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250 MLAs ABSENT : मराठी भाषा गौरव दिन पर सियासी सन्नाटा, 250 विधायक नहीं पहुंचे कार्यक्रम में

250 MLAs ABSENT : मराठी भाषा गौरव दिन पर सियासी सन्नाटा, 250 विधायक नहीं पहुंचे कार्यक्रम में
250 MLAs ABSENT : मराठी भाषा गौरव दिन पर सियासी सन्नाटा, 250 विधायक नहीं पहुंचे कार्यक्रम में ( image-AI )

250 MLAs ABSENT : 27 फरवरी… यह तारीख महाराष्ट्र के लिए सिर्फ कैलेंडर का एक दिन नहीं है। यह दिन उस कवि की याद दिलाता है जिसने अपनी लेखनी से मराठी भाषा को नई ऊंचाई दी — कुसुमाग्रज। उनकी जयंती पर हर साल ‘मराठी भाषा गौरव दिन’ मनाया जाता है।

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सजे मंच के सामने खाली कुर्सियां

250 MLAs ABSENT : कवि कुसुमाग्रज की जयंती पर हर साल ‘मराठी भाषा गौरव दिन’ मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारी भावनाओं का आधार है। इस साल भी मुंबई के महाराष्ट्र विधान भवन के केंद्रीय सभागार में राज्य सरकार ने ‘जावे विनोदाच्या गावा’ नाम से एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया। सभागार रंगीन रोशनी से सजा था, मंच आकर्षक था और माहौल में मराठी साहित्य और विनोद की मिठास घुली हुई थी। लेकिन इस पूरे उत्सव के बीच एक कमी साफ महसूस हो रही थी — जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की।मराठी भाषा गौरव दिन के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। गायक श्रीरंग भावे और अदिती प्रभुदेसाई ने सुरों से वातावरण को भावुक और मधुर बना दिया। अभिनेता ऋषिकेश जोशी ने मराठी साहित्य के दिग्गज पु. ल. देशपांडे की विनोदी रचना का पाठ कर लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। ‘लोकसेवेचा लोकजागर’ पुस्तक का विमोचन भी हुआ। सब कुछ था — संस्कृति, परंपरा, संगीत, संदेश — लेकिन जो सबसे ज्यादा नजर आ रहा था, वह था खालीपन। कुर्सियां ज्यादा थीं, लोग कम।

288 में से 250 विधायक नदारद

250 MLAs ABSENT : महाराष्ट्र विधानसभा में 288 विधायक हैं। लेकिन इस कार्यक्रम में लगभग 250 विधायक दिखाई नहीं दिए। यानी 90 प्रतिशत से अधिक जनप्रतिनिधि अनुपस्थित रहे। और यह अनुपस्थिति इसलिए और ज्यादा चुभने वाली लगी क्योंकि उसी समय विधानमंडल का बजट सत्र चल रहा था। अधिकतर विधायक परिसर में ही मौजूद थे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है — क्या भाषा और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम अब प्राथमिकता में नहीं रहे? पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके पुत्र आदित्य ठाकरे सहित कई विपक्षी नेता भी कार्यक्रम में नजर नहीं आए। मराठी अस्मिता की बात करने वाले नेताओं की गैरमौजूदगी ने चर्चा को और तेज कर दिया।

250 MLAs ABSENT : मराठी भाषा गौरव दिन पर सियासी सन्नाटा, 250 विधायक नहीं पहुंचे कार्यक्रम में
250 MLAs ABSENT : मराठी भाषा गौरव दिन पर सियासी सन्नाटा, 250 विधायक नहीं पहुंचे कार्यक्रम में

भाषणों में मराठी ‘ज्ञानभाषा’

250 MLAs ABSENT : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जो भाषा ज्ञान और विज्ञान की भाषा बनती है, वही दुनिया में आगे बढ़ती है। उन्होंने मराठी को सिर्फ भावनाओं की भाषा नहीं, बल्कि ‘ज्ञानभाषा’ बनाने की जरूरत पर जोर दिया। विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी कहा कि तकनीक, शोध और उच्च शिक्षा अगर मराठी में उपलब्ध होंगी, तभी भाषा को असली मजबूती मिलेगी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठी विनोद परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि मुश्किल हालात में भी मुस्कुराना मराठी माणूस की खासियत है। वहीं सुनेत्रा अजीत पवार ने डिजिटल दुनिया में मराठी के ज्यादा इस्तेमाल की अपील की और बताया कि लंदन में महाराष्ट्र भवन के लिए निधि जारी की जा चुकी है।

सवाल जो मन में रह गए

250 MLAs ABSENT : कार्यक्रम खत्म हो गया, तालियां थम गईं, रोशनी बुझ गई — लेकिन कुछ सवाल वहीं रह गए।
– क्या भाषा का सम्मान सिर्फ मंच और भाषणों तक सीमित रह जाएगा?
– क्या सांस्कृतिक आयोजनों में भी राजनीतिक दूरी तय करेगी कि कौन आएगा और कौन नहीं?


सभी दलों के नेता दिखते तो सकारात्मक संकेत होता

250 MLAs ABSENT : जब एक आम मराठी परिवार अपने बच्चों को मराठी सिखाने की कोशिश करता है, जब माता-पिता चाहते हैं कि उनकी भाषा जिंदा रहे और आगे बढ़े — तब जनप्रतिनिधियों की गैरहाजिरी एक अलग ही संदेश देती है। मराठी भाषा गौरव दिन सिर्फ एक सरकारी आयोजन नहीं, यह भावनाओं से जुड़ा दिन है। अगर सभी दलों के नेता एक साथ इस मंच पर दिखते, तो यह मराठी अस्मिता के लिए एक मजबूत और सकारात्मक संकेत होता। अब इंतजार इस बात का है कि क्या आने वाले वर्षों में यह दिन सिर्फ औपचारिकता रहेगा या सच में मराठी को ज्ञान, तकनीक और वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।


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Priyanka C. Mishra

प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार लेखन, डिजिटल कंटेंट निर्माण, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध विषयों पर तथ्यपरक और शोध आधारित लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है, जिससे उनकी सामग्री व्यापक पाठक वर्ग के लिए सहज और विश्वसनीय बनती है।

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