ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर बार-बार हमले की धमकियों के बीच अब ईरान ने भी खुलकर जवाब देने की बात कही है। इस बीच कतर जैसे पड़ोसी देश ने भी चेतावनी देकर हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। पूरे पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध की आशंका महसूस की जा रही है।
ईरान-अमेरिका टकराव क्यों फिर चर्चा में है
अमेरिका और ईरान के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में यह तनाव शब्दों की सीमा से बाहर जाता दिख रहा है। अमेरिका ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती को लेकर नाराजगी जताई है। व्हाइट हाउस की ओर से यह साफ कहा गया है कि ईरान पर हवाई हमले का विकल्प भी खुला है।
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि वह किसी भी बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं करेगा। यही कारण है कि दोनों देशों के बयान अब सीधे सैन्य टकराव की ओर इशारा कर रहे हैं।
ईरानी संसद के स्पीकर का सख्त संदेश
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने सरकारी टीवी पर प्रसारित अपने संदेश में अमेरिका को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो अमेरिकी सेना और समुद्री जहाज ईरान के लिए वैध लक्ष्य होंगे।
यह बयान केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत देता है कि ईरान किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बयान के बाद से पूरे क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
कतर की चेतावनी और उसकी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम में कतर की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई भी सैन्य टकराव पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होगा।
कतर को यह डर सता रहा है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो ईरान जवाबी कार्रवाई में कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना सकता है। इससे कतर खुद भी युद्ध की चपेट में आ सकता है।
पिछली घटनाओं से कतर क्यों डरा हुआ है
पिछले साल जून में जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु केंद्रों पर हमला किया था, तब ईरान ने कतर में स्थित अल उदीद अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया था। यह हमला कतर के लिए चौंकाने वाला था।
हालांकि, उसी समय कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए अमेरिका और ईरान के बीच हालात को संभालने में अहम योगदान दिया था। कतर नहीं चाहता कि वह फिर से ऐसे हालात में फंसे।
ईरान के अंदर बढ़ता असंतोष
ईरान इस समय अंदरूनी संकट से भी जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में अब तक करीब 2000 लोगों की मौत की खबर है। इनमें आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
अमेरिका का कहना है कि ईरान सरकार अपने ही लोगों पर अत्याचार कर रही है। इसी आधार पर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की बात कही है।
ट्रंप की धमकियां और कूटनीति का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने एक ओर जहां हमले की चेतावनी दी है, वहीं दूसरी ओर यह भी कहा गया है कि बातचीत का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है। अमेरिका का दावा है कि वह कूटनीति के जरिए भी समाधान चाहता है।
हालांकि, ईरान का कहना है कि निजी बातचीत में अमेरिका का रवैया बिल्कुल अलग रहा है। ईरान ने ट्रंप के विशेष दूत से बातचीत में अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है।
पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है असर
अगर ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध होता है तो इसका असर सिर्फ इन दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम एशिया के कई देश इसकी चपेट में आ सकते हैं। तेल की आपूर्ति, व्यापार, समुद्री रास्ते और आम लोगों की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह टकराव वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ा सकता है।