Hindu businessman killed ahead of Bangladesh polls: बांग्लादेश में एक बार फिर अल्पसंख्यक समुदाय के साथ हिंसा की घटना सामने आई है। मयमनसिंह जिले के त्रिशाल इलाके में सोमवार रात करीब 11 बजे एक हिंदू व्यापारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह घटना उस समय हुई जब देश में प्रधानमंत्री पद के लिए आम चुनाव के मतदान में सिर्फ तीन दिन बाकी थे। मृतक की पहचान 62 वर्षीय सुसेन चंद्र सरकार के रूप में हुई है, जो पेशे से चावल का व्यापारी थे और साउथकंडा गांव के रहने वाले थे।
दुकान के अंदर हुई क्रूर हत्या
सुसेन चंद्र सरकार की दुकान का नाम ‘भाई भाई एंटरप्राइज’ है, जो बोगर बाजार चौराहे पर स्थित है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने सुसेन पर धारदार हथियार से हमला किया। हत्या के बाद हमलावरों ने दुकान का शटर बंद कर दिया और घटनास्थल से फरार हो गए। त्रिशाल थाने के ओसी मोहम्मद फिरोज हुसैन ने बताया कि हत्या बेहद क्रूरता से की गई थी।
परिवार ने की तलाश, मिली लाश
जब सुसेन चंद्र सरकार रात में घर नहीं लौटे तो परिवार के सदस्यों को चिंता हुई। परिवारवालों ने उनकी तलाश में दुकान पर गए और देखा कि शटर बंद था। जब उन्होंने शटर खोला तो सुसेन को खून के तालाब में पड़ा पाया। परिवारवालों ने तुरंत उन्हें मयमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
हत्यारों ने की लूटपाट
मृतक के बेटे सुजान सरकार ने बताया कि हमलावरों ने उनके पिता की हत्या के बाद दुकान से कई लाखों टका चुरा लिए। सुजान ने कहा कि उनके पिता की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। उन्होंने बताया कि परिवार लंबे समय से चावल का व्यवसाय करता आ रहा है और उनका किसी से कोई विवाद नहीं था। सुजान ने यह भी कहा कि यह घटना पूरी तरह से योजनाबद्ध लगती है।
पुलिस की जांच शुरू
थाने के अधिकारी फिरोज हुसैन ने बताया कि सुसेन चंद्र सरकार के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस ने परिवारजनों के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस घटना में कौन-कौन लोग शामिल हैं और हत्या के पीछे की असली वजह क्या है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
चुनाव से तीन दिन पहले की घटना
यह घटना बांग्लादेश में प्रधानमंत्री पद के लिए होने वाले आम चुनाव के मतदान से ठीक तीन दिन पहले हुई है। ऐसे संवेदनशील समय में हिंदू व्यापारी की हत्या ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के समय अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। इससे पहले भी बांग्लादेश में चुनावी दौर में अल्पसंख्यकों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं।
अल्पसंख्यकों की असुरक्षा
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय लगातार असुरक्षा का सामना कर रहा है। पिछले कुछ समय में हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। मंदिरों को तोड़ना, घरों में तोड़फोड़, महिलाओं के साथ बुरा बर्ताव और व्यापारियों को निशाना बनाना जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी इस मुद्दे पर चिंता जता चुके हैं।
व्यापारी समुदाय में दहशत
सुसेन चंद्र सरकार की हत्या से स्थानीय व्यापारी समुदाय में दहशत का माहौल है। कई व्यापारी अब अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। बोगर बाजार इलाके में कई हिंदू व्यापारी अपना कारोबार करते हैं और इस घटना के बाद उनकी चिंता बढ़ गई है। कुछ व्यापारियों ने सुरक्षा की मांग की है और पुलिस से गश्त बढ़ाने की अपील की है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों ने सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि चुनाव से पहले इस तरह की घटना सरकार की विफलता को दर्शाती है। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल ने कहा है कि यह एक अलग मामला है और पुलिस जांच कर रही है।
परिवार की मांग
Hindu businessman killed ahead of Bangladesh polls: मृतक के परिवार ने जल्द से जल्द अपराधियों को पकड़ने और कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। सुजान सरकार ने कहा कि उनके पिता एक ईमानदार व्यापारी थे और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते थे। परिवार को न्याय मिलना चाहिए और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए।
सामाजिक सद्भाव पर असर
इस तरह की घटनाएं समाज में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाती हैं। बांग्लादेश में हिंदू और मुस्लिम समुदाय सदियों से साथ रहते आए हैं, लेकिन कुछ तत्व इस सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और समाज दोनों को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए काम करना होगा।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रही हिंसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बन गई है। कई देशों ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन भी इस मुद्दे पर नजर रख रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे ताकि हर नागरिक सुरक्षित महसूस कर सके। चुनाव के समय में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।