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पटना सिविल कोर्ट को फिर बम से उड़ाने की धमकी, पांच दिनों में तीसरी बार आया ईमेल

पटना सिविल कोर्ट को फिर बम से उड़ाने की धमकी, पांच दिनों में तीसरी बार आया ईमेल
पटना सिविल कोर्ट को फिर बम से उड़ाने की धमकी (File Photo)

पटना सिविल कोर्ट को पांच दिनों में तीसरी बार बम से उड़ाने की धमकी मिली है। ईमेल मिलते ही परिसर खाली कराया गया और सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुट गईं। लगातार मिल रही धमकियों से न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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Dipali Kumari
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Patna Civil Court Bomb Threat: राजधानी पटना में न्याय व्यवस्था एक बार फिर सतर्कता की कसौटी पर खड़ी है। पटना सिविल कोर्ट को आज गुरुवार को बम से उड़ाने की नई धमकी मिली, जिसने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत हरकत में ला दिया। यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते पांच दिनों में यह तीसरी बार है जब कोर्ट को धमकी भरा ईमेल मिला है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने न केवल न्यायिक कामकाज को प्रभावित किया है, बल्कि आम लोगों के मन में भी डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।

लगातार मिल रही धमकियां

9 फरवरी और 11 फरवरी के बाद 12 फरवरी को फिर एक ईमेल के जरिए कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। संदेश मिलते ही अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एहतियात के तौर पर कोर्ट परिसर को खाली कराया गया और सभी प्रवेश द्वारों पर रोक लगा दी गई।

लगातार मिल रहे इन ईमेल ने प्रशासन के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। इस वर्ष अब तक सात से आठ बार इस तरह की धमकियां मिल चुकी हैं। सवाल यह है कि आखिर इन ईमेल के पीछे कौन है और इसका उद्देश्य क्या है? क्या यह महज शरारत है या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा?

सुरक्षा एजेंसियों की सघन जांच

धमकी मिलते ही पीरबहोर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे परिसर को घेर लिया गया। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड को बुलाकर कोने-कोने की तलाशी ली गई। हर संदिग्ध वस्तु की जांच की जा रही है।

टाउन डीएसपी राजेश रंजन ने स्पष्ट कहा कि जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती, सामान्य कामकाज शुरू करना जोखिम भरा होगा। सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यह बयान बताता है कि प्रशासन स्थिति को गंभीरता से ले रहा है।

पूरी इमारत उड़ाने का दावा

11 फरवरी को आए एक ईमेल में दावा किया गया था कि कोर्ट परिसर में पांच बम लगाए गए हैं और पूरी बिल्डिंग को उड़ा दिया जाएगा। उस दिन भी व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया था, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

इसके बावजूद बार-बार मिल रही धमकियों ने चिंता बढ़ा दी है। यदि हर बार यह फर्जी साबित होता है, तब भी इससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है और लोगों का समय व संसाधन नष्ट होते हैं।

न्यायिक कार्य पर असर

पटना सिविल कोर्ट राजधानी की सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक संस्थाओं में से एक है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मामले सुने जाते हैं। हर बार परिसर खाली कराए जाने से सुनवाई टल जाती है और वादियों को निराश होकर लौटना पड़ता है।

एक पत्रकार के तौर पर जब मैंने वहां मौजूद कुछ लोगों से बात की, तो उनकी सबसे बड़ी चिंता यही थी कि सुरक्षा के बीच न्याय में देरी न हो। न्याय में देरी, न्याय से वंचित होने जैसा ही है। ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है—सुरक्षा सुनिश्चित करना और न्यायिक कार्य को बाधित न होने देना।

साइबर एंगल से जांच

पुलिस अब इन धमकी भरे ईमेल की जांच साइबर एंगल से भी कर रही है। आईपी एड्रेस, मेल सर्वर और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि संदेश कहां से भेजे जा रहे हैं।

आज के डिजिटल युग में इस तरह की धमकियां देना आसान है, लेकिन इन्हें गंभीरता से लेना भी उतना ही जरूरी है। यदि यह किसी शरारती तत्व का काम है, तो उसे जल्द पकड़ना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

राजधानी की सबसे अहम न्यायिक इमारत को बार-बार निशाना बनाया जाना सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या ईमेल फिल्टरिंग सिस्टम पर्याप्त है? क्या खुफिया तंत्र पहले से ऐसी गतिविधियों को भांप पाने में सक्षम है?

हालांकि हर बार तलाशी में कुछ नहीं मिला है, लेकिन केवल “कुछ नहीं मिला” कह देना पर्याप्त नहीं है। लोगों का भरोसा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।