
Sharjeel Imam: दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम को करीब 6 साल बाद जेल से अस्थायी राहत मिली है। दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें 10 दिनों की अंतरिम जमानत दी है। आज शुक्रवार को जब वह तिहाड़ जेल से बाहर निकले तो उनके चेहरे पर ‘छोटी आजादी’ की खुशी साफ नजर आई। वह मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए और विक्ट्री साइन दिखाते हुए दिखाई दिए। भाई की शादी और बीमार मां के कारण मिली बेल जानकारी के मुताबिक, अदालत ने यह राहत उन्हें पारिवारिक कारणों के चलते दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इमाम को अपने भाई की शादी में

Sharjeel Imam: दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम को करीब 6 साल बाद जेल से अस्थायी राहत मिली है। दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें 10 दिनों की अंतरिम जमानत दी है। आज शुक्रवार को जब वह तिहाड़ जेल से बाहर निकले तो उनके चेहरे पर ‘छोटी आजादी’ की खुशी साफ नजर आई। वह मीडिया के सामने मुस्कुराते हुए और विक्ट्री साइन दिखाते हुए दिखाई दिए। भाई की शादी और बीमार मां के कारण मिली बेल जानकारी के मुताबिक, अदालत ने यह राहत उन्हें पारिवारिक कारणों के चलते दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इमाम को अपने भाई की शादी में

देश की सर्वोच्च अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में अपना फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत दोनों आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। हालांकि, इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत देने का आदेश दिया है।

देश की सर्वोच्च अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में अपना फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत दोनों आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। हालांकि, इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत देने का आदेश दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय में दिल्ली दंगों पर व्यापक बहस उत्तर-पूर्व दिल्ली में वर्ष 2020 में हुए साम्प्रदायिक दंगों ने न केवल राजधानी को बल्कि सम्पूर्ण देश को गहरे स्तर पर झकझोर दिया। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान भड़की हिंसा ने प्रशासनिक तंत्र, राजनीतिक परिवेश तथा सामाजिक सौहार्द को गम्भीर चुनौती दी। इस घटना को लेकर अभी भी न्यायिक प्रक्रिया जारी है और कई अभियुक्तों की जमानत याचिकाएँ सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर दंगों की प्रकृति, उद्देश्य और साजिश को लेकर अपना

सर्वोच्च न्यायालय में दिल्ली दंगों पर व्यापक बहस उत्तर-पूर्व दिल्ली में वर्ष 2020 में हुए साम्प्रदायिक दंगों ने न केवल राजधानी को बल्कि सम्पूर्ण देश को गहरे स्तर पर झकझोर दिया। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान भड़की हिंसा ने प्रशासनिक तंत्र, राजनीतिक परिवेश तथा सामाजिक सौहार्द को गम्भीर चुनौती दी। इस घटना को लेकर अभी भी न्यायिक प्रक्रिया जारी है और कई अभियुक्तों की जमानत याचिकाएँ सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर दंगों की प्रकृति, उद्देश्य और साजिश को लेकर अपना