Land for Job Case: बिहार की राजनीति में दशकों से प्रभावशाली रहे राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के लिए शुक्रवार का दिन कानूनी मोर्चे पर भारी पड़ता नजर आया। जमीन के बदले नौकरी घोटाले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत ने न केवल उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय कर दिए, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि मामला महज कुछ लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित आपराधिक साजिश की ओर इशारा करता है।
अदालत ने क्यों माना मामला गंभीर
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। कोर्ट के अनुसार यह मामला अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा किए गए स्वतंत्र अपराधों का नहीं है, बल्कि इसमें सभी की भूमिका आपस में जुड़ी हुई दिखाई देती है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपितों ने साझा उद्देश्य के तहत काम किया और एक-दूसरे की मदद से कथित अपराध को अंजाम दिया। इस टिप्पणी ने मामले की गंभीरता को और गहरा कर दिया है।
लालू यादव के साथ पूरा परिवार कटघरे में
इस केस की सबसे अहम बात यह है कि अदालत ने लालू यादव के साथ-साथ उनके परिवार के कई प्रमुख सदस्यों पर भी आरोप तय किए हैं। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, राज्यसभा सांसद मीसा भारती और हेमा यादव शामिल हैं। इन सभी पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए गए हैं। अदालत ने माना कि सभी की भूमिकाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई थीं और कथित तौर पर लाभ उठाने की प्रक्रिया में कोई भी भूमिका अलग-थलग नहीं थी।
क्या है जमीन के बदले नौकरी घोटाला
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। ये जमीनें बाद में लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर ट्रांसफर की गईं।
जांच एजेंसियों का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से की गई और इसमें सरकारी पद का दुरुपयोग किया गया। अदालत ने भी अपने आदेश में इसी संगठित ढांचे की ओर संकेत किया है।