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Maharashtra Onion Crisis Farmers: प्याज के गिरते दामों से बेहाल महाराष्ट्र का किसान, मंडी संकट से लेकर दिल्ली तक हड़कंप

Maharashtra Onion Crisis Farmers: प्याज के गिरते दामों से बेहाल महाराष्ट्र का किसान, मंडी संकट से लेकर दिल्ली तक हड़कंप
Maharashtra Onion Crisis Farmers: प्याज के गिरते दामों से बेहाल महाराष्ट्र का किसान, मंडी संकट से लेकर दिल्ली तक हड़कंप ( Image - AI )

onion price crash : महाराष्ट्र में प्याज के दाम गिरने से किसान संकट में हैं। सरकार ने खरीद बढ़ाने और राहत देने पर चर्चा शुरू की है, लेकिन समाधान अभी पूरी तरह तय नहीं है।

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किसानों पर टूटा प्याज का बोझ: कीमतें गिरकर लागत से नीचे पहुंचीं

Maharashtra Onion Crisis Farmers: महाराष्ट्र में प्याज किसानों की स्थिति इस समय बेहद कठिन बनी हुई है। राज्य की प्रमुख मंडियों में प्याज के दाम लगातार गिरते जा रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। नाशिक और लासलगांव जैसी बड़ी मंडियों में थोक भाव बेहद नीचे पहुंच चुके हैं। इस गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है और कई जगहों पर नुकसान की स्थिति बन गई है।

Maharashtra Onion Crisis Farmers
Maharashtra Onion Crisis Farmers ( image – FB/@Devendra Fadnavis )

केंद्र–राज्य स्तर पर हाईलेवल मंथन

इस बढ़ते कृषि संकट की गंभीरता अब दिल्ली तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने केंद्रीय गृह एवं सहकार मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर किसानों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी भी शामिल रहे। बैठक में प्याज की गिरती कीमतों के साथ-साथ चीनी, इथेनॉल और किसानों के कर्ज पुनर्गठन जैसे अहम मुद्दों पर भी विचार हुआ।

बंपर पैदावार और बंद निर्यात: संकट की असली वजह

मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजह इस वर्ष प्याज की रिकॉर्ड पैदावार मानी जा रही है। रबी सीजन में उत्पादन बढ़ने से बाजार में प्याज की भारी आपूर्ति हो गई है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग कम होने और निर्यात में बाधाओं के कारण विदेशों में जाने वाला प्याज रुक गया है। इसका नतीजा यह हुआ कि घरेलू बाजार में अतिरिक्त स्टॉक जमा हो गया और कीमतों में तेज गिरावट आ गई।

सरकारी खरीद शुरू, लेकिन राहत सीमित: किसानों की उम्मीद अधूरी

सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से सीधे किसानों से प्याज खरीद शुरू की है। शुरुआत में खरीद मूल्य लगभग बारह रुपये पैंतीस पैसे प्रति किलो तय किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर लगभग पंद्रह रुपये अस्सी पैसे प्रति किलो कर दिया गया। हालांकि किसानों का कहना है कि यह राहत पर्याप्त नहीं है, क्योंकि कई जगह उत्पादन लागत अठारह से बीस रुपये प्रति किलो तक पहुंच रही है। ऐसे में सरकारी खरीद के बावजूद किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

लागत बनाम कीमत: प्रति किलो घाटे का दबाव

किसानों के अनुसार प्याज उत्पादन में खाद, बीज, मजदूरी और अन्य खर्चों को मिलाकर कुल लागत काफी बढ़ गई है। जब बाजार और सरकारी खरीद दोनों ही स्तर पर कीमतें कम मिल रही हों, तो प्रति किलो घाटा साफ दिखाई देता है। यही वजह है कि किसान संगठनों द्वारा लगातार मांग की जा रही है कि या तो खरीद मूल्य बढ़ाया जाए या सरकारी खरीद का दायरा और बड़ा किया जाए।

10 लाख टन खरीद का प्रस्ताव: उम्मीद या अभी सिर्फ कागज?

राज्य सरकार ने केंद्र के सामने प्रस्ताव रखा है कि प्याज खरीद का लक्ष्य दो लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर दस लाख मीट्रिक टन किया जाए। इसका उद्देश्य बाजार से अतिरिक्त प्याज निकालकर कीमतों को स्थिर करना है। लेकिन प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव अभी केवल चर्चा और फाइल प्रक्रिया के स्तर पर है। इस पर केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है।

चीनी और इथेनॉल सेक्टर में संभावित राहत के संकेत

इस बैठक में गन्ना और चीनी उद्योग को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य में वृद्धि और इथेनॉल उत्पादन कोटा बढ़ाने पर सहमति बनने की संभावना है। इससे चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति सुधर सकती है और गन्ना किसानों को बकाया भुगतान समय पर मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।

कर्ज पुनर्गठन पर संयुक्त राहत पैकेज की तैयारी

किसानों के बढ़ते कर्ज को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक संयुक्त राहत पैकेज तैयार करने पर विचार कर रही हैं। इसका उद्देश्य संकटग्रस्त किसानों को वित्तीय दबाव से राहत देना बताया जा रहा है। हालांकि यह योजना अभी अंतिम रूप में घोषित नहीं हुई है।

राहत की उम्मीद, लेकिन संकट अभी कायम

Maharashtra Onion Crisis Farmers: कुल मिलाकर महाराष्ट्र के प्याज किसान इस समय भारी आर्थिक दबाव में हैं। बंपर उत्पादन और कमजोर निर्यात ने कीमतों को नीचे गिरा दिया है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने कुछ हद तक खरीद शुरू कर राहत देने की कोशिश की है और भविष्य में बड़े कदमों के संकेत भी दिए हैं, लेकिन अभी कई प्रस्ताव शुरुआती चरण में हैं। ऐसे में किसानों के लिए यह समय आंशिक राहत और अनिश्चितता दोनों से भरा हुआ है, जबकि स्थायी समाधान के लिए ठोस नीतिगत फैसलों की आवश्यकता बनी हुई है।


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Priyanka C. Mishra

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