राजनीतिक गतिविधियों और धार्मिक आस्था के बीच टकराव का एक नया मामला सामने आया है। एक गांव में 35 साल से चली आ रही मंदिर की नियमित पूजा-अर्चना को बीजेपी की चुनावी रैली के कारण रोक दिया गया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में गुस्सा और निराशा पैदा कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि राजनीतिक कार्यक्रम के नाम पर उनकी धार्मिक भावनाओं की अनदेखी की गई है। घटना का पूरा विवरण स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर पिछले 35 सालों से गांव की आस्था का केंद्र रहा है। यहां रोजाना सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है और विशेष अवसरों पर