Tarique Rahman on India-Bangladesh relations after BNP 2026 election win: बांग्लादेश में हाल ही में हुए चुनाव परिणामों ने पूरे दक्षिण एशिया में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP की शानदार जीत के बाद तारिक रहमान ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के साथ संबंधों को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उनके बयान से साफ है कि नई सरकार अपनी विदेश नीति में बांग्लादेश के हित को सबसे ऊपर रखेगी।
बांग्लादेश चुनाव में BNP की ऐतिहासिक जीत
13वीं संसदीय चुनाव में BNP के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 212 सीटें हासिल कीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले समूह को 77 सीटें मिलीं। यह जीत लगभग दो दशक बाद BNP की सत्ता में वापसी का प्रतीक है। शेख हसीना की अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था, जो बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है।
तारिक रहमान ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह जीत बांग्लादेश की है, लोकतंत्र की है और उन लोगों की है जिन्होंने लोकतंत्र के लिए त्याग किया है। 60 वर्षीय तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं और तीन बार प्रधानमंत्री रह चुकीं खालिदा जिया के पुत्र हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर तारिक रहमान का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब भारत-बांग्लादेश संबंधों पर सवाल पूछा गया, तो तारिक रहमान ने साफ शब्दों में कहा कि बांग्लादेश के हित को सबसे पहले रखा जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने अपनी विदेश नीति को लेकर स्पष्टता रखी है। बांग्लादेश का हित और बांग्लादेशी लोगों का हित सबसे पहले आएगा। बांग्लादेश और यहां के लोगों के हितों की रक्षा करते हुए हम अपनी विदेश नीति तय करेंगे।”
यह बयान उस समय आया है जब भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में तनाव देखा गया है। अगस्त 2024 में शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आई थी। शेख हसीना भारत की पड़ोसी देशों में सबसे करीबी साझीदार मानी जाती थीं। उनकी भारत में मौजूदगी दोनों देशों के लिए एक राजनयिक चुनौती बनी हुई है।
प्रधानमंत्री मोदी की पहल का महत्व
दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक परिणाम घोषित होने से पहले ही तारिक रहमान को फोन कर बधाई दी। वे पहले विदेशी नेता थे जिन्होंने रहमान को बधाई दी। यह पहल भारत की ओर से बांग्लादेश के साथ संबंधों को सुधारने की इच्छा को दर्शाती है।
यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि शेख हसीना के हटने के बाद ढाका और दिल्ली के बीच तनाव बढ़ा था। दोनों देशों के बीच पानी बंटवारे, सीमा मुद्दे, संपर्क और अवैध प्रवासियों जैसे कई विवादास्पद मुद्दे हैं।
लोकतांत्रिक जनादेश और एकता का संदेश
तारिक रहमान ने चुनाव परिणाम को लोकतांत्रिक जनादेश बताया और देश के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को सुधारना, संस्थाओं को मजबूत करना और कानून-व्यवस्था में सुधार करना प्राथमिकता होगी।
उन्होंने राष्ट्रीय एकता पर जोर देते हुए कहा, “हमारे रास्ते और विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के हित में हमें एकजुट रहना होगा। मेरा दृढ़ विश्वास है कि राष्ट्रीय एकता सामूहिक शक्ति है, जबकि विभाजन कमजोरी है।”
यह अपील गुरुवार को हुए चुनाव के बाद आई, जो 2024 के हिंसक विद्रोह के बाद पहला राष्ट्रीय मतदान था जिसके कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाया गया था।
नई सरकार के सामने चुनौतियां
तारिक रहमान ने स्वीकार किया कि आने वाली सरकार को गंभीर संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना होगा। उन्होंने कहा, “हम देश में लोकतंत्र की स्थापना का रास्ता बना चुके हैं।”
आगे की राह को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “हम एक ऐसी स्थिति में अपनी यात्रा शुरू करने वाले हैं जहां तानाशाही शासन द्वारा छोड़ी गई कमजोर अर्थव्यवस्था, कमजोर होती संवैधानिक और संरचनात्मक संस्थाएं और बिगड़ती कानून-व्यवस्था की चुनौतियां हैं।”
तारिक रहमान की राजनीतिक वापसी
सत्ता में रहमान की वापसी 60 वर्षीय नेता के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पुनरुत्थान है। वे ब्रिटेन में 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर में बांग्लादेश लौटे थे और एक महत्वपूर्ण मोड़ पर राष्ट्रीय राजनीति में फिर से प्रवेश किया।
वे पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं, जिनकी 1981 में हत्या कर दी गई थी, और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं, जो तीन बार पद पर रह चुकी हैं और देश के राजनीतिक इतिहास में सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक हैं।
भारत के लिए क्या मायने रखता है
Tarique Rahman on India-Bangladesh relations after BNP 2026 election win: भारत के लिए बांग्लादेश में सरकार बदलना महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे जुड़े हुए हैं। बांग्लादेश भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है।
तारिक रहमान की “बांग्लादेश फर्स्ट” नीति से भारत को चिंता हो सकती है, लेकिन यह भी स्वाभाविक है कि कोई भी सरकार अपने देश के हित को प्राथमिकता देगी। असली परीक्षा यह होगी कि नई सरकार अपने सिद्धांतों को व्यावहारिक नीतियों में कैसे बदलती है।
दोनों देशों के बीच पानी बंटवारा, विशेष रूप से तीस्ता नदी का मुद्दा, सीमा पर घुसपैठ और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे लंबे समय से विवादास्पद रहे हैं। नई सरकार इन मुद्दों को कैसे संभालती है, यह भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय करेगा।
दक्षिण एशिया में नया समीकरण
बांग्लादेश में सरकार बदलने से दक्षिण एशिया में नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है। चीन और पाकिस्तान जैसे देश भी इस बदलाव को ध्यान से देख रहे हैं। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि बांग्लादेश के साथ उसके पारंपरिक संबंध मजबूत बने रहें।
तारिक रहमान ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार सभी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखेगी, लेकिन बांग्लादेश का हित सर्वोपरि होगा। यह दृष्टिकोण आने वाले महीनों में भारत-बांग्लादेश संबंधों को नया आयाम देगा।