना विकसित करना था। यात्रा की शुरुआत और मार्ग मंगलवार, 5 नवम्बर को सुबह 6:30 बजे संघ कार्यालय, छिंदवाड़ा से यह साहसिक यात्रा प्रारंभ

अमरावती में विजयादशमी उत्सव पर संघ की विचारधारा अमरावती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंदकुमार ने अमरावती में आयोजित विजयादशमी उत्सव में कहा कि “भारत हिंदू राष्ट्र था, है और रहेगा। यह हमारा दृढ़ विश्वास है।” उन्होंने बताया कि 1925 में संघ की स्थापना बिना किसी कार्यालय या नेता के हुई थी, लेकिन विचारों की निष्ठा और अनुशासन से संघ ने वटवृक्ष के समान विकास किया। संघ की असली शक्ति शाखाओं में निहित है। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रनिर्माण में संघ का योगदान नंदकुमार जी ने कहा कि डॉ. केशव बळीराम हेडगेवार

अमरावती में विजयादशमी उत्सव पर संघ की विचारधारा अमरावती। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे. नंदकुमार ने अमरावती में आयोजित विजयादशमी उत्सव में कहा कि “भारत हिंदू राष्ट्र था, है और रहेगा। यह हमारा दृढ़ विश्वास है।” उन्होंने बताया कि 1925 में संघ की स्थापना बिना किसी कार्यालय या नेता के हुई थी, लेकिन विचारों की निष्ठा और अनुशासन से संघ ने वटवृक्ष के समान विकास किया। संघ की असली शक्ति शाखाओं में निहित है। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रनिर्माण में संघ का योगदान नंदकुमार जी ने कहा कि डॉ. केशव बळीराम हेडगेवार

नई दिल्ली।रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष पर संगठन की गौरवमयी और प्रेरक यात्रा का वर्णन किया। उन्होंने लिखा कि 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा RSS की स्थापना ने भारत में सेवा, त्याग और राष्ट्र निर्माण का एक नया मार्ग प्रशस्त किया। बीते सौ वर्षों में संघ ने न केवल सामाजिक बुनियाद को मजबूत किया बल्कि देश की संप्रभुता की रक्षा, कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण और भारतीय सभ्यता के मूल्यों का संवर्धन भी किया। संघ का समावेशी दृष्टिकोण और जीवन मूल्यों पर बलसरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने

नई दिल्ली।रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष पर संगठन की गौरवमयी और प्रेरक यात्रा का वर्णन किया। उन्होंने लिखा कि 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा RSS की स्थापना ने भारत में सेवा, त्याग और राष्ट्र निर्माण का एक नया मार्ग प्रशस्त किया। बीते सौ वर्षों में संघ ने न केवल सामाजिक बुनियाद को मजबूत किया बल्कि देश की संप्रभुता की रक्षा, कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण और भारतीय सभ्यता के मूल्यों का संवर्धन भी किया। संघ का समावेशी दृष्टिकोण और जीवन मूल्यों पर बलसरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने

नई दिल्ली।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष और संघ की 100 वर्षों की गौरवमयी यात्रा पर विशेष आलेख लिखा है। यह आलेख राष्ट्र साधना, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान को उजागर करता है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि 100 वर्ष पूर्व विजयदशमी के महापर्व पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना एक नई राष्ट्रीय चेतना और समाज सेवा के संकल्प का प्रतीक थी। संघ, हजारों वर्षों से चली आ रही राष्ट्र चेतना की परंपरा का पुनर्स्थापन है। वर्तमान पीढ़ी के स्वयंसेवकों के लिए यह सौभाग्य की बात है कि वे संघ के

नई दिल्ली।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष और संघ की 100 वर्षों की गौरवमयी यात्रा पर विशेष आलेख लिखा है। यह आलेख राष्ट्र साधना, समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में संघ के योगदान को उजागर करता है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि 100 वर्ष पूर्व विजयदशमी के महापर्व पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना एक नई राष्ट्रीय चेतना और समाज सेवा के संकल्प का प्रतीक थी। संघ, हजारों वर्षों से चली आ रही राष्ट्र चेतना की परंपरा का पुनर्स्थापन है। वर्तमान पीढ़ी के स्वयंसेवकों के लिए यह सौभाग्य की बात है कि वे संघ के

