
Grok AI Deepfake Ban: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव और इसके दुरुपयोग को लेकर लंबे समय से उठ रही चिंताओं के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने एक अहम और जरूरी कदम उठाया है। अब एक्स पर मौजूद एआई चैटबॉट ग्रोक की मदद से किसी भी वास्तविक व्यक्ति की तस्वीर को आपत्तिजनक या अश्लील रूप में एडिट करना संभव नहीं होगा। पिछले कुछ समय से एआई द्वारा बनाई जा रही अश्लील डीपफेक तस्वीरें दुनियाभर में विवाद का कारण बनी हुई थीं। खासकर महिलाओं, सार्वजनिक हस्तियों और आम लोगों की तस्वीरों को बिना अनुमति आपत्तिजनक रूप में बदलकर वायरल किया जाना

Grok AI Deepfake Ban: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव और इसके दुरुपयोग को लेकर लंबे समय से उठ रही चिंताओं के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने एक अहम और जरूरी कदम उठाया है। अब एक्स पर मौजूद एआई चैटबॉट ग्रोक की मदद से किसी भी वास्तविक व्यक्ति की तस्वीर को आपत्तिजनक या अश्लील रूप में एडिट करना संभव नहीं होगा। पिछले कुछ समय से एआई द्वारा बनाई जा रही अश्लील डीपफेक तस्वीरें दुनियाभर में विवाद का कारण बनी हुई थीं। खासकर महिलाओं, सार्वजनिक हस्तियों और आम लोगों की तस्वीरों को बिना अनुमति आपत्तिजनक रूप में बदलकर वायरल किया जाना

नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) को कर्नाटक हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने एक्स द्वारा केंद्र सरकार के टेकडाउन ऑर्डर को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि भारत में कारोबार करने के लिए हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को देश के कानून का पालन करना होगा। कंपनी ने अपनी दलील में कहा था कि आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) सरकारी अधिकारियों को सामग्री अवरुद्ध करने का अधिकार नहीं देती। एक्स का तर्क था कि केवल धारा 69ए और उससे जुड़े 2009 के नियम ही वैध

नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) को कर्नाटक हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने एक्स द्वारा केंद्र सरकार के टेकडाउन ऑर्डर को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि भारत में कारोबार करने के लिए हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को देश के कानून का पालन करना होगा। कंपनी ने अपनी दलील में कहा था कि आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) सरकारी अधिकारियों को सामग्री अवरुद्ध करने का अधिकार नहीं देती। एक्स का तर्क था कि केवल धारा 69ए और उससे जुड़े 2009 के नियम ही वैध