Census 2027: देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और आर्थिक स्थिति की सबसे प्रामाणिक तस्वीर सामने लाने वाली प्रक्रिया जनगणना एक बार फिर शुरू होने जा रही है। केंद्र सरकार ने भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण की अधिसूचना जारी कर दी है। यह केवल आंकड़े जुटाने की कवायद नहीं है, बल्कि यह वह आधार है, जिस पर आने वाले वर्षों की योजनाएं, नीतियां और संसाधनों का बंटवारा तय होता है।
सरकार की अधिसूचना के अनुसार, इस वर्ष 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घर-घर जाकर जनगणना का कार्य किया जाएगा। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को अपने स्तर पर 30 दिनों की अवधि तय करने की स्वतंत्रता दी गई है, जिसके भीतर यह कार्य पूरा किया जाएगा।
जनगणना 2027 क्यों है खास
यह जनगणना इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि यह लगभग 16 वर्षों के अंतराल के बाद हो रही है। भारत में पिछली पूर्ण जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। उसके बाद 2021 की जनगणना कोविड महामारी के कारण टलती चली गई। इस लंबे अंतराल के कारण देश की जनसंख्या, शहरीकरण, प्रवासन और सामाजिक ढांचे में बड़े बदलाव आए हैं, जिनका कोई अद्यतन आधिकारिक रिकॉर्ड अब तक उपलब्ध नहीं है।
सरकारी योजनाओं से लेकर संसदीय सीटों के परिसीमन तक, हर अहम निर्णय के लिए जनगणना के आंकड़े बुनियाद का काम करते हैं। ऐसे में जनगणना 2027 केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नीति निर्धारण की दिशा तय करने वाला कदम है।
घर-घर जनगणना और स्व-गणना की सुविधा
गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि घर-घर जनगणना शुरू होने से 15 दिन पहले तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसका मतलब यह है कि नागरिक चाहें तो स्वयं भी डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
यह व्यवस्था समय की बचत के साथ-साथ आंकड़ों की सटीकता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है। डिजिटल युग में यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जहां नागरिक सीधे प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।
इससे पहले कब हुई थी जनगणना
भारत में जनगणना की परंपरा औपनिवेशिक काल से चली आ रही है। आज़ादी के बाद पहली जनगणना वर्ष 1951 में हुई थी। इसके बाद हर दस वर्ष में नियमित रूप से जनगणना होती रही।
पिछली जनगणना वर्ष 2011 में संपन्न हुई थी। उस समय भारत की कुल जनसंख्या लगभग 121 करोड़ दर्ज की गई थी। 2001 से 2011 के बीच देश की जनसंख्या में लगभग 17.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसी जनगणना के आधार पर यह सामने आया था कि देश में शहरी आबादी तेजी से बढ़ रही है और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन लगातार जारी है।
2011 के बाद कितना बदला भारत
2011 के बाद के वर्षों में भारत ने सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर बड़े बदलाव देखे हैं। इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का विस्तार, नए शहरों का विकास, रोजगार की तलाश में राज्यों के भीतर और बाहर बढ़ता प्रवासन तथा शिक्षा के स्तर में बदलाव—इन सभी ने देश की जनसंख्या संरचना को प्रभावित किया है।
हालांकि अनुमान लगाए जाते रहे हैं कि भारत की जनसंख्या 140 करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि के लिए जनगणना के आंकड़ों का इंतजार है। यही वजह है कि जनगणना 2027 को लेकर नीति विशेषज्ञों और प्रशासनिक तंत्र में खास उत्सुकता है।