नागपुर, 2 अक्तूबर।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष में विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन नागपुर के रेशिमबाग मैदान में किया। इस अवसर पर संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने समाज की एकता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बल देते हुए कहा कि “सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठित स्वरूप ही भारत की एकता, एकात्मता, विकास और सुरक्षा की गारंटी है।” उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दू समाज अलगाव की मानसिकता से मुक्त और सर्वसमावेशक है, जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” की विचारधारा का पुरस्कर्ता है। इसी कारण संघ सम्पूर्ण हिन्दू समाज के संगठन का कार्य कर रहा

नागपुर, 2 अक्तूबर।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष में विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन नागपुर के रेशिमबाग मैदान में किया। इस अवसर पर संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने समाज की एकता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बल देते हुए कहा कि “सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठित स्वरूप ही भारत की एकता, एकात्मता, विकास और सुरक्षा की गारंटी है।” उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दू समाज अलगाव की मानसिकता से मुक्त और सर्वसमावेशक है, जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” की विचारधारा का पुरस्कर्ता है। इसी कारण संघ सम्पूर्ण हिन्दू समाज के संगठन का कार्य कर रहा

नई दिल्ली: विजयदशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100वें स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ की ऐतिहासिक यात्रा, उसके योगदान और राष्ट्रनिर्माण में निभाई गई भूमिका पर अपने विचार साझा किए। पीएम मोदी ने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और राष्ट्र भावना की जीवन्त धारा है, जिसने बीते एक सदी में भारत समाज और संस्कृति को नई दिशा दी है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ और अपने ब्लॉग के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करते हुए लिखा कि 1925 में विजयदशमी के दिन डॉ. हेडगेवार ने जिस उद्देश्य से

नई दिल्ली: विजयदशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100वें स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ की ऐतिहासिक यात्रा, उसके योगदान और राष्ट्रनिर्माण में निभाई गई भूमिका पर अपने विचार साझा किए। पीएम मोदी ने कहा कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और राष्ट्र भावना की जीवन्त धारा है, जिसने बीते एक सदी में भारत समाज और संस्कृति को नई दिशा दी है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ और अपने ब्लॉग के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करते हुए लिखा कि 1925 में विजयदशमी के दिन डॉ. हेडगेवार ने जिस उद्देश्य से

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश की एकता और विविधता पर खतरे की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि “घुसपैठिए” भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव कर रहे हैं, जिससे सामाजिक सामंजस्य और आंतरिक सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा, “अगर इस ताकत को तोड़ा गया, तो भारत कमजोर होगा।” प्रधानमंत्री मोदी यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह के दौरान दे रहे थे। RSS भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक मार्गदर्शक संगठन है। इस भाषण में प्रधानमंत्री ने अपने 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस के भाषण का भी स्मरण कराया, जिसमें उन्होंने ‘जनसांख्यिकीय मिशन’ की

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश की एकता और विविधता पर खतरे की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि “घुसपैठिए” भारत में जनसांख्यिकीय बदलाव कर रहे हैं, जिससे सामाजिक सामंजस्य और आंतरिक सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा, “अगर इस ताकत को तोड़ा गया, तो भारत कमजोर होगा।” प्रधानमंत्री मोदी यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह के दौरान दे रहे थे। RSS भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक मार्गदर्शक संगठन है। इस भाषण में प्रधानमंत्री ने अपने 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस के भाषण का भी स्मरण कराया, जिसमें उन्होंने ‘जनसांख्यिकीय मिशन’ की

Nepal Violence पर बोले Sri Sri Ravi Shankar: युवाओं का frustration और साज़िश की आशंका नागपुर एयरपोर्ट पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar ने एक साथ कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने जहां एक ओर Nepal Violence पर चिंता जताई, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के Vidarbha Farmers Suicide को लेकर गहरी वेदना व्यक्त की। श्री श्री रविशंकर का मानना है कि नेपाल की बढ़ती हिंसा केवल आंतरिक समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई International Conspiracy भी हो सकती है। Explore Trending Stories: Nepal Violence पर बोले Sri Sri Ravi Shankar – Youth

Nepal Violence पर बोले Sri Sri Ravi Shankar: युवाओं का frustration और साज़िश की आशंका नागपुर एयरपोर्ट पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar ने एक साथ कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने जहां एक ओर Nepal Violence पर चिंता जताई, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के Vidarbha Farmers Suicide को लेकर गहरी वेदना व्यक्त की। श्री श्री रविशंकर का मानना है कि नेपाल की बढ़ती हिंसा केवल आंतरिक समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे कोई International Conspiracy भी हो सकती है। Explore Trending Stories: Nepal Violence पर बोले Sri Sri Ravi Shankar – Youth