कश्मीर में स्मार्ट मीटर को लेकर उठा आक्रोश
नवंबर 2025 में कश्मीर की महिलाओं ने स्मार्ट इलेक्ट्रिसिटी मीटर के स्थापन के विरोध में सड़कों पर उतरकर एक महत्वपूर्ण आंदोलन की शुरुआत की है। यह प्रदर्शन केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि आम जनता के जीवन स्तर और सरकारी नीतियों से जुड़ा एक गंभीर मसला है। महिलाओं का यह विरोध बिजली दरों में 20 प्रतिशत की अचानक वृद्धि के कारण उत्पन्न हुआ है, जिसने हजारों परिवारों के बजट को प्रभावित किया है। साथ ही, सरकार द्वारा 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की जो प्रतिबद्धता दी गई थी, वह पूरी नहीं की गई है, जिससे कश्मीर के आम नागरिकों में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है।
स्मार्ट मीटर स्थापन की चुनौतियां
कश्मीर में स्मार्ट मीटर लगाए जाने का लक्ष्य एक आधुनिक और पारदर्शी बिजली वितरण प्रणाली स्थापित करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया में कुछ गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर में 35 प्रतिशत तक का अंतर दर्ज किया गया है, जिससे आम जनता को यह संदेह पैदा हुआ है कि उन्हें अधिक बिजली के लिए चार्ज किया जा रहा है। यह समस्या केवल कश्मीर तक सीमित नहीं है। राजस्थान और अन्य राज्यों में भी स्मार्ट मीटर लगाए जाने के समय इसी तरह के विरोध देखे गए हैं। जनता का विश्वास कि स्मार्ट मीटर सही रीडिंग नहीं दे रहे हैं, इन आंदोलनों की मुख्य वजह बन गई है।
Muslim women in Kashmir now Protesting against installation of Smart Electricity Meters as they are not use to paying electricity bills.
Imagine till recently, electricity was free or subsidised for them – funded by your tax money! pic.twitter.com/rt6gAoIeqZ
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) November 25, 2025
बिजली दरों में अचानक वृद्धि
कश्मीर में विद्युत दरों में 20 प्रतिशत की अचानक बढ़ोतरी आम जनता के लिए एक सदमा साबित हुई है। यह बढ़ोतरी विशेषकर उन परिवारों के लिए कष्टदायक है जो पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कश्मीर में लंबे समय तक बिजली को भारी सब्सिडी प्रदान की जाती रही है, जिससे आम नागरिकों के बिजली के बिलों का बोझ कम रहा है। इस कारण से जब अचानक दरें बढ़ाई गईं, तो यह एक अप्रत्याशित आर्थिक चोट साबित हुई। महिलाओं का विरोध इस बात को दर्शाता है कि सरकार द्वारा नई नीति को लागू करने से पहले आम नागरिकों को तैयार नहीं किया गया था।
सरकार की अधूरी प्रतिबद्धता
कश्मीर की जनता के असंतोष का एक प्रमुख कारण सरकार की अधूरी प्रतिबद्धता भी है। सरकार ने 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करने का वादा किया था, जो गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देना था। हालांकि, इस योजना को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है। महिलाओं का कहना है कि जब सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर रही है, तो उन्हें बिजली के बिलों में भी वृद्धि के लिए क्यों कहा जा रहा है। यह प्रश्न पूरी तरह से न्यायसंगत है और यह दर्शाता है कि सरकार की नीतियों में स्पष्टता और पारदर्शिता की कमी है।
संक्रमणकाल की चुनौतियां
किसी भी बड़े बदलाव के समय समाज को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बिजली वितरण प्रणाली में स्मार्ट मीटर का प्रवेश भी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। लंबे समय तक जब कोई सुविधा सब्सिडी दर पर या कम दामों पर मिलती है, तो अचानक उसमें वृद्धि होने से आम जनता को आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है। यह मनोवैज्ञानिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से एक संवेदनशील मुद्दा है। सरकार को ऐसे संक्रमणकाल में जनता के साथ सहानुभूति दिखानी चाहिए और धीरे-धीरे परिवर्तन करना चाहिए।
बिजली प्रणाली की वास्तविकताएं
