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तेहरान में हालात बेकाबू: महंगाई के खिलाफ उठी आवाज पर बरसी गोलियां, सैकड़ों लोगों की मौत

तेहरान में हालात बेकाबू: महंगाई के खिलाफ उठी आवाज पर बरसी गोलियां
तेहरान में हालात बेकाबू (Source- X @visegrad24)
ईरान में महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। तेहरान में गोलीबारी में सैकड़ों मौतों के दावे किए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई, इंटरनेट बंदी और अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।
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Iran Protests: तेहरान की सड़कों पर इन दिनों केवल नारे नहीं गूंज रहे, बल्कि डर, आक्रोश और खामोशी की एक गहरी परत भी फैलती जा रही है। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने जिस तरह हिंसक रूप लिया है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई द्वारा सुरक्षा बलों को सख्त कार्रवाई के संकेत दिए जाने के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।

स्थानीय सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आई जानकारियों के अनुसार, राजधानी तेहरान में प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी में सैकड़ों लोगों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जो तस्वीरें और बयान सामने आ रहे हैं, वे हालात की गंभीरता को उजागर करते हैं।

ईरान में उग्र होते प्रदर्शन और सत्ता की प्रतिक्रिया

ईरान में शुरू हुआ यह आंदोलन केवल राजनीतिक असहमति तक सीमित नहीं रहा। महंगाई, बेरोजगारी, गिरती मुद्रा और आर्थिक बदहाली से उपजा गुस्सा अब सड़कों पर खुलकर दिखाई दे रहा है। प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ सरकार की चिंता भी बढ़ती गई और इसका परिणाम सख्त कार्रवाई के रूप में सामने आया।

गोलीबारी और मौतों के दावे

एक स्थानीय डॉक्टर ने अंतरराष्ट्रीय पत्रिका को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तेहरान के केवल छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। डॉक्टर के अनुसार, अधिकतर मौतें गोली लगने से हुई हैं। मृतकों में बड़ी संख्या युवाओं की बताई जा रही है, जो भविष्य को लेकर सवाल पूछने सड़कों पर उतरे थे।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सवाल

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उत्तरी तेहरान के एक पुलिस स्टेशन के बाहर सुरक्षा बलों ने मशीनगन से अंधाधुंध फायरिंग की। कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह दृश्य केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग इलाकों से इसी तरह की खबरें सामने आ रही हैं, जिसने मानवाधिकार संगठनों की चिंता बढ़ा दी है।

आंकड़ों को लेकर विरोधाभास

वाशिंगटन डीसी स्थित एक मानवाधिकार समाचार एजेंसी ने अब तक 63 मौतों की पुष्टि की है, जो केवल पहचाने गए पीड़ितों पर आधारित है। वहीं स्थानीय सूत्र कहीं अधिक संख्या की बात कर रहे हैं। इंटरनेट और फोन सेवाओं के लगभग बंद होने से सही आंकड़े सामने आना और भी मुश्किल हो गया है।

अमेरिका की चेतावनी और वैश्विक दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पहले ही ईरान को चेतावनी दे चुके हैं कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया गया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ट्रंप के बयान ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब ईरान की हर कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है।

ईरानी नेतृत्व का तीखा रुख

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए साफ कहा कि ईरान किसी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों से प्रभावित उपद्रवी बताया। सरकार की ओर से यह भी संकेत दिए गए कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को कड़ी सजा, यहां तक कि मौत की सजा भी दी जा सकती है।

सरकारी चेतावनियां और डर का माहौल

सरकारी टेलीविजन पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक अधिकारी ने माता-पिता को चेतावनी दी कि वे अपने बच्चों को प्रदर्शनों से दूर रखें। उनका बयान—“अगर गोली लग जाए, तो शिकायत मत करना”—ईरान में फैले भय के माहौल को साफ दिखाता है।

आर्थिक संकट से उपजा आक्रोश

यह आंदोलन केवल सत्ता के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है, जिसने आम ईरानी नागरिक को आर्थिक रूप से कमजोर और मानसिक रूप से थका दिया है। बढ़ती महंगाई और घटती क्रय शक्ति ने लोगों को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां डर से ज्यादा गुस्सा हावी है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।