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सियेटल में भारतीय छात्रा की मौत: परिवार को 260 करोड़ रुपये का मुआवजा

Jaahnavi Kandula Seattle settlement news: सियेटल में भारतीय छात्रा की मौत पर परिवार को मिला 260 करोड़ का मुआवजा
Jaahnavi Kandula Seattle settlement news: सियेटल में भारतीय छात्रा की मौत पर परिवार को मिला 260 करोड़ का मुआवजा (Image Source: X/@sumitjha__)

Jaahnavi Kandula Seattle settlement news: आंध्र प्रदेश की 23 साल की छात्रा जाह्नवी कंडुला की जनवरी 2023 में सियेटल में पुलिस गाड़ी की टक्कर से मौत हो गई थी। अब सियेटल शहर ने उनके परिवार को 29 मिलियन डॉलर यानी 263.7 करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर सहमति जताई है। यह पुलिस हिंसा मामलों में दिए जाने वाले सबसे बड़े मुआवजों में से एक है।

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Jaahnavi Kandula Seattle settlement news: अमेरिका के सियेटल शहर में एक दुखद घटना ने भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा कर दिया था। 23 साल की भारतीय छात्रा जाह्नवी कंडुला की जनवरी 2023 में एक पुलिस गाड़ी की टक्कर से मौत हो गई थी। अब सियेटल शहर की तरफ से उनके परिवार को 29 मिलियन डॉलर यानी करीब 263.7 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया गया है। यह रकम अमेरिकी इतिहास में पुलिस हिंसा से जुड़े किसी मामले में दिए जाने वाले सबसे बड़े मुआवजों में से एक है।

जाह्नवी आंध्र प्रदेश के अडोनी शहर से थीं और सियेटल में नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के सियेटल कैंपस में सूचना प्रणाली में मास्टर्स की पढ़ाई कर रही थीं। उनके परिवार ने 2024 में 110 मिलियन डॉलर यानी 996 करोड़ रुपये का गलत मौत का मुकदमा दायर किया था।

जाह्नवी कंडुला कौन थीं

जाह्नवी कंडुला आंध्र प्रदेश के अडोनी शहर की रहने वाली थीं। उनकी परवरिश एक अकेली मां ने की थी, जो एक स्कूल में पढ़ाती थीं। जाह्नवी ने डॉ ज्योतिर्मयी डिग्री कॉलेज, आंध्र प्रदेश से वाणिज्य की पढ़ाई की थी। वह 2021 में कर्नाटक के बेंगलुरु से एक छात्र विनिमय कार्यक्रम के तहत अमेरिका गई थीं।

जाह्नवी अपने सपनों को पूरा करने के लिए अमेरिका गई थीं। वह मेहनती और होनहार छात्रा थीं। उनकी मां ने अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए काफी मेहनत की थी। परिवार के लोगों का कहना है कि जाह्नवी अपनी पढ़ाई पूरी करके भारत लौटना चाहती थीं और अपनी मां का सहारा बनना चाहती थीं।

घटना की रात क्या हुआ था

23 जनवरी 2023 की रात को जाह्नवी सियेटल की एक सड़क पार कर रही थीं। तभी पुलिस अधिकारी केविन डेव की तेज रफ्तार गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस गाड़ी 119 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी, जबकि उस इलाके में रफ्तार की सीमा बहुत कम थी।

घटना के बाद जाह्नवी को गंभीर चोटें आईं और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचा नहीं सके। इस घटना ने भारतीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया। पूरे अमेरिका और भारत में इस घटना की निंदा हुई।

पुलिस अधिकारी की असंवेदनशील टिप्पणी

इस घटना को और भी दर्दनाक बनाया पुलिस अधिकारी डेनियल ऑड्यूबोन की एक असंवेदनशील टिप्पणी ने। घटना के बाद उनकी बॉडी कैमरा फुटेज में उन्हें जाह्नवी की मौत का मजाक उड़ाते हुए सुना गया। उन्होंने कहा था कि शहर को सिर्फ 11,000 डॉलर का मुआवजा देना चाहिए क्योंकि उनकी उम्र कम थी।

