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Kolkata News: सेबाश्रय एफआईआर से लेकर नगर निकाय, भर्ती, साइबर अपराध और अस्पताल व्यवस्था पर दिलीप घोष का बयान

Dilip Ghosh Sebashray FIR Reaction: सेबाश्रय एफआईआर से लेकर नगर निकाय, भर्ती, साइबर अपराध और अस्पताल व्यवस्था पर दिलीप घोष का बयान (Photo: RB / Ekbal)

Dilip Ghosh Sebashray FIR Reaction: भाजपा नेता दिलीप घोष ने सेबाश्रय एफआईआर, नगर निकायों की व्यवस्था, भर्ती, साइबर अपराध, मिड डे मील, अस्पतालों और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जहां भी शिकायतें सामने आई हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

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Asfi Shadab
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सेबाश्रय एफआईआर और पश्चिम बंगाल के कई मुद्दों पर दिलीप घोष का बयान

Dilip Ghosh Sebashray FIR Reaction: कोलकाता। सेवाश्रय स्वास्थ्य शिविर मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस मामले में अब थाने में विधिवत एफआईआर (FIR) दर्ज हो चुकी है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा, “कोई किसी को घेर नहीं रहा है।। जिन्होंने सत्ता की मदद से लोगों की धन-संपत्ति और स्वास्थ्य को लेकर खिलवाड़ किया, उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए… डॉक्टर के बिना प्रिस्क्रिप्शन दिया जा रहा है, इसका नतीजा एक व्यक्ति का पैर काटना पड़ा।” घोष ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने खुद स्वीकार किया कि प्रिस्क्रिप्शन डॉक्टर के हाथ का नहीं लगता।

घोष ने दावा किया कि यह मामला महज एक उदाहरण है और सरकार बनने के दो महीने में ही लोगों ने बोलना शुरू किया है, जबकि असली भ्रष्टाचार “हिमशैल के सिरे” जितना ही सामने आया है।

वार्ड बंटवारे पर सवाल कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 200 किए जाने पर घोष ने असमानता का मुद्दा उठाया  “एक वार्ड में 76 बूथ हैं तो दूसरे में सिर्फ 12, फिर भी दोनों जगह एक-एक ही पार्षद।” पंचायत मंत्री के तौर पर उन्होंने बताया कि राज्य में एक पंचायत में 30 से ज्यादा सदस्य होते हैं, जबकि अन्य राज्यों में यह संख्या तीन-चार तक सीमित है। सरकार चार हजार से अधिक नई पंचायतें बनाने की तैयारी में है।

कमीशनखोरी का आरोप घोष के मुताबिक, नगरपालिकाओं और पंचायतों के पास केंद्र सरकार के हज़ारों करोड़ रुपये पड़े हैं जिन्हें प्लानिंग की कमी और कमीशनखोरी के चलते खर्च नहीं किया जा सका।

Dilip Ghosh Sebashray FIR Reaction: सेबाश्रय एफआईआर से लेकर नगर निकाय, भर्ती, साइबर अपराध और अस्पताल व्यवस्था पर दिलीप घोष का बयान
Dilip Ghosh Sebashray FIR Reaction: सेबाश्रय एफआईआर से लेकर नगर निकाय, भर्ती, साइबर अपराध और अस्पताल व्यवस्था पर दिलीप घोष का बयान (Photo: RB / Ekbal)

सेबाश्रय मामले की जांच और कार्रवाई की मांग पर क्या बोले दिलीप घोष?

क्लबों-संस्थाओं पर कब्ज़े का मुद्दा सुरुचि संघ के बाद अब विश्वास ब्रदर्स के बाहर होने का हवाला देते हुए घोष ने कहा कि क्लब, नर्सिंग होम, अस्पताल और दुकानों तक पर “कब्ज़े की राजनीति” चली, जो अब खत्म हो रही है।

भर्ती घोटाला, फिरहाद हकीम का नाम दक्षिण दमदम नगरपालिका भर्ती भ्रष्टाचार मामले में मंत्री फिरहाद हकीम का नाम सामने आने पर घोष ने झाड़ग्राम का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां 400 से अधिक भर्ती कर्मचारियों में से केवल 17 ही काम पर आते हैं।

अन्य बिंदु बिधाननगर साइबर क्राइम मामले में करोड़ों रुपये बरामद होने और देवराज के लॉकर से सोना मिलने पर घोष ने कहा कि 5,000-6,000 केस चलाने की क्षमता पुलिस के पास फिलहाल नहीं है। मिड-डे मील योजना को उन्होंने “बड़ा घोटाला” बताते हुए कहा कि छात्र-विहीन 8,000 स्कूलों में भी योजना चलती रही। आवासीय स्कूलों में एलपीजी (LPG) कनेक्शन और अस्पतालों में मरीज़ों के भोजन बजट (₹54 प्रति मरीज़) पर भी उन्होंने पुरानी व्यवस्था की खामियां गिनाईं।

सेवाश्रय मामले में एफआईआर (FIR) के बाद जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी, वहीं 21 जुलाई कार्यक्रम को लेकर तृणमूल के भीतर मतभेद भी सामने आते रहे हैं।

Dilip Ghosh Sebashray FIR Reaction: सेबाश्रय एफआईआर से लेकर नगर निकाय, भर्ती, साइबर अपराध और अस्पताल व्यवस्था पर दिलीप घोष का बयान
Dilip Ghosh Sebashray FIR Reaction: सेबाश्रय एफआईआर से लेकर नगर निकाय, भर्ती, साइबर अपराध और अस्पताल व्यवस्था पर दिलीप घोष का बयान (Photo: RB / Ekbal)

रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।