दूसरी ओर, यह भी समझना जरूरी है कि भारी सब्सिडी देने वाली बिजली व्यवस्था आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है। कश्मीर में लंबे समय तक भारी सब्सिडी देने के कारण विद्युत क्षेत्र को बड़ी वित्तीय हानि हुई है। इस कारण से बिजली की समस्याएं, बिजली कटौती और अवसंरचना के मुद्दों का सामना करना पड़ा। स्मार्ट मीटर लगाना और सही दामों पर बिजली प्रदान करना एक आवश्यक कदम है ताकि वितरण प्रणाली को स्थिर किया जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया को संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए।
गरीब परिवारों के लिए विशेष सहायता की आवश्यकता
स्मार्ट मीटर और दरों में वृद्धि के बाद सरकार को गरीब परिवारों के लिए विशेष सहायता प्रदान करनी चाहिए। आय के आधार पर बिजली का किराया निर्धारित करने की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि निम्न आय वाले परिवारों को अत्यधिक बोझ न पड़े। यह केवल कश्मीर में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में सरकारी नीति का एक महत्वपूर्ण अंग होना चाहिए। सरकार को समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा करते हुए विकास की ओर बढ़ना चाहिए।
अन्य क्षेत्रों में समान समस्याएं
कश्मीर में स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याएं केवल वहीं सीमित नहीं हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों में भी स्मार्ट मीटर लगाते समय समान प्रकार के विरोध प्रदर्शन हुए हैं। यह एक राष्ट्रव्यापी समस्या है जो दर्शाती है कि स्मार्ट मीटर का कार्यान्वयन पूरे देश में एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया रही है। राजस्थान में भी मीटर रीडिंग में अंतर की समस्याएं सामने आई हैं। इससे साफ है कि यह कोई स्थानीय मुद्दा नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर की समस्या है जिसे संवेदनशीलता के साथ हल करने की आवश्यकता है।
प्रशासन की जिम्मेदारी
कश्मीर के प्रशासन को महिलाओं के विरोध को गंभीरता से लेना चाहिए। सरकार को जनता के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए और समस्याओं का समाधान करना चाहिए। स्मार्ट मीटर की रीडिंग में 35 प्रतिशत का अंतर गंभीर है और इसकी जांच की जानी चाहिए। यदि मीटर में त्रुटि है, तो उसे ठीक किया जाना चाहिए। साथ ही, सरकार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली की अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करना चाहिए। यह कदम जनता के विश्वास को बहाल करेगा और सामाजिक शांति को बनाए रखने में मदद करेगा।
महिलाओं की भूमिका
कश्मीर में महिलाओं का यह आंदोलन केवल बिजली के बिल के बारे में नहीं है, बल्कि यह आर्थिक न्याय और सरकार की जवाबदेही के बारे में है। महिलाएं परिवार के बजट को संभालती हैं और घर के खर्चों का हिसाब रखती हैं। इसलिए, जब बिजली के बिल में अचानक वृद्धि होती है, तो महिलाओं को इसका सीधा असर पड़ता है। महिलाओं का यह विरोध एक सकारात्मक कदम है जो सरकार को जनता की वास्तविक समस्याओं के बारे में जागरूक करता है।
समाधान की ओर रास्ता
इस संकट से निकलने के लिए सरकार को एक व्यापक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। पहले, स्मार्ट मीटर की रीडिंग में अंतर की जांच की जानी चाहिए। दूसरे, 200 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना को ठीक से लागू किया जाना चाहिए। तीसरे, गरीब परिवारों के लिए एक विशेष सब्सिडी योजना बनाई जानी चाहिए। चौथे, आम जनता के साथ खुले संवाद के माध्यम से नई नीतियों को समझाया जाना चाहिए। ये कदम न केवल कश्मीर में, बल्कि पूरे देश में लागू किए जा सकते हैं।
कश्मीर में महिलाओं का स्मार्ट मीटर के विरोध में आंदोलन एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। यह दर्शाता है कि सरकार को विकास की ओर बढ़ते हुए समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा करनी चाहिए। स्मार्ट मीटर एक अच्छी प्रणाली है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका और समय महत्वपूर्ण है। सरकार को महिलाओं के विरोध को सुनना चाहिए, समस्याओं की जांच करनी चाहिए और उचित समाधान प्रदान करने चाहिए। यही लोकतंत्र की असली ताकत है।
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