यह टिप्पणी सामने आने के बाद भारत और अमेरिका में काफी विरोध हुआ। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया और अमेरिकी अधिकारियों से न्याय की मांग की। भारतीय समुदाय ने सियेटल में विरोध प्रदर्शन किया और जाह्नवी के लिए न्याय की मांग की।

कानूनी लड़ाई और मुआवजा

जाह्नवी के परिवार ने 2024 में सियेटल शहर के खिलाफ गलत मौत का मुकदमा दायर किया। उन्होंने 110 मिलियन डॉलर का मुआवजा मांगा था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब सियेटल शहर ने 29 मिलियन डॉलर यानी करीब 263.7 करोड़ रुपये का समझौता करने पर सहमति जताई है।

यह रकम अमेरिका में पुलिस हिंसा से जुड़े मामलों में दिए जाने वाले सबसे बड़े मुआवजों में से एक है। परिवार के वकील ने कहा कि यह फैसला जाह्नवी की याद में न्याय का एक कदम है। हालांकि, कोई भी रकम उनकी जान वापस नहीं ला सकती।

भारत-अमेरिका संबंधों पर असर

इस घटना ने भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा किया था। भारतीय सरकार ने इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले में खेद जताया और जांच का आश्वासन दिया। सियेटल पुलिस विभाग ने भी इस घटना की निंदा की और कहा कि वे अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करेंगे।

विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा

यह घटना विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा के सवाल को उठाती है। हर साल हजारों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाते हैं। उनकी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा बेहद जरूरी है।

भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास विदेशों में रह रहे भारतीय छात्रों की मदद के लिए हेल्पलाइन चलाते हैं। लेकिन ऐसी दुखद घटनाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि सुरक्षा के और भी कड़े इंतजाम की जरूरत है।

पुलिस सुधार की जरूरत

इस घटना ने अमेरिका में पुलिस सुधार की जरूरत को भी रेखांकित किया है। तेज रफ्तार गाड़ी चलाना और फिर पीड़ित का मजाक उड़ाना पुलिस विभाग में मौजूद गंभीर समस्याओं को दर्शाता है।

कई नागरिक संगठनों ने पुलिस प्रशिक्षण में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने की मांग की है। सियेटल शहर ने इस मामले के बाद अपनी पुलिस प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का वादा किया है।

परिवार का दर्द और न्याय की तलाश

जाह्नवी की मां के लिए यह समय बेहद कठिन रहा है। उन्होंने अपनी इकलौती बेटी को खो दिया, जो उनका सहारा थी। मुआवजे की रकम उनके दर्द को कम नहीं कर सकती, लेकिन यह इस बात का संदेश जरूर देती है कि गलती करने वालों को जवाब देना होगा।

परिवार के वकीलों ने कहा है कि यह फैसला न सिर्फ जाह्नवी के लिए बल्कि उन सभी के लिए न्याय है जो पुलिस हिंसा के शिकार होते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले से सबक लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।

आगे की राह

Jaahnavi Kandula Seattle settlement news: जाह्नवी कंडुला की मौत एक दुखद याद दिलाती है कि जीवन कितना नाजुक है। यह घटना विदेशों में रह रहे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों के लिए एक चेतावनी भी है। सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए।

भारत सरकार को विदेशों में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए मजबूत कदम उठाने चाहिए। साथ ही, अमेरिकी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस विभाग में ऐसे लोग न हों जो अपनी जिम्मेदारियों का दुरुपयोग करें।

जाह्नवी की याद हमेशा उनके परिवार और दोस्तों के दिलों में रहेगी। उनका सपना अधूरा रह गया, लेकिन उनकी कहानी न्याय और सुरक्षा की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गई है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।