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बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बाद पहला चुनाव, मतगणना जारी

Bangladesh first election after student protests: छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश में पहला चुनाव संपन्न, परिणाम का इंतजार
Bangladesh first election after student protests: छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश में पहला चुनाव संपन्न, परिणाम का इंतजार (File Photo)

Bangladesh first election after student protests: बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बाद पहला चुनाव संपन्न हुआ। 12.7 करोड़ मतदाताओं ने 299 सीटों के लिए वोट डाले। शेख हसीना की अवामी लीग प्रतिबंधित। बीएनपी और जमात के बीच मुख्य मुकाबला। 10 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात। अंतरिम नेता युनुस ने नए सपने की बात कही। शुक्रवार को नतीजों का इंतजार।

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बांग्लादेश में ऐतिहासिक चुनाव: नई लोकतांत्रिक शुरुआत की उम्मीद

Bangladesh first election after student protests: बांग्लादेश में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। गुरुवार को देश में 13वीं राष्ट्रीय संसद के लिए मतदान संपन्न हुआ और अब मतगणना जारी है। यह चुनाव इसलिए खास है क्योंकि यह उस छात्र आंदोलन के बाद पहला चुनाव है जिसने 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया था। करीब 12.7 करोड़ मतदाताओं ने अपने भविष्य का फैसला करने के लिए वोट डाले। देश भर में 42,659 मतदान केंद्रों पर सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक मतदान हुआ।

छात्र आंदोलन से लेकर चुनाव तक का सफर

बांग्लादेश में 2024 में छात्रों ने एक जबरदस्त आंदोलन खड़ा किया था। यह आंदोलन शेख हसीना की सरकार के खिलाफ था। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इस आंदोलन में करीब 1,400 प्रदर्शनकारी मारे गए थे। शेख हसीना पर आरोप है कि उन्होंने सीधे तौर पर इस दमन का आदेश दिया था, हालांकि उन्होंने इन आरोपों को नकारा है। इस आंदोलन ने अंततः हसीना को सत्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया और देश में अंतरिम सरकार बनी।

अब जो चुनाव हुआ है वह उसी छात्र आंदोलन का नतीजा है। देश के लोग एक नई लोकतांत्रिक शुरुआत की उम्मीद कर रहे हैं। इस चुनाव में शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी को प्रतिबंधित कर दिया गया है और उसका कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं है।

मुख्य प्रतिद्वंद्वी और चुनावी समीकरण

इस चुनाव में 2,000 से अधिक उम्मीदवार 299 सीटों के लिए मैदान में उतरे हैं। एक सीट शेरपुर-3 के लिए चुनाव स्थगित कर दिया गया क्योंकि एक उम्मीदवार की मृत्यु हो गई थी। मुख्य मुकाबला केंद्र-दक्षिणपंथी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और इस्लामिक जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच है। दिलचस्प बात यह है कि जमात ने छात्र आंदोलन से जन्मी पार्टी के साथ हाथ मिलाया है।

बीएनपी के तरिक रहमान और जमात के शफीकुर रहमान दोनों ही इस चुनाव के प्रमुख चेहरे हैं। दोनों ने राजधानी ढाका में अपना मत डाला। अंतरिम नेता मोहम्मद युनुस ने भी वोट डालने के बाद कहा कि देश ने “बुरे सपने को खत्म कर एक नए सपने की शुरुआत की है।”

संवैधानिक बदलाव का जनमत संग्रह

चुनाव के साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया हुई। मतदाताओं ने संवैधानिक बदलाव पर भी अपनी राय दी। अंतरिम सरकार ने इस बदलाव का प्रस्ताव रखा था। सरकार का कहना है कि देश की राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह से टूट चुकी है और इसे ठीक करने के लिए संविधान में बदलाव जरूरी है। यह जनमत संग्रह बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम है।

सुरक्षा व्यवस्था और मतदान प्रक्रिया

चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए करीब 10 लाख पुलिसकर्मी और सैनिक तैनात किए गए थे। यह सुरक्षा व्यवस्था इसलिए जरूरी थी क्योंकि पिछले साल हुए आंदोलन में काफी हिंसा हुई थी। चुनाव आयोग के मुताबिक दोपहर 2 बजे तक 36,031 केंद्रों पर कुल 47.91% मतदान हुआ था।

मतदान प्रक्रिया पारदर्शी बैलेट बॉक्स में बैलेट पेपर के जरिए हुई। देश भर में पुरुष मतदाता 6.46 करोड़, महिला मतदाता 6.26 करोड़ और तीसरे लिंग के 1,213 मतदाता थे। यूरोपीय संघ के मुख्य पर्यवेक्षक इवर्स इजाब्स ने कहा कि उन्होंने दोपहर तक मतदाताओं में काफी उत्साह देखा।

चुनावी अनियमितता के आरोप

हालांकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से सुचारू नहीं रही। नेशनल सिटीजंस पार्टी की मोनिरा शरमीन ने कई अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दोपहर तक सब कुछ ठीक था लेकिन बाद में गड़बड़ियों की शिकायतें आने लगीं। उनका कहना था कि अगर नतीजों में गड़बड़ी की कोशिश होगी तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जमात के अमीर शफीकुर रहमान ने भी आरोप लगाया कि देश के कई हिस्सों में फर्जी वोट डालने की कोशिश हुई। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नतीजे आने तक अपने मतदान केंद्रों की रखवाली करें।

अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की प्रतिक्रिया

अमेरिका के पूर्व सांसद डेविड ड्रेयर, जो इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट के चुनाव पर्यवेक्षण मिशन का नेतृत्व कर रहे थे, ने इस चुनाव को “स्वतंत्र, निष्पक्ष और उत्सव जैसा” बताया। उन्होंने गुलशान के एक मतदान केंद्र का दौरा किया और कहा कि उन्होंने व्यवस्थित माहौल और लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा।

यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों ने भी सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पूरे देश में उनके पर्यवेक्षकों ने मतदान की बारीकी से निगरानी की और उन्हें काफी अच्छा अनुभव रहा।

नए लोकतंत्र की संभावनाएं

Bangladesh first election after student protests: यह चुनाव बांग्लादेश के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है। छात्र आंदोलन ने दिखाया कि युवा पीढ़ी बदलाव चाहती है। अब यह देखना होगा कि चुनाव नतीजे उन उम्मीदों को कितना पूरा करते हैं।

अंतरिम सरकार ने राजनीतिक सुधारों का वादा किया है। संवैधानिक बदलाव का जनमत संग्रह इसी दिशा में एक कदम है। लेकिन असली चुनौती यह होगी कि नई सरकार कैसे उन समस्याओं को हल करती है जो पिछली सरकार के दौरान पैदा हुई थीं।

बांग्लादेश की जनता ने हिंसा और दमन का दौर देखा है। अब वे शांति, विकास और लोकतंत्र की उम्मीद कर रहे हैं। शुक्रवार को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि देश किस दिशा में जाएगा और क्या वाकई में एक नए सपने की शुरुआत होगी।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।