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बांग्लादेश में चुनाव की मांग करते हुए विपक्षी दल ने रैली निकाली

बांग्लादेश में चुनाव की मांग करते हुए विपक्षी दल ने रैली निकाली
बांग्लादेश में चुनाव कराने की मांग पर विपक्षी दलों ने निकाली रैली.
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Rashtra Bharat Digital Team
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Bangladesh News|विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं ने चुनाव के माध्यम से सत्ता के लोकतांत्रिक हस्तांतरण की मांग को लेकर मंगलवार को ढाका में रैली निकाली।

 

बांग्लादेश में शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और देश छोड़कर चले जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार ने अभी तक चुनाव के लिए समय सीमा जारी नहीं की है।

 

बीएनपी नेता और कार्यकर्ता ढाका में पार्टी मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए और देश में नये सिरे से चुनाव कराने की मांग को लेकर नारे लगाए।

 

यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने निर्वाचन आयोग और वित्तीय प्रतिष्ठानों सहित अन्य संस्थानों में सुधार के लिए कई योजनाएं पेश की हैं। लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व वाली बीएनपी सहित अन्य प्रमुख पार्टियां जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग कर रही हैं।

 

यूनुस ने अपने हालिया बयानों में यह नहीं बताया कि चुनाव कब आयोजित किए जाएंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि वह तब तक सत्ता में रहेंगे, जब तक लोग ऐसा चाहेंगे। अखबारों के संपादकों की एक टीम ने हाल में कहा था कि यूनुस को प्रमुख सुधार को लागू करना चाहिए और सत्ता में कम से कम दो साल तक बने रहना चाहिए।

 

बीएनपी ने शुरू में तीन महीने में चुनाव कराने की मांग की थी, लेकिन बाद में उसने कहा कि वह अंतरिम सरकार को सुधार लागू करने के लिए समय देना चाहती है। बीएनपी की गठबंधन सहयोगी रह चुकी जमात-ए-इस्लामी पार्टी भी अंतरिम सरकार को सुधार लागू करने के लिए समय देने की पक्षधर है।

 

बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारीक रहमान ने मंगलवार को लंदन से ऑनलाइन बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी ने सुधारों के लिए अंतरिम सरकार की योजनाओं का समर्थन किया है, लेकिन ऐसे बदलाव तभी कायम रहेंगे, जब लोगों को इस प्रक्रिया में अपनी बात कहने का अधिकार मिलेगा।

 

रहमान ने यह नहीं बताया कि अगले चुनाव कब होने चाहिए, लेकिन कहा कि किसी भी सुधार का अगली संसद में समर्थन किया जाना चाहिए।

 

उन्होंने कहा, “केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव ही लोगों का राजनीतिक सशक्तिकरण सुनिश्चित कर सकता है।”