ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। ईरान इंटरनेशनल नामक मीडिया संस्था ने दावा किया है कि 8 और 9 जनवरी को हुई कार्रवाई में कम से कम 12,000 लोगों की मौत हो गई है। यह आंकड़ा सरकारी आंकड़ों और मानवाधिकार संगठनों के दावों से कहीं अधिक है। देश में 8 जनवरी से इंटरनेट पूरी तरह बंद होने के कारण असली स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया है।
विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कैसे हुई
28 दिसंबर 2025 को ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत अचानक तेजी से गिर गई। इसके बाद देश भर में वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगीं। आम लोगों में गुस्सा फैल गया और उन्होंने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। शुरुआत में यह विरोध केवल आर्थिक मुद्दों को लेकर था, लेकिन जल्द ही यह पूरे देश के 31 प्रांतों में फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार और सरकारी नीतियों की आलोचना करते हुए शासन में बदलाव की मांग करनी शुरू कर दी।
हिंसक कार्रवाई का आरोप
ईरान इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 8 और 9 जनवरी को IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर) और बसीज बलों ने योजनाबद्ध तरीके से प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। इस मीडिया संस्था ने अपने दावे के लिए गुमनाम सूत्रों, चश्मदीद गवाहों और अस्पतालों से मिले आंकड़ों का हवाला दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्रवाई में कम से कम 12,000 लोग मारे गए।
यह संख्या सरकारी अधिकारियों द्वारा बताए गए आंकड़ों से छह गुना अधिक है। एक सरकारी अधिकारी ने मौतों की संख्या लगभग 2,000 बताई थी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने अलग-अलग आंकड़े दिए हैं। एक संगठन ने 646 मौतों का दावा किया है, जबकि दूसरे ने केवल 192 की पुष्टि की है।
इंटरनेट बंद होने से बढ़ा संदेह
8 जनवरी से ईरान में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। इस कदम से दुनिया भर के लोगों को वहां की असली स्थिति जानने में बहुत मुश्किल हो रही है। सोशल मीडिया पर आने वाली जानकारी और तस्वीरें भी बंद हो गई हैं। हालांकि, इंटरनेट बंद होने से पहले कुछ वीडियो सामने आए थे, जिनमें शव बैग और अंतिम संस्कार के दृश्य दिखाई दे रहे थे।
इन वीडियो को सत्यापित किया गया है और वे ईरान के अलग-अलग शहरों से आए थे। लेकिन इंटरनेट बंद होने के बाद नई जानकारी मिलना बहुत मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने जानबूझकर इंटरनेट बंद किया है ताकि बाहरी दुनिया को सच्चाई का पता न चल सके।
अस्पतालों में भारी भीड़
कई गुमनाम सूत्रों ने बताया है कि ईरान के अस्पतालों में घायलों की बहुत बड़ी संख्या में भीड़ है। अस्पतालों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे मीडिया या बाहरी लोगों को कोई जानकारी न दें। कुछ डॉक्टरों और नर्सों ने गुपचुप तरीके से बताया है कि गोली लगने से घायल हुए लोगों की संख्या बहुत अधिक है।
इसके अलावा, कई परिवारों को अपने मारे गए लोगों के शव नहीं मिल रहे हैं। सरकारी अधिकारी परिवारों से कह रहे हैं कि वे बिना किसी बड़े समारोह के चुपचाप अंतिम संस्कार करें। कुछ मामलों में परिवारों पर दबाव भी डाला जा रहा है कि वे मीडिया से बात न करें।
दुनिया भर में निंदा
इस घटना की जानकारी मिलने के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ईरान सरकार की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। मानवाधिकार संगठनों ने कहा है कि यदि ये आरोप सच साबित होते हैं, तो यह मानवता के खिलाफ एक बड़ा अपराध होगा।
कई पश्चिमी देशों ने ईरान पर और प्रतिबंध लगाने की बात कही है। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने ईरान सरकार से इंटरनेट सेवाएं बहाल करने और स्वतंत्र जांच की अनुमति देने को कहा है। लेकिन अभी तक ईरान सरकार ने इन मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सरकार का पक्ष
ईरान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विरोध प्रदर्शनों में हिंसक तत्वों ने उपद्रव किया था। सरकार का दावा है कि सुरक्षा बलों ने केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की थी। सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया है कि विदेशी ताकतें ईरान में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही हैं।
ईरान के अधिकारियों ने ईरान इंटरनेशनल को ‘दुश्मन मीडिया’ बताया है और उसके दावों को झूठा करार दिया है। हालांकि, स्वतंत्र पत्रकारों और विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट बंद करना और पारदर्शिता की कमी सरकार की बातों पर संदेह पैदा करती है।
आगे क्या होगा
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान में विरोध प्रदर्शन कब तक जारी रहेंगे। इंटरनेट बंद होने के बावजूद लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। कई इलाकों में रात में भी विरोध प्रदर्शन की आवाजें सुनाई दे रही हैं। लोगों में डर और गुस्सा दोनों है, लेकिन वे अपनी मांगों को लेकर दृढ़ दिख रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार ईरान सरकार पर दबाव बना रहा है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने एक विशेष बैठक बुलाने की बात कही है। कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान से वापस बुला लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक इंटरनेट बहाल नहीं होता और स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक सच्चाई का पता नहीं चल सकेगा। लेकिन जो भी सबूत अभी तक मिले हैं, वे बहुत गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं। दुनिया की नजरें अब ईरान पर टिकी हुई हैं और सभी सच्चाई जानने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।