बारासात में आयोजित एक कार्यक्रम में तिलोत्तमा की माँ ने दिल का दर्द सबके सामने रख दिया। उनकी आवाज में पीड़ा थी, गुस्सा था और न्याय की तड़प थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब उनके पास कुछ चाहने को नहीं बचा है। बस एक ही चाह है – बेटी के लिए इंसाफ। और अगर कानूनी रास्ते से न्याय नहीं मिला तो वे कानून खुद अपने हाथों में लेने को मजबूर हो जाएंगे। यह केवल एक भावनात्मक बयान नहीं था, बल्कि एक पीड़ित परिवार की हताशा और व्यवस्था पर से उठते विश्वास का संकेत था। सीबीआई अधिकारी ने नहीं