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बलूचिस्तान में जल्द तैनात हो सकती है चीनी सेना, बलोच नेता ने जयशंकर को लिखा खत

Balochistan China Military: बलूचिस्तान में चीनी सेना की तैनाती की चेतावनी, जयशंकर को मिला खत
Balochistan China Military: बलूचिस्तान में चीनी सेना की तैनाती की चेतावनी, जयशंकर को मिला खत (File Photo)

बलोच नेता मीर यार ने विदेश मंत्री जयशंकर को खत लिखकर चेतावनी दी है कि चीन जल्द ही बलूचिस्तान में सेना तैनात कर सकता है। CPEC के आखिरी चरण में पहुंचने के साथ चीन-पाकिस्तान गठजोड़ मजबूत हो रहा है। 60 मिलियन बलोच लोगों की इच्छा के बिना चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी को लेकर एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। बलूचिस्तान के जाने-माने नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खुला खत लिखकर इस खतरे के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले कुछ महीनों में चीन बलूचिस्तान में अपनी मिलिट्री फोर्स तैनात कर सकता है। यह घटनाक्रम न सिर्फ बलूचिस्तान के लोगों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

जयशंकर को लिखे खत में क्या कहा

बलोच नेता मीर यार ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए विदेश मंत्री जयशंकर को लिखा हुआ एक खुला खत साझा किया। इस खत में उन्होंने बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति और चीन-पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मीर यार ने लिखा है कि पाकिस्तान पिछले कई दशकों से बलूचिस्तान का शोषण कर रहा है और अब चीन भी इस खेल में शामिल हो गया है।

उन्होंने अपने खत में स्पष्ट रूप से कहा कि बलूचिस्तान के लोग पिछले 79 सालों से पाकिस्तानी सरकार के कब्जे, उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को झेल रहे हैं। मीर यार का मानना है कि अब समय आ गया है कि इस समस्या को जड़ से खत्म किया जाए ताकि बलूचिस्तान में शांति स्थापित हो सके और वहां के लोग अपनी संप्रभुता हासिल कर सकें।

CPEC के आखिरी चरण की ओर बढ़ता प्रोजेक्ट

मीर यार बलूच ने अपने खत में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC के बारे में भी विस्तार से बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट अब अपने आखिरी स्टेज में पहुंच गया है। बलूचिस्तान के लोग इस गठबंधन को बेहद खतरनाक मानते हैं क्योंकि इससे चीन की पाकिस्तान में और खासकर बलूचिस्तान में पकड़ और मजबूत होगी।

CPEC एक बहुत बड़ा बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है जो चीन को पाकिस्तान के गवादर बंदरगाह से जोड़ता है। यह बंदरगाह बलूचिस्तान में स्थित है और चीन के लिए बेहद रणनीतिक महत्व रखता है। इस प्रोजेक्ट के जरिए चीन को अरब सागर तक सीधी पहुंच मिल जाती है, जो उसकी व्यापारिक और सामरिक योजनाओं के लिए बेहद जरूरी है।

चीनी सेना की तैनाती का खतरा

बलोच नेता ने अपने खत में सबसे बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में चीन की सीधी मिलिट्री मौजूदगी देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाली ताकतों को मजबूत नहीं किया गया और अगर इस मुद्दे को नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन बहुत जल्द अपनी सेना वहां तैनात कर सकता है।

मीर यार ने यह भी कहा कि बलूचिस्तान में रहने वाले 60 मिलियन बलोच लोगों की इच्छा के बिना उनकी धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी न सिर्फ बलूचिस्तान बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ा खतरा होगी। यह स्थिति पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती पैदा कर सकती है।

बलूचिस्तान का इतिहास और संघर्ष

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन वहां की जनसंख्या सबसे कम है। यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, खासकर खनिज और गैस के मामले में। लेकिन इन संसाधनों का फायदा स्थानीय बलोच लोगों को नहीं मिलता। पाकिस्तानी सरकार इन संसाधनों का दोहन करती रही है जबकि स्थानीय लोग गरीबी और पिछड़ेपन में जीवन गुजार रहे हैं।

बलोच लोग लंबे समय से अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान ने उन पर जबरन कब्जा किया है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा है। पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों द्वारा बलोच लोगों पर अत्याचार और मानवाधिकारों के उल्लंघन की कई रिपोर्टें सामने आती रहती हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा

भारत के लिए बलूचिस्तान में चीनी सेना की तैनाती एक बड़ी चिंता का विषय हो सकती है। चीन पहले से ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में CPEC के जरिए काफी सक्रिय है, जिसे भारत अपना अवैध कब्जा मानता है। अगर चीन बलूचिस्तान में भी अपनी सेना तैनात करता है, तो भारत की सीमाओं के पास चीन की मिलिट्री मौजूदगी और बढ़ जाएगी।

इसके अलावा, गवादर बंदरगाह अरब सागर में स्थित है जो भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से एक संवेदनशील इलाका है। चीन की बढ़ती मौजूदगी से इस क्षेत्र में सामरिक संतुलन बिगड़ सकता है।

पहलगाम हमले पर भारत की तारीफ

मीर यार बलूच ने अपने बयान में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान को दिए गए मुंहतोड़ जवाब की भी तारीफ की है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख सराहनीय है और यही रवैया बलूचिस्तान के लोगों को भी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका

बलोच नेताओं का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बलूचिस्तान के मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए। वहां हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन और चीन-पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ को गंभीरता से लेने की जरूरत है। अगर समय रहते इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।

बलूचिस्तान में चीनी सेना की संभावित तैनाती एक बड़ा मुद्दा है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मीर यार बलूच द्वारा विदेश मंत्री जयशंकर को लिखा गया खत इस बात का संकेत है कि बलोच लोग भारत से उम्मीद कर रहे हैं। यह मुद्दा सिर्फ बलूचिस्तान तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ा है। भारत को इस मामले में सतर्क रहने और अपनी रणनीति बनाने की जरूरत है ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।

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Asfi Shadab

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