जलका के पास सड़क पर मौत का तांडव, परिवारों पर टूटा दुख का पहाड़
मारेगांव का जलका गांव आज एक ऐसे हादसे का गवाह बना जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। जब मैंने यह खबर सुनी तो एक पल के लिए विश्वास ही नहीं हुआ कि कैसे एक ट्रक किसी बस का पूरा साइड हिस्सा काट सकता है। लेकिन जब घटनास्थल की तस्वीरें और विवरण सामने आए, तो दिल दहल गया। यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी सड़क सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल है।

हादसे का दर्दनाक विवरण
जलका गांव के पास राजमार्ग पर चल रही एसटी बस अपनी सामान्य गति से यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचा रही थी। बस में सवार लोग अपने-अपने सफर में मगन थे, किसी को अपने घर पहुंचने की जल्दी थी तो किसी को अपने प्रियजनों से मिलने की उत्सुकता। लेकिन किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि यह यात्रा उनके जीवन की आखिरी यात्रा बन जाएगी।
अचानक तेज रफ्तार से आता हुआ एक ट्रक बस के साइड में इतनी जोरदार टक्कर मारी कि बस का पूरा बगल का हिस्सा ही कट गया। जैसे किसी ने चाकू से काट दिया हो। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया और सिर्फ पिछली दो सीटें ही बची रहीं। यह देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि कैसे एक पल में सब कुछ बदल गया।

मौत और चीखों का मंजर
हादसे के तुरंत बाद का मंजर बेहद दर्दनाक था। घायल यात्रियों की चीखें, खून से लथपथ शव, और चारों ओर बिखरा सामान। स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े, लेकिन टक्कर इतनी भीषण थी कि कई यात्रियों को बचाया नहीं जा सका। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक तीन से अधिक लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हैं।
घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। कुछ घायलों की हालत इतनी नाजुक है कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में शिफ्ट करने की तैयारी है। परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है, जो अपने प्रियजनों को बस में बिठाकर भेजते समय कभी नहीं सोचते थे कि यह आखिरी विदाई होगी।

सड़क सुरक्षा पर सवालिया निशान
यह हादसा एक बार फिर हमारी सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। क्या ट्रक ड्राइवर नियमों का पालन कर रहा था? क्या उसने ओवरस्पीडिंग की थी? क्या वह थका हुआ था या लापरवाही बरत रहा था? ये सभी सवाल जांच के दायरे में हैं, लेकिन असल मुद्दा यह है कि हर दिन हमारी सड़कों पर ऐसे हादसे क्यों हो रहे हैं?
मेरे हिसाब से इसकी कई वजहें हैं। पहली, ड्राइवरों की लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी। दूसरी, सड़कों की खराब हालत और तीसरी, ट्रैफिक पुलिस की ढीली निगरानी। अगर समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ऐसे हादसे रोजमर्रा की बात बन जाएंगे।

प्रशासन की जिम्मेदारी और कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। ट्रक चालक को हिरासत में लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ट्रक की स्पीड और चालक की लापरवाही की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या ट्रक का फिटनेस सर्टिफिकेट वैध था या नहीं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच से कुछ बदलेगा? हर हादसे के बाद यही कहानी दोहराई जाती है – जांच होगी, दोषी को सजा मिलेगी। लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाएगा और सख्त नियमों को लागू किया जाएगा।

परिवारों की पीड़ा और समाज की जिम्मेदारी
इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवार आज टूट चुके हैं। किसी का बेटा, किसी का पिता, किसी की पत्नी – सब एक पल में इस दुनिया से चले गए। उनके परिवारों का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। ऐसे में समाज और प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दी जाए।
साथ ही, हम सभी को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सड़क पर गाड़ी चलाते समय सावधानी बरतना, नियमों का पालन करना और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना हम सभी का कर्तव्य है। क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही किसी के जीवन का अंत बन सकती है।
आखिर कब तक यह सिलसिला जारी रहेगा
जलका के इस हादसे ने एक बार फिर यह याद दिला दिया कि हमारी सड़कें कितनी असुरक्षित हैं। हर दिन, हर घंटे कहीं न कहीं ऐसे हादसे हो रहे हैं जो परिवारों को तबाह कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक यह सिलसिला जारी रहेगा? कब हम सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर होंगे?
मेरा मानना है कि इस समस्या का समाधान सिर्फ कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि उसे सख्ती से लागू करने और लोगों में जागरूकता फैलाने से होगा। हर ड्राइवर को यह समझना होगा कि सड़क पर उसकी जिम्मेदारी सिर्फ खुद तक नहीं, बल्कि दूसरों तक भी है।