
नागपुर शहर की जागृति कॉलोनी में दोपहर के समय एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। करीब 3 बजे अचानक 5 से 6 सांप अलग-अलग दिशाओं में जाते हुए दिखाई दिए। इस घटना से कॉलोनी के लोग घबरा गए और डर का माहौल बन गया। लेकिन समय रहते नागपुर के जाने-माने वाइल्डलाइफ रेस्क्यूअर शुभम जी.आर ने अपनी बहादुरी और अनुभव से 3 सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जंगली जीवों को बचाने के लिए प्रशिक्षित लोगों की कितनी जरूरत होती है। शुभम जी.आर ने न

नागपुर शहर की जागृति कॉलोनी में दोपहर के समय एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। करीब 3 बजे अचानक 5 से 6 सांप अलग-अलग दिशाओं में जाते हुए दिखाई दिए। इस घटना से कॉलोनी के लोग घबरा गए और डर का माहौल बन गया। लेकिन समय रहते नागपुर के जाने-माने वाइल्डलाइफ रेस्क्यूअर शुभम जी.आर ने अपनी बहादुरी और अनुभव से 3 सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जंगली जीवों को बचाने के लिए प्रशिक्षित लोगों की कितनी जरूरत होती है। शुभम जी.आर ने न

Ganga Plastic Pollution: उच्च जैव विविधता वाले क्षेत्र में पैकेजिंग अपशिष्ट सर्वाधिक गंगा नदी के उच्च जैव विविधता वाले क्षेत्रों में Ganga Plastic Pollution लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे जलीय जीवन और पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए हालिया अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि झारखंड के साहिबगंज जिले के लाल बथानी और राधानगर के बीच के 34 किलोमीटर क्षेत्र में पैकेजिंग अपशिष्ट सबसे अधिक पाया गया। यह क्षेत्र गंगा डॉल्फिन और स्मूथ कोटेड ओटर्स जैसी लुप्तप्राय जलीय प्रजातियों का प्रमुख आश्रय स्थल है। Also Read: हिंगोली किसान

Ganga Plastic Pollution: उच्च जैव विविधता वाले क्षेत्र में पैकेजिंग अपशिष्ट सर्वाधिक गंगा नदी के उच्च जैव विविधता वाले क्षेत्रों में Ganga Plastic Pollution लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे जलीय जीवन और पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए हालिया अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि झारखंड के साहिबगंज जिले के लाल बथानी और राधानगर के बीच के 34 किलोमीटर क्षेत्र में पैकेजिंग अपशिष्ट सबसे अधिक पाया गया। यह क्षेत्र गंगा डॉल्फिन और स्मूथ कोटेड ओटर्स जैसी लुप्तप्राय जलीय प्रजातियों का प्रमुख आश्रय स्थल है। Also Read: हिंगोली